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प्रत्येक भारतीय के डीएनए में संस्कृत भाषा समाहित है: दत्तात्रेय वज्रहल्ली

आरए गीता विद्यालय में दसदिवसीय आवासीय संस्कृतभाषा प्रबोधन वर्ग का उद्घाटन

राकेश नाथ 
नई दिल्ली। संस्कृत भारती के दसदिवसीय आवासीय संस्कृतभाषा प्रबोधन वर्ग के उद्घाटन सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में संस्कृत भारती के अखिल भारतीय सह-संगठन मंत्री दत्तात्रेय वज्रहल्ली ने अपने वक्तव्य में कहा कि संस्कृत भाषा एवं भारतीय संस्कृति का परस्पर अभेद संबंध है। हम सभी अत्यंत भाग्यशाली एवं गौरवशाली हैं जो हमें संस्कृत भाषा सीखने एवं समझने का अवसर प्राप्त हुआ है। जैसे मुल्तान, मूलस्थान का अपभ्रंश है यह ज्ञान हमें संस्कृत भाषा के अवगमन से ही संभव होगा। संस्कृत की सहजता एवं सरलता के कारण यह भाषा सभी को समझ में आती है और इसी कारण यह प्रत्येक भारतीय के डीएनए में समाहित है। ज्ञान विज्ञान का कोई भी ऐसा क्षेत्र नहीं है जो संस्कृत भाषा से संबंध न रखता हो। भारतीय-ज्ञान-परम्परा के सभी विषयों का उद्गम संस्कृत भाषा एवं उसका साहित्य है। आयुर्वेद, वैदिक-गणित, खगोलशास्त्र, भारतीयन्याय व्यवस्था सहित भारतीय शिक्षा नीति 2020 के मूल उद्देश्य की संवाहिका भाषा एवं ज्ञान की आधारशिला यह संस्कृत भाषा ही है।  
संस्कृतभारती दिल्ली प्रान्त द्वारा आर. ए. गीता सहशिक्षा वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय शंकर नगर दिल्ली में दिनांक 02 जनवरी से 11 जनवरी तक दसदिवसीय आवासीय संस्कृतभाषा प्रबोधन वर्ग का आयोजन किया जा रहा है।
 
               संस्कृत भारती दिल्ली प्रान्त के प्रशिक्षण प्रमुख डॉ. मनीष जुगरान ने प्रास्ताविक उद्बोधन में कहा कि संस्कृतभारती विश्व के विविध देशों में संस्कृत भाषा एवं भारतीय संस्कृति के प्रचार प्रसार के कार्यों में संलग्न है। संस्कृतभाषा को जनभाषा बनाने हेतु संस्कृत भारती द्वारा अनेक शिक्षणात्मक कार्यक्रमों – सम्भाषण शिबिर, बालकेन्द्र, पत्राचार द्वारा संस्कृत, गीताशिक्षण, प्रबोधन वर्ग, शास्त्र-शिक्षणवर्ग, शिक्षक-प्रशिक्षण वर्ग इत्यादि का आयोजन किया जाता है। इसी क्रम में संस्कृतभारती दिल्ली प्रान्त द्वारा शीतकालीन प्रबोधन वर्ग का आयोजन किया जा रहा है जिसमें दिल्ली के 100 से अधिक शिक्षार्थी संस्कृतभाषा का अभ्यास कर रहें हैं। 
 
             कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विद्याभारती दिल्ली प्रान्त के महामन्त्री श्रीमान् सतीश माहेश्वरी जी ने कहा कि हर भारतीय को संस्कृत भाषा का इतना ज्ञान अवश्य होना चाहिए कि वह अपना परिचय, कार्य एवं स्थान को संस्कृत में बता सकें। अतः सभी को संस्कृत भाषा का अध्ययन अवश्य करना चाहिए। इस अवसर पर संस्कृत भारती के अखिल भारतीय न्यास के अध्यक्ष श्रीमान् प्रवीणकांत ने अपनी शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि संस्कृत भाषा के अध्ययन से हम भरत, भारत एवं भारतीयता के इतिवृत्त को समझ पाएँगे। संस्कृत भारती दिल्ली के अध्यक्ष श्रीमान् वागीश भट्ट द्वारा मंचासीन सभी अधिकारी एवं अभ्यागतों का धन्यवाद ज्ञापन किया गया। दिल्ली विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के आचार्य एवं संस्कृत भारती, दिल्ली के प्रान्त-मन्त्री प्रो. रणजित् बेहेरा, दिल्ली प्रान्त के सह मन्त्री श्रीमान् आशुतोष, श्रीमती पूनम कुण्डू, प्रान्त संघटन मन्त्री श्रीमान् लवीश सती सहित दिल्ली विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय के अनेक आचार्य गण एवं संस्कृतभारती, दिल्ली के कार्यकर्ता उपस्थित हुए।

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