परीक्षा पे चर्चा 2026 के दौरान प्रधानमंत्री जी ने देशभर के विद्यार्थियों से सीधा संवाद करते हुए न केवल परीक्षा के तनाव पर खुलकर बात की, बल्कि सफलता के ऐसे सरल और व्यावहारिक मंत्र दिए जो हर छात्र के जीवन में आत्मबल भर सकते हैं।
इस प्रेरक संवाद में पढ़ाई, अनुशासन, लक्ष्य निर्धारण, समय प्रबंधन और असफलता से सीखने जैसे विषयों पर प्रधानमंत्री के अनुभव-आधारित सुझाव छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों—तीनों के लिए मार्गदर्शक साबित होते हैं। परीक्षा पे चर्चा 2026” कार्यक्रम में विद्यार्थियों के साथ प्रधानमंत्री का संवाद — सफलता, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच के प्रेरक सूत्रों के साथ
प्रधानमंत्री- चलिए अब शुरू करते हैं, बताइए!
विद्यार्थी- मैं सानवी आचार्य, आप ही के स्टेट से यानी गुजरात से हूं। मेरा पहला सवाल यह है कि पेरेंट्स भी हमारी चिंता करते हैं, टीचर्स भी हमें सपोर्ट करते हैं। लेकिन मेन इशू तब आ जाता है कि टीचर्स हमें पढ़ाई का एक अलग पैटर्न सजेस्ट करते हैं। पेरेंट्स एक अलग तरह से बोलते हैं कि यह पैटर्न से पढ़ो और स्टूडेंट्स में तो अलग ट्रेंड ही चल रहा होता है, तो उस समय हम कंफ्यूज हो जाते हैं कि कौन सा पैटर्न सही है।
प्रधानमंत्री- देखिए, यह जीवन भर ऐसा रहता है। मैं प्रधानमंत्री बन गया ना, तो भी कोई बताता है, ऐसे करो, कोई कहता है, ऐसे करो। आप घर में खाने पर देखना, खाने पर बैठे होंगे सब भाई-बहन, हर एक के खाने की पैटर्न अलग होगी। कोई सब्जी से शुरू करेगा।
विद्यार्थी- यस सर!
प्रधानमंत्री- कोई दाल से शुरू करेगा।
विद्यार्थी- यस सर!
प्रधानमंत्री- कोई रोटी, सब्जी, दाल, सब इकट्ठा करके डालेगा। हर एक के पैटर्न अलग-अलग है कि नहीं?
विद्यार्थी- यस सर!
प्रधानमंत्री- आप की अपनी क्या, उनकी कॉपी करते हैं आप?
विद्यार्थी- नो सर!
प्रधानमंत्री- आप अपने पैटर्न से खाते हैं, तब मजा आता है ना?
विद्यार्थी- यस सर!
प्रधानमंत्री- तो ऐसे कुछ लोग होते हैं कि वह उनको लगता है कि भई रात को ठीक से मैं पढ़ पाता हूं। कुछ लोगों को लगता है, सुबह 4:00 बजे उठकर के पढ़ूंगा। हर एक की अपनी पैटर्न होती है?
विद्यार्थी- यस सर!
प्रधानमंत्री- लेकिन कुछ लोगों की बेईमानी होती है। रात को मम्मी को कहते हैं, नहीं कल से मैंने सुबह पढ़ना शुरू किया है। सुबह मम्मी उठाने आती है, तो कहते हैं नहीं मुझे तो, तो यह टालते रहते हैं।
विद्यार्थी- यस सर!
प्रधानमंत्री- पहली बात है, आप अपनी जो पैटर्न है, उस पर पूरा भरोसा करो। लेकिन जो पैटर्न के लिए सुझाव देते हैं, उसको ध्यान से सुनो, समझने की कोशिश करो और उसमें आपको लगता है कि यार मेरी पैटर्न तो है, लेकिन यह चीज में अगर जोड़ दूं, तो अच्छा होगा। लेकिन किसी के कहने पर मत जोड़ो, अपने अनुभव से जोड़ो। अब जैसे परीक्षा पर चर्चा मैंने जब शुरू किया, तब एक पैटर्न था। अब धीरे-धीरे मैं उसमें इंप्रूव करता जा रहा हूं।
विद्यार्थी- यस सर!
प्रधानमंत्री- बदलता जा रहा हूं। इस बार मैंने अलग-अलग राज्यों में भी किया। तो मैंने भी अपनी पैटर्न बदली। लेकिन मूल पैटर्न को छोड़ा नहीं।
विद्यार्थी- यस सर!
विद्यार्थी- उनका नेचर भी बहुत अच्छा था। वह बहुत फ्रेंडली थी। वह हम सब बच्चों के साथ भी एकदम घुल मिल गए थे। प्रधानमंत्री जी ने हमें बताया कि हमें सभी का पैटर्न सुनना है, सभी में से कुछ-कुछ गुण लेने हैं। हमें हमारा पैटर्न में ही फोकस करना है। सबका कुछ अच्छा-अच्छा गुण हमें लेना है और वही पैटर्न हमें धीरे-धीरे आगे बढ़ाना है।
विद्यार्थी- नर्मदे सर!
प्रधानमंत्री- नर्मदे हर!
विद्यार्थी- सर मेरा नाम आयुष तिवारी है। सर तो मेरा प्रश्न यह है कि अक्सर कई बार हम स्कूल या टीचर की स्पीड से मैच नहीं कर पाते और जो छूट जाता है, हम उसे कवर करने के चक्कर में आगे के चैप्टर भी मिस करते जाते हैं और हम पीछे रह जाते हैं, तो इस सिचुएशन में हम कैसे अपने उसको मैनेज करें?
प्रधानमंत्री- तो आपकी टीचर के खिलाफ शिकायत है?
विद्यार्थी- नो सर!
प्रधानमंत्री- लेकिन आपने बड़ी चतुराई से टीचर के खिलाफ अपनी कंप्लेंट बता दी। तो मैं जवाब टीचर के लिए देता हूं।
विद्यार्थी- यस सर!
प्रधानमंत्री- टीचर का प्रयास रहना चाहिए कि स्टूडेंट की यह स्पीड है। एक कदम ज्यादा स्पीड मेरी रहेगी, ज्यादा नहीं। हमारा लक्ष्य ऐसा होना चाहिए, जो पहुंच में हो, लेकिन पकड़ में ना हो।
विद्यार्थी- यस सर!
विद्यार्थी- सर एग्जाम वॉरियर में लिखा है, मंत्र 26, goal should be within reach but not easily achievable.
प्रधानमंत्री- वाह! सब याद रखते हैं आप लोग?
विद्यार्थी- यस सर!
प्रधानमंत्री- देखिए, 50 कदम आधा आगे चला जाएगा, तो स्टूडेंट कहेगा, भाई यह तो चला गया, मेरा काम नहीं है। जैसे किसान खेत को जोतता है ना, स्टूडेंट के मन को जोतना चाहिए। इसका तरीका क्या है? मान लीजिए, जनवरी के तीसरे सप्ताह में वह हिस्ट्री का यह पाठ पढ़ने वाले हैं, तो जनवरी 1 तारीख को बता दें कि भाई पहले वीक में हिस्ट्री का यह पाठ पढ़ाऊंगा, दूसरे वीक में हिस्ट्री का यह पाठ पढ़ाऊंगा, तीसरे वीक में हिस्ट्री का यह पाठ पढ़ाऊंगा। तो आपको पता है कि आने वाले 3 सप्ताह में यह-यह तीन विषय आने वाले हैं। फिर वह कहेगा कि ऐसा करो, आप मैं पढ़ाऊं, उसके पहले पढ़ना शुरू कर दो। पढ़ करके आओ, किसी को पूछ के आओ।
विद्यार्थी- यस सर!
प्रधानमंत्री- गूगल पर जाकर के कुछ करना है, तो वहां करके आ जाओ।
विद्यार्थी- यस सर!
प्रधानमंत्री- और उसके बाद एक्चुअली जब पाठ पढ़ाएंगे, तो क्या होगा?
विद्यार्थी- सर क्यूरियोसिटी आएगी हमारे में।
विद्यार्थी- सर हमें क्यूरियोसिटी होएगी। हमें ज्यादा समझ आएगा क्योंकि हमने पहले से पढ़ा होगा।
विद्यार्थी- फोकस भी और अच्छा रहेगा।
प्रधानमंत्री- मानसी!
विद्यार्थी- सर अगर कोई चैप्टर हमें बहुत ज्यादा इंटरेस्टिंग लगता है, तो हमें उसको और समझने की, और जानने की इच्छा होगी, जिससे हमें और अच्छे से रिवाइज हो जाएगा वह चैप्टर।
प्रधानमंत्री- बताइए, सिंपल सा काम है ना?
विद्यार्थी- यस सर!
प्रधानमंत्री- फिर आपको उस टीचर की स्पीड का प्रॉब्लम आएगा?
विद्यार्थी- नो सर!
प्रधानमंत्री- नहीं आएगा। आप पीछे रह गए ऐसा भाव आएगा?
विद्यार्थी- नो सर!
प्रधानमंत्री- क्यों? क्योंकि आप टीचर से एक कदम आगे चले गए।
विद्यार्थी- यस सर!
प्रधानमंत्री- मन को जोतो, फिर मन को जोड़ो और फिर आपको पढ़ाई के जो विषय रखने हैं, रखो। तो आप स्टूडेंट को हमेशा सफल पाओगे।
विद्यार्थी- हर किसी को यह अवसर नहीं मिल पाता कि पीएम माननीय प्रधानमंत्री, जी से स्वयं आमने-सामने बैठकर उनसे सवाल पूछ कर, उनसे अपने बातचीत शेयर कर पाएं। उन्होंने बताया कि हम टीचर से दो कदम पीछे होने के बजाए दो कदम उनसे आगे रहें, तो हम उनसे पीछे रह ही नहीं सकते।
विद्यार्थी- नमस्ते सर!
प्रधानमंत्री- हां, नमस्ते!
विद्यार्थी- मैं श्रेया प्रधान हूं, सिक्किम से। सर सो एक सेल्फ कंपोज्ड सॉन्ग है। सो यह 3 लैंग्वेजेज़ में लिखा हुआ है।
प्रधानमंत्री- अरे वाह!
विद्यार्थी- हिंदी, नेपाली और बंगाली में। सो यह देशभक्ति का वैसा वाला सॉन्ग है।
प्रधानमंत्री- हां सुनाइए!
विद्यार्थी- इसका टाइटल मैंने रखा है, हमारा भारत भूमि।
प्रधानमंत्री- तो आपको कविता लिखने का शौक है?
विद्यार्थी- यस सर! सर कविता सर मैं नेचर के बारे में लिखती हूं ज्यादातर।
प्रधानमंत्री- अच्छा नेचर के विषय में!
विद्यार्थी- मानव जाति के लिए भी लिखा था, एक-दो बार। यस सर!
प्रधानमंत्री- चलिए सुनाइए!
विद्यार्थी- हमारा भारत भूमि है, ऋषियों का यह देश है। हमारा भारत भूमि है, ऋषियों का यह देश है। अनेकता में एकता, शांति का परिवेश है। अनेकता में एकता, शांति का परिवेश है। देवी-देवता को प्रियवासियों मानवता मौला एको थानियो।
प्रधानमंत्री- शाबाश! बहुत सुंदर! बहुत सुंदर! देश की एकता की बात बताई। एक भारत, श्रेष्ठ भारत। मानसी तुम्हें तो होगा बेटा कुछ गाना?
विद्यार्थी- यस सर!
प्रधानमंत्री- कौन सा गाओगी, बताओ?
विद्यार्थी- सर मैं एक गाना सुनाना चाहती हूं।
प्रधानमंत्री- हां, सुनाओ!
विद्यार्थी- सर यह गाना मेरी मदर ने लिखा है और यह गाना जो है, यह स्टूडेंट्स को डेडीकेटेड है।
प्रधानमंत्री- अच्छा, सुनाओ!
विद्यार्थी- बढ़ता चल, तू बढ़ता चल। करता चल, कुछ करता चल। सारी दुनिया तेरे पीछे, मुश्किलों से लड़ता चल।
प्रधानमंत्री- वाह!
विद्यार्थी- सारी दुनिया तेरे पीछे, मुश्किलों से लड़ता चल। बढ़ता चल, तू आगे बढ़ता चल।
प्रधानमंत्री- वाह! शानदार! आपकी माता जी को मेरी बधाई दे देना।
विद्यार्थी- सर थैंक यू सर!
प्रधानमंत्री- बहुत ही इंस्पायरिंग लिखा है मां ने!
विद्यार्थी- सर मेरा यूट्यूब चैनल और फेसबुक पेज और इंस्टाग्राम भी है।
प्रधानमंत्री- अच्छा!
विद्यार्थी- यस सर! मेरे फेसबुक पेज में फॉलोअर्स हैं डेढ़ लाख।
प्रधानमंत्री- डेढ़ लाख!
विद्यार्थी- बहुत ज्यादा मजा आया और मेरे लिए यह बहुत ज्यादा बड़ी और गर्व की बात है कि मैं उनसे मिली।
प्रधानमंत्री- आइए सब लोग, बैठ जाइए! अच्छा मैंने आज आपका स्वागत आपका किया, यह असमी वो गमोछा कहते हैं। यह सबसे बड़ी चीज है, यह मेरी सबसे प्रिय चीज है। उसकी रचना बहुत अच्छी लगती हैं। दूसरा है, यह असम का और खासकर के नॉर्थ ईस्ट की वूमेन एंपावरमेंट का सिंबल है। यह घर में बनाते हैं और सचमुच में वहां की मातृशक्ति, नारीशक्ति कैसे काम करती है, तो एक प्रकार से मन को बड़ा आदर होता है, सम्मान होता है। तो मेरा मन कर गया कहा इन बच्चों को मैं आज असम का गमोछा दूंगा।
विद्यार्थी- थैंक यू सर! थैंक यू सर!
विद्यार्थी- मेरा नाम सबावत वेंकटेश है।
प्रधानमंत्री- हां वेंकटेश गारू, बताइए!
विद्यार्थी- तो सर अभी मुझे है ना टेक्नोलॉजी और रोबोटिक्स में बहुत इंटरेस्ट है, तो आजकल कई बार आपने भी बोला था कि स्किल ज्यादा जरूरी है और बाहर भी लोग बोलते हैं, मार्क्स ज्यादा जरूरी है। स्किल जरूरी है, मार्क्स ज्यादा जरूरी है, ऐसा ही सोच-सोच के हमारे अंदर एक डर बैठ जाता है, तो आप बताइए कि स्किल ज्यादा जरूरी है या फिर मार्क्स ज्यादा जरूरी है?
प्रधानमंत्री- यह जो मन में रहता है ना कि इसका महत्व है कि उसका महत्व है, खाने का महत्व है कि सोने का महत्व है, पढ़ने का महत्व है कि खेलने का महत्व है, उसका एक कॉमन जवाब होता है, हर चीज में संतुलन होना चाहिए, बैलेंस होना चाहिए। एक तरफ झुकोगे, तो गिरोगे कि नहीं गिरोगे?
विद्यार्थी- यस सर!
प्रधानमंत्री- और सही बैलेंस करके रहोगे तो गिरोगे क्या कभी?
विद्यार्थी- नो सर!
प्रधानमंत्री- तो यह सिंपल सी बात है। अब दूसरी बात है, स्किल में भी दो प्रकार के स्किल है। एक है, लाइफ स्किल। दूसरा है, प्रोफेशनल स्किल। उसमें भी कोई मुझे पूछेगा कि साहब लाइफ स्किल में ध्यान देना चाहिए कि प्रोफेशनल में? मैं कहूंगा दोनों में देना चाहिए। अब मुझे बताइए, बिना अध्ययन किए, बिना ऑब्जरवेशन किए, बिना ज्ञान प्रयुक्त किए, कोई भी स्किल आ सकता है क्या?
विद्यार्थी- नो सर!
प्रधानमंत्री- तो स्किल की शुरुआत तो ज्ञान से ही होती है।
विद्यार्थी- यस सर!
प्रधानमंत्री- तो उसका महत्व कम नहीं है। मान लीजिए, हम बहुत बढ़िया पढ़ लिए हैं, लेकिन एक बार अचानक मां-बाप को बाहर जाना हुआ। अब हम भूखे मर रहे हैं, किचन में सब पड़ा है, लेकिन पता ही नहीं, कैसे करूं, क्या करूं, किस डब्बे में क्या है, कैसे निकालूं, क्यों? हमने कभी ध्यान ही नहीं दिया। जो इसलिए लाइफ स्किल जीवन की रोजमर्रा की जिंदगी है, इसमें हमारी लाइफ स्किल अच्छे से अच्छी कैसे हो। मेरा सुबह उठने का समय क्या है, सोने का समय क्या है, मैं व्यायाम करता हूं, तो मेरी उम्र के हिसाब से मैं व्यायाम करता हूं, मुझे नया व्यायाम में सिखता हूं कि नहीं सिखाता हूं, मैं किसी को मिलने जाता हूं, तो मुझे बातचीत करना कॉन्फिडेंस से आता है कि नहीं आता है, मुझे रेलवे स्टेशन पर गया और मुझे मालूम ही नहीं है कि भाई टिकट कहां से लेना, फिर मैं 10 लोगों को पूछता हूं कि भाई टिकट कहां से लेता हूं? तो लाइफ स्किल जो हैं, वह हमने आत्मसात करनी ही करनी चाहिए। अब दूसरा विषय प्रोफेशनल स्किल, आप मानो डॉक्टर बनने वाले हैं, तो डाक्टरी की स्किल आपकी एकदम से अपडेट होनी चाहिए। ऐसा नहीं कि भई मैं नंबर वन हो गया था यूनिवर्सिटी में और इसलिए मैं ऑपरेशन करूं या ना करूं चल जाएगा, ऐसा नहीं है। आपको अगर हार्ट स्पेशलिस्ट बना है, तो किताबें आपको हार्ट स्पेशलिस्ट बनने में मदद कर सकती हैं, हार्ट स्पेशलिस्ट नहीं बना सकती। हार्ट स्पेशलिस्ट तो आप तब बनेंगे, जब एक्चुअली आप पेशेंट के साथ, उसके हर स्टेजेस के साथ जुड़कर के अपना स्किल डेवलप करोगे। अगर आपको वकील बनना है, आपको कॉन्स्टिट्यूशन की सारी धाराएं पता हैं, इस धारा में इतनी सजा होती है, इस धारा से ऐसे बेल मिलता है, सब मालूम है। लेकिन अगर आपको अदालत में जाकर के एक वकील के रूप में तैयार होना है, तो किसी वकील का जूनियर बनना पड़ता है।
विद्यार्थी- यस सर!
प्रधानमंत्री- प्रोफेशनल स्किल सीखनी पड़ती है। उसमें से आपको आगे आना होता है और इसलिए लाइफ स्किल उसमें कोई कंप्रोमाइज नहीं है। 100% वह तो अचीव करना ही चाहिए। प्रोफेशनल स्किल जिस प्रोफेशन में इंटरेस्ट है, इसमें लगातार नया करते जाना। अब उसमें भी पहले हार्ट के पेशेंट को इतनी टेक्नोलॉजी नहीं थी, आज टेक्नोलॉजी आ गई, तो आपकी उम्र भले ही 40 साल हो गई होगी, लेकिन आपको टेक्नोलॉजी पढ़नी पड़ेगी। तो शिक्षा और स्किल एक-दूसरे के जुड़वा भाई-बहन हैं। वह दो अलग नहीं है, लेकिन स्किल जीवन में बहुत अनिवार्य है।
विद्यार्थी- मैं एक बहुत गरीब फैमिली से बिलॉन्ग करता हूं। फैमिली भी प्राउड फील कर रही है कि मेरा बेटा गया है। वह एक्साइटमेंट बढ़ गई थी, उनसे बात करने के लिए, तो हमें ऐसा चांस मिला कि हम बात कर सकते हैं उनसे।
विद्यार्थी- जय हिंद सर! सर मेरा नाम है इमोता के श्याम है। मैं सैनिक स्कूल, इंफाल मणिपुर से आई हूं। सर आप बचपन से मेरे एक बहुत बड़े इंस्पिरेशन रहे हैं और मेरा जन्मदिन भी आपके साथ ही आता है।
प्रधानमंत्री- अच्छा! मुझे अभी एक नेता ने फोन किया था। मेरे जन्मदिन पर 17 सितंबर को, तो उसने मुझे कहा कि आपका 75 हो गए बोले। अभी 25 बाकी हैं मैंने कहा। तो मैं जो बीता है, उसको गिनता नहीं हूं, जो बचा है उसको गिनता हूं और इसलिए जीवन में मैं आपको भी कहता हूं। बीता है, उसकी गिनती में समय बर्बाद मत कीजिए। जो बचा है, उसको जीने के लिए सोचिए। अच्छा बताइए!
विद्यार्थी- सर मेरा आपसे यह प्रश्न है कि सर हम बोर्ड्स एग्जाम या फिर कोई स्कूल के एग्जाम के प्रिपरेशन करते समय पिछले कुछ सालों के क्वेश्चंस देखते हैं और हम यह अपने आप तय कर लेते हैं कि कौन सा टॉपिक ज्यादा सही रहेगा, कौन सा जरूरी है और कुछ हम सोचते हैं कि मार्क्स काम है, एग्जामिनर का यहां पर फोकस नहीं होगा, तो हम छोड़ देते हैं। क्या ऐसा करना सही है?
प्रधानमंत्री- कभी-कभी आपने देखा होगा, अखबार में हैडलाइन आ जाती है कि इस बार पेपर बहुत भारी था।
विद्यार्थी- यस सर!
प्रधानमंत्री- बच्चों को बहुत तकलीफ हुई। यह क्यों क्या होता है? सिलेबस के बाहर का होता है क्या?
विद्यार्थी- नो सर!
प्रधानमंत्री- लेकिन आपको भारी क्यों लगता है क्योंकि आपने वह 10 साल के पैटर्न के जो तीन चार पांच साल एक-एक विषय के सवाल हैं, उसी पर ध्यान केंद्रित किया।
विद्यार्थी- यस सर!
प्रधानमंत्री- पहले आता था श्योर सजेशंस, फिर आने लगा इंर्पोटेंट क्वेश्चंस, फिर आने लगा 10 साल के पेपर आप कर लीजिए, वही पैटर्न चलेगा।
विद्यार्थी- यस सर!
प्रधानमंत्री- यह बीमारी जब मैं पढ़ता था, तब भी थी और यह बीमारी फैलाने का काम कुछ टीचर भी करते हैं। टीचर को क्या लगता है कि मेरे स्कूल का नंबर अच्छा हो, मेरे क्लास का नंबर अच्छा हो, इसलिए वह क्या करते हैं, जिससे नंबर मिले, वही पढ़ाते हैं।
विद्यार्थी- यस सर!
प्रधानमंत्री- अच्छे टीचर आपने देखा होगा सर्वांगीण विकास के लिए एक पूरा सिलेबस पढ़वाते हैं। पूरे सिलेबस पर मेहनत करवाते हैं। उस सिलेबस का आपकी जिंदगी में क्या उपयोग है, वह समझते हैं। अब आप देखिए, कोई खिलाड़ी है, अगर मान लीजिए, उसको बॉलिंग करनी है, तो क्या वह अपने कंधे के मसल्स ही मजबूत करता रहेगा, तो एक अच्छा बॉलर बनेगा क्या?
विद्यार्थी- नो सर!
प्रधानमंत्री- उसको और क्या-क्या करना पड़ेगा?
विद्यार्थी- एक्सरसाइज करनी पड़ेगी, योगा करना पड़ेगा।
प्रधानमंत्री- एक्सरसाइज करनी पड़ेगी, पूरे शरीर को मजबूत करना पड़ेगा। उसको मन को भी मजबूत करना पड़ेगा।
विद्यार्थी- यस सर!
प्रधानमंत्री- उसको अपने खाने के पद्धति को भी उसके अनुकूल बनाना पड़ेगा।
विद्यार्थी- यस सर!
प्रधानमंत्री- उसको नींद भी उस प्रकार से लेनी पड़ेगी। करता क्या है, बोल फैंकता है, लेकिन पूरे शरीर को वह तैयार करता है कि नहीं करता है?
विद्यार्थी- यस सर
प्रधानमंत्री- शरीर का एक अंग भी वीक रह गया, बॉलिंग अच्छी करता है, कंधा बहुत अच्छा है, स्पीड सब अच्छी है, लेकिन पैर ठीक नहीं काम कर रहा है, तो बॉलिंग कर पाएगा क्या?
विद्यार्थी- नो सर!
प्रधानमंत्री- जैसे एक प्लेयर को अपने गोल को पाने के लिए और खेल में मास्टरी पानी है, तो भी उसको संपूर्ण शरीर के चिंता करनी पड़ती है। वैसे ही हम जिंदगी परीक्षा के लिए नहीं है, हमारे जीवन को बनाने के लिए शिक्षा एक माध्यम है और हम शिक्षा सही करते हैं, गलत करते हैं, तो बार-बार हम अपने एग्जाम करते हैं। तो यह जो एग्जाम है, वह हमें अपने आप को एग्जामिन करने के लिए एग्जाम है। अल्टीमेट गोल एग्जाम के नंबर नहीं हो सकते हैं। अल्टीमेट गोल संपूर्ण जीवन के विकास का होना चाहिए और इसलिए यह जो पैटर्न हम 10 क्वेश्चन कर लें, यह कर लें, हमने अपने आप को सीमित नहीं करना चाहिए। इसका मतलब यह नहीं कि यह भी नहीं करना, यह भी करना चाहिए, लेकिन उसको अगर 10% देते हैं, तो 90% और करना चाहिए। तो मेरा तो सभी विद्यार्थियों से आग्रह है कि आप जिंदगी सबसे ज्यादा उत्तम बने, जीवन अपना श्रेष्ठ बने, अपना पूरा जीवन शानदार रहे, उसके लिए जीवन को तैयार करना है और शिक्षा एक माध्यम है, उस माध्यम के रूप में उसको करना चाहिए। ठीक है।
विद्यार्थी- यस सर!
विद्यार्थी- सर मैं आपसे यह क्वेश्चन पूछना चाहती हूं कि जिस सब्जेक्ट में मुझे ज्यादा मेहनत करने की जरूरत है, उसको फोकस ना करके प्रिबोर्ड में कैसे बेहतर परफॉर्म करने के लिए, उसका भी प्रेशर होता है। हम कैसे अपनी पढ़ाई में संतुलन बनाए?
प्रधानमंत्री- यह, यह सबके लिए चिंता का विषय है। पहले क्वार्टर में कुछ विषयों में अच्छा करते हैं। दूसरे क्वार्टर में कुछ विषयों में अच्छा करते हैं और फिर हमको लगता है कि अब क्या करूं मैं, यह करूं कि वह करूं? हमें भीतर के विद्यार्थी को हमेशा चैतन्य युक्त रखना चाहिए। शिक्षा यह मजबूरी नहीं होनी चाहिए। शिक्षा यह बोझ नहीं होना चाहिए। हमारा टोटल इंवॉल्वमेंट चाहिए, टोटल इंवॉल्वमेंट। अगर टोटल इंवॉल्वमेंट नहीं है, तो फिर आधी-अधूरी शिक्षा, वह जीवन को कहीं सफल नहीं बनाने देती। यह जो बीमारी आ गई है, मार्क्स मार्क्स मार्क्स। मुझे बता दीजिए, जो पिछले साल बोर्ड में एक से दस नंबर जो लाए हैं, आपको किसी को नाम याद है क्या! बहुत मुश्किल से याद होगा जी, इतना ही नहीं आप एक महीने के बाद पूछोगे कि भैई यह अखबार में इनकी फोटो छपी थी, इनके नाम आए थे, वाह-वाही हुई थी। फिर भी हम उतना उनको भी याद नहीं रखते। उस स्कूल के बच्चों को भी पता होगा कि उनके स्कूल में इतना नंबर आए थे?
विद्यार्थी- नहीं सर!
प्रधानमंत्री- इसका मतलब इन सब चीजों का कितना महत्व है भई।
विद्यार्थी- कुछ समय के लिए ही याद रहता है।
प्रधानमंत्री- कुछ समय के लिए होता है।
विद्यार्थी- यस सर! यस सर!
प्रधानमंत्री- उससे ज्यादा तो होता नहीं है और इसलिए हम अपने मन को नंबर, मार्क्स उससे जोड़ने के बजाय, मेरा जीवन कहां पहुंचा और उसके लिए लगातार अपने आप को कसते रहना
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