Latest News

सुनें, सवाल करें, समझें, लागू करें, खुद से प्रतिस्पर्धा करें : मोदी

परीक्षाएं ही सब कुछ नहीं हैं, ज्ञान और परीक्षाएं एक ही चीज नहीं हैः प्रधानमंत्री

  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने परीक्षा पे चर्चा 2025 के दौरान छात्रों से बातचीत की

  • संयुक्त राष्ट्र ने 2023 को ‘अंतरराष्ट्रीय बाजरा वर्ष’ घोषित किया और भारत के प्रस्ताव पर इसे दुनिया भर में बढ़ावा दिया : श्री मोदी

  • प्रधानमंत्री ने कहा कि मौसमी फल अवश्य खाने चाहिए, भोजन को ठीक से चबाना चाहिए, उचित भोजन उचित समय पर करना चाहिए

  • श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि बीमार न होने का अर्थ यह नहीं है कि हम स्वस्थ हैं, सेहत पर ध्यान दें

  • प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें अपने काम पर ध्यान केंद्रित करते हुए दबाव के लिए खुद को तैयार करना चाहिए

  • हमें बेहतर के लिए प्रयास करते रहना चाहिए, अपनी लड़ाई खुद लड़नी चाहिए, अपने भीतर शांति ढूंढ़नी चाहिए: प्रधानमंत्री

  • प्रधानमंत्री ने कहा कि एक उदाहरण बनें, सम्मान की मांग न करें, सम्मान प्राप्त करें, मांग के बजाय काम करके नेतृत्व करें

  • श्री मोदी ने कहा कि छात्र रोबोट नहीं हैं, पढ़ाई समग्र विकास के लिए है, उन्हें अपने जुनून को तलाशने की स्वतंत्रता होनी चाहिए

  • लिखने की आदत विकसित की जानी चाहिए : श्री मोदी

  • प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रत्येक छात्र की अनूठी प्रतिभा को खोज कर उसे बढ़ावा दें, सकारात्मकता की तलाश करें

  • हम सभी के पास 24 घंटे का समय है, यह हमारे समय को बुद्धिमानी से प्रबंधित करने के बारे में है : श्री मोदी

  • वर्तमान पर ध्यान दें, अपने प्रियजनों के साथ अपनी भावनाओं को साझा करेः प्रधानमंत्री

  • अपने बच्चों की तुलना दूसरों से न करें, उनके जुनून का समर्थन करने के लिए अपने बच्चों को समझें, अपने बच्चों की ताकत खोजें : प्रधानमंत्री

  • श्री मोदी ने कहा कि सुनना सीखें, उचित तरीके से सांस लेना महत्वपूर्ण है

  • हर बच्चा विशिष्ट है, उनके सपनों को जानें, उनकी यात्रा का मार्गदर्शन करें, उनका समर्थन करें : प्रधानमंत्री

  • श्री मोदी ने कहा कि छात्रों की तुलना करने से बचें, छात्रों की सबके सामने आलोचना न करें, उन्हें प्रोत्साहित करें और प्रेरित करने के लिए उनकी प्रशंसा करें

  • खुद को चुनौती दें, अपने अतीत को हराएं, वर्तमान में आगे बढ़ें : प्रधानमंत्री

  • श्री मोदी ने कहा कि अपनी असफलताओं को अवसरों में बदलें

  • तकनीक का इस्तेमाल डर से नहीं बल्कि बुद्धिमानी से करें, तकनीक का अधिकतम उपयोग किया जाना चाहिए: प्रधानमंत्री

  • हमें प्रकृति का दोहन नहीं करना चाहिए बल्कि अपने पर्यावरण की रक्षा करनी चाहिए और उसका पोषण करना चाहिए, इसके लिए हम अपना आभार प्रकट करते हैं, एक पेड़ मां के नाम ऐसी ही एक पहल है: श्री मोदी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली की सुंदर नर्सरी में परीक्षा पे चर्चा (पीपीसी) के 8वें आयोजन के दौरान छात्रों से बातचीत की। प्रधानमंत्री ने देशभर के छात्रों के साथ अनौपचारिक बातचीत में कई विषयों पर चर्चा की। उन्होंने तिल से बनी मिठाइयां वितरित कींजो सर्दियों के दौरान शरीर को गर्म रखने के लिए पारंपरिक रूप से परोसी जाती हैं।

पोषण से समृद्धि

श्री मोदी ने पोषण के विषय पर कहा  कि संयुक्त राष्ट्र ने 2023 को अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष’ घोषित किया है और भारत के एक प्रस्ताव पर इसे दुनिया भर में प्रचारित किया है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने दृढ़ता से आग्रह किया है कि पोषण के बारे में बहुत जागरूकता होनी चाहिएक्योंकि उचित पोषण कई बीमारियों को रोकने में मदद करता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में बाजरा को सुपरफूड के रूप में जाना जाता है। उन्होंने कहा कि भारत मेंफसलेंफल जैसी अधिकांश चीजें हमारी विरासत से जुड़ी हुई हैं और एक उदाहरण दिया कि हर नई फसल या मौसम भगवान को समर्पित होता है और पूरे भारत में अधिकांश स्थानों पर त्यौहार मनाए जाते हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि भगवान को चढ़ाए गए भोग को प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। श्री मोदी ने बच्चों से मौसमी फल खाने का आग्रह किया। उन्होंने बच्चों को जंक फूडतैलीय भोजन और मैदा से बने खाद्य पदार्थों से बचने के लिए प्रोत्साहित किया। प्रधानमंत्री ने भोजन को सही तरीके से करने के महत्व पर बात करते हुए बच्चों को इसे कम से कम 32 बार चबाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने बच्चों को पानी पीते समय पानी के छोटे-छोटे घूंट और उसका स्वाद लेने के बारे में भी बताया। श्री मोदी ने उचित समय पर उचित भोजन करने के विषय पर किसानों का उदाहरण देते हुए कहा कि वे खेतों में जाने से पहले सुबह भरपेट नाश्ता करते हैं और सूर्यास्त से पहले अपना भोजन पूरा कर लेते हैं। उन्होंने छात्रों को इसी तरह की स्वस्थ अच्छी आदतें अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।

पोषण और स्वास्थ्य

प्रधानमंत्री ने स्वास्थ्य पर चर्चा करते हुए इस बात पर जोर दिया कि बीमार नहीं होने का अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति स्वस्थ है। उन्होंने बच्चों से स्वास्थ्य पर ध्यान देने का आग्रह करते हुए कहा कि शरीर की फिटनेस और स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त मात्रा में नींद लेना महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि मानव स्वास्थ्य पर नींद के महत्व पर कई शोध परियोजनाएं चल रही हैं। श्री मोदी ने मानव शरीर के लिए सूर्य के प्रकाश के महत्व पर जोर देते हुए बच्चों को प्रतिदिन कुछ मिनट के लिए सुबह की धूप में रहने की आदत डालने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने बच्चों को सूर्योदय के तुरंत बाद पेड़ के नीचे खड़े होकर गहरी सांस लेने के लिए भी कहा। प्रधानमंत्री ने यह कहते हुए अपनी बात समाप्त की कि किसी व्यक्ति के जीवन में प्रगति करने के लिए पोषण का महत्व इस बात पर निर्भर करता है कि वह क्याकबकैसे और क्यों खाता है।

दबाव पर काबू पाना

श्री मोदी ने दबाव पर काबू पाने के विषय पर कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारे समाज ने इस विचार को गहराई से समाहित कर लिया है कि 10वीं या 12वीं जैसी स्कूली परीक्षाओं में अधिक अंक नहीं लाना जीवन बर्बाद करना है। उन्होंने कहा कि इससे बच्चों पर दबाव और बढ़ जाता है। क्रिकेट मैच में गेंद पर बल्लेबाज की एकाग्रता का हवाला देते हुए श्री मोदी ने बच्चों को बल्लेबाज की तरह बाहरी दबाव से बचने और केवल अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रोत्साहित कियाजिससे उन्हें दबाव से उबरने में मदद मिलेगी।

खुद को चुनौती दें

छात्रों से अच्छी तरह से तैयार रहने और हर समय खुद को चुनौती देते रहने के लिए कहते हुएप्रधानमंत्री ने कहा कि बहुत से लोग खुद के खिलाफ अपनी लड़ाई नहीं लड़ते हैं। उन्होंने आत्म-चिंतन के महत्व पर व्यक्तियों से बार-बार खुद से सवाल पूछने का आग्रह किया कि वे क्या बन सकते हैंक्या हासिल कर सकते हैं और कौन से कार्य उन्हें संतुष्टि प्रदान करेंगे। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि किसी का ध्यान दैनिक बाहरी प्रभावों जैसे अखबारों या टीवी से प्रभावित नहीं होना चाहिएबल्कि समय के साथ लगातार विकसित होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने बताया कि बहुत से लोग अक्सर अपने दिमाग को दिशाहीन भटकने देते हैं। उन्होंने उन्हें सलाह दी कि वे अपने निर्णयों में लापरवाही न बरतें और किसी ऐसी चीज पर शांति पाने के लिए ध्यान केंद्रित करें, जो उन्हें चुनौतियों से निपटने में मदद करेगी।

नेतृत्व की कला

श्री मोदी ने एक छात्र द्वारा प्रभावी नेतृत्व पर सुझाव साझा करने के लिए पूछे जाने पर कहा कि बाहरी दिखावट किसी नेता को परिभाषित नहीं करती हैबल्कि एक नेता वह होता है जो दूसरों के लिए एक उदाहरण स्थापित करके नेतृत्व करता है। इसे प्राप्त करने के लिएउन्होंने कहा कि व्यक्तियों को खुद को बदलना चाहिएऔर उनके व्यवहार में यह बदलाव दिखना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा, "नेतृत्व थोपा नहीं जाता हैबल्कि आपके आस-पास के लोगों द्वारा स्वीकार किया जाता है।" उन्होंने कहा कि दूसरों को उपदेश देने से स्वीकृति नहीं मिलतीबल्कि व्यक्ति का व्यवहार ही स्वीकार्य होता है। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति स्वच्छता पर भाषण देता है लेकिन उसका पालन नहीं करतातो वह नेता नहीं बन सकता। श्री मोदी ने जोर दिया कि नेतृत्व के लिए टीमवर्क और धैर्य आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कार्य सौंपते समयटीम के सदस्यों के सामने आने वाली चुनौतियों को समझना महत्वपूर्ण है और कठिनाइयों के दौरान उनकी मदद करने से नेतृत्व के प्रति आत्मविश्वास और भरोसा बढ़ेगा। प्रधानमंत्री ने एक बच्चे की बचपन की कहानी साझा करके इसे स्पष्ट कियाजिसमें वह मेले में माता-पिता का हाथ थामे हुए था। उस बच्चे ने माता-पिता का हाथ पकड़ना बेहतर समझा जो सुरक्षा और विश्वास को सुनिश्चित करता है। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार का विश्वास नेतृत्व में महत्वपूर्ण प्रेरक बल है।

किताबों से परे – 360डिग्री विकास

शौक और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाने के विषय परजबकि आम धारणा यह है कि शिक्षा ही सफलता का एकमात्र रास्ता हैप्रधानमंत्री ने कहा कि छात्र रोबोट नहीं हैं और उनका समग्र विकास काफी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल अगली कक्षा में आगे बढ़ने के लिए नहीं हैबल्कि व्यापक व्यक्तिगत विकास के लिए है। अतीत पर विचार करते हुएश्री मोदी इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे बागवानी जैसे विषय शुरुआती स्कूली शिक्षा के पाठ अप्रासंगिक लग सकते हैंलेकिन वे समग्र विकास में योगदान करते हैं। प्रधानमंत्री ने माता-पिता और शिक्षकों से आग्रह किया कि वे बच्चों को कठोर शैक्षणिक माहौल में सीमित न रखेंक्योंकि इससे उनका विकास रुक जाता है। उन्होंने कहा कि बच्चों को एक खुले माहौल और ऐसी गतिविधियों की ज़रूरत होती हैजिनका वे आनंद लेजो बदले में उनकी पढ़ाई को बढ़ाती हैं। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि परीक्षाएं जीवन में सब कुछ नहीं हैं। उन्होंने छात्रों से कहा कि इस मानसिकता को अपनाने से परिवारों और शिक्षकों को समझाने में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि वे किताबें नहीं पढ़ने का समर्थन नहीं कर रहे हैंबल्किउन्होंने जितना संभव हो उतना ज्ञान प्राप्त करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि परीक्षाएं सब कुछ नहीं हैं और ज्ञान तथा परीक्षाएं दो अलग-अलग चीज़ें हैं।

सकारात्मकता की तलाश

प्रधानमंत्री ने कहा कि लोग अक्सर उन्हें दी गई सलाह पर सवाल उठाते हैंसोचते हैं कि ऐसा क्यों कहा गया और क्या यह उनकी कमियों को दर्शाता है। यह मानसिकता दूसरों की मदद करने की व्यक्ति की क्षमता में बाधा डालती है। इसके बजायउन्होंने दूसरों में अच्छे गुणों को पहचानने की सलाह दीजैसे कि अच्छा गाना या साफ-सुथरे कपड़े पहनना और इन सकारात्मक गुणों पर चर्चा करना। यह दृष्टिकोण वास्तविक रुचि दिखाता है और तालमेल बनाता है। उन्होंने दूसरों को साथ में अध्ययन करने के लिए आमंत्रित करके सहायता प्रदान करने का सुझाव दिया। प्रधानमंत्री ने लिखने की आदत विकसित करने के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि जो लोग लिखने की आदत विकसित करते हैंवे अपने विचारों को प्रभावी ढंग से व्यक्त कर सकते हैं।

अपनी विशिष्टता खोजें

अहमदाबाद में एक घटना का जिक्र करते हुएजहां एक बच्चे को पढ़ाई पर ध्यान नहीं देने के के कारण स्कूल से निकाला जाने वाला थाप्रधानमंत्री ने कहा कि हालांकिबच्चे ने टिंकरिंग लैब में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और रोबोटिक्स प्रतियोगिता जीतीजिससे उसकी अनूठी प्रतिभा का पता चला। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि बच्चों की अनूठी प्रतिभाओं और शक्तियों को पहचानना और उन्हें अधिक विकसित करने में शिक्षक की भूमिका है। श्री मोदी ने आत्म-चिंतन और संबंधों को समझने के लिए एक प्रयोग का प्रस्ताव रखा। उन्होंने बचपन के 25-30 दोस्तों को याद करने और उनके माता-पिता के नाम सहित उनके पूरे नाम लिखने का सुझाव दिया। यह अभ्यास अक्सर यह बताता है कि हम उन लोगों के बारे में कितना कम जानते हैं जिन्हें हम करीबी दोस्त मानते हैं। प्रधानमंत्री ने लोगों में सकारात्मक गुणों की पहचान करने और दूसरों में सकारात्मकता खोजने की आदत विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि यह अभ्यास व्यक्तिगत विकास के लिए फायदेमंद होगा।

अपने समय पर नियंत्रण रखेंअपने जीवन पर नियंत्रण रखें

श्री मोदी ने एक छात्र द्वारा समय प्रबंधन के बारे में पूछे जाने पर कहा कि हर किसी के पास दिन में 24 घंटे होते हैंफिर भी कुछ लोग बहुत कुछ हासिल कर लेते हैं जबकि अन्य को लगता है कि कुछ हासिल नहीं हुआ। उन्होंने समय प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बहुत से लोगों को यह समझ नहीं है कि अपने समय का प्रभावी ढंग से उपयोग कैसे किया जाए। प्रधानमंत्री ने समय का ध्यान रखनेविशिष्ट कार्य निर्धारित करने और प्रतिदिन प्रगति की समीक्षा करने की सलाह दी। उन्होंने चुनौतीपूर्ण विषयों से बचने के बजाय उन पर ध्यान केंद्रित करने के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने एक उदाहरण दिया कि कैसे सबसे पहले उस विषय को उठाया जाए जो आपको कठिन लगता है और उसका डटकर सामना किया जाए। इन चुनौतियों को दृढ़ संकल्प के साथ लेने से व्यक्ति बाधाओं को दूर कर सकता है और सफलता प्राप्त कर सकता है। परीक्षा के समय विभिन्न विचारोंसंभावनाओं और प्रश्नों के कारण होने वाले विकर्षणों के मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने कहा कि छात्र अक्सर खुद को सही तरह से नहीं जानते हैं और दोस्तों के साथ बातचीत में लगे रहते हैंपढ़ाई न करने के बहाने बनाते हैं। उन्होंने कहा कि इन आम बहानों में बहुत थक जाना या मूड न होना शामिल है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि फोन सहित इसी तरह की अन्य वस्तुएं ध्यान केंद्रित करने और शैक्षणिक प्रदर्शन में बाधा डालते हैं।

वर्तमान में जिएं

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सबसे मूल्यवान चीज वर्तमान क्षण है। एक बार जब यह बीत जाता हैतो यह चला जाता हैलेकिन अगर इसे पूरी तरह से जिया जाएतो यह जीवन का हिस्सा बन जाता है। उन्होंने सचेत रहने और प्रत्येक पल की सराहना करने के महत्व पर प्रकाश डालाजैसे हल्की हवा को महसूस करना।

साझा करने की शक्ति

अपनी पढ़ाई का प्रबंधन करते हुए चिंता और अवसाद से निपटने के विषय परश्री मोदी ने कहा कि अवसाद की समस्या अक्सर परिवार से अलग होने और धीरे-धीरे सामाजिक संपर्कों से दूर होने से शुरू होती है। उन्होंने आंतरिक दुविधाओं को बढ़ने से रोकने के लिए उन्हें खुलकर व्यक्त करने के महत्व पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने पारंपरिक पारिवारिक संरचना पर प्रकाश डालाजहाँ परिवार के सदस्यों के साथ खुला संचार दबाव मुक्त करने वाले वाल्व के रूप में कार्य करता हैइस प्रकार का दबाव भावनात्मक निर्माण को रोकता है। उन्होंने बताया कि कैसे उनके शिक्षकों ने उनकी लिखावट को सुधारने के लिए कड़ी मेहनत कीजिसने उन्हें गहराई से छुआ और शिक्षकों की वास्तविक देखभाल के प्रभाव पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह देखभाल और ध्यान एक छात्र की भलाई और शैक्षणिक प्रदर्शन को बहुत प्रभावित कर सकता है।

अपनी रुचियों का पालन करें

श्री मोदी ने बच्चों पर कुछ खास करियर चुनने के लिए माता-पिता के दबाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि माता-पिता की अपेक्षाएँ अक्सर अपने बच्चों की दूसरों से तुलना करने से उत्पन्न होती हैंजो उनके अहम और सामाजिक स्थिति को ठेस पहुंचा सकती हैं। उन्होंने माता-पिता को सलाह दी कि वे अपने बच्चों को हर जगह मॉडल के रूप में न दिखाएँबल्कि उनकी खूबियों को प्यार करें और स्वीकार करें। उन्होंने स्कूल से निकाले जाने के कगार पर खड़े एक बच्चे का पूर्व उदाहरण दियाजिसने रोबोटिक्स में बेहतरीन प्रदर्शन कियाजिससे यह पता चलता है कि हर बच्चे में अनोखी प्रतिभा होती है। उन्होंने क्रिकेट के दिग्गज सचिन तेंदुलकर का भी उदाहरण दिया। प्रधानमंत्री ने माता-पिता को अपने बच्चों की खूबियों को पहचानने और उन्हें विकसित करने के लिए प्रोत्साहित कियाभले ही वे अकादमिक रूप से इच्छुक न हों। उन्होंने कौशल विकास के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि अगर वे प्रधानमंत्री नहीं होते तो वे कौशल विकास विभाग चुनते। श्री मोदी ने कहा कि अपने बच्चों की क्षमताओं पर ध्यान केंद्रित करकेमाता-पिता दबाव को कम कर सकते हैं और उन्हें आगे बढ़ने में मदद कर सकते हैं।

रुकेंचिंतन करेंफिर से निर्धारित करें

प्रधानमंत्री ने बताया कि कैसे अलग-अलग ध्वनियों की पहचान करने पर ध्यान केंद्रित करने से एकाग्रता हासिल करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने साझा किया कि प्राणायाम जैसी श्वास क्रियाओं का अभ्यास करने से एक अलग तरह की ऊर्जा उत्पन्न हो सकती हैजो चिंता को प्रबंधित करने में मदद करती है। प्रधानमंत्री ने दोनों नथुनों से सांस लेने को संतुलित करने की एक तकनीक प्रदान कीजो कुछ क्षणों में शरीर को नियंत्रण में ला सकती है। उन्होंने उल्लेख किया कि किस प्रकार ध्यान और श्वास नियंत्रण के बारे में सीखना तनाव को कम कर सकता है और ध्यान केंद्रित करने में मदद कर सकता है।

अपनी क्षमता को पहचाननालक्ष्य प्राप्त करना

सकारात्मक बने रहने और छोटी-छोटी जीत में खुशी खोजने की चिंता पर श्री मोदी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कभी-कभी लोग अपने विचारों या दूसरों के प्रभाव के कारण नकारात्मक हो जाते हैं। प्रधानमंत्री ने एक छात्र से बातचीत कीजिसने 10वीं कक्षा में 95 प्रतिशत अंक प्राप्त करने का लक्ष्य रखा थालेकिन 93 प्रतिशत अंक प्राप्त किएजिससे वह निराश हो गया था। लेकिन श्री मोदी ने इसे एक सफलता माना और उच्च लक्ष्य निर्धारित करने के लिए छात्र को बधाई दी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लक्ष्य महत्वाकांक्षी होने के साथ-साथ यथार्थवादी भी होने चाहिए। श्री मोदी ने उपलब्धियों को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखनेअपनी ताकत को समझने और लक्ष्य के करीब पहुंचने के लिए किए गए प्रयासों की सराहना करने के लिए प्रोत्साहित किया।

हर बच्चा विशिष्ट है

परीक्षाओं के दौरान अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने पर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह प्राथमिक मुद्दा छात्रों के साथ कम और उनके परिवारों के साथ अधिक है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि कई माता-पिता अपने बच्चों पर इंजीनियरिंग या चिकित्सा जैसे विशिष्ट करियर को अपनाने के लिए दबाव डालते हैंजबकि बच्चे की रुचि कला जैसे क्षेत्रों में होती है। यह निरंतर दबाव बच्चे के जीवन को तनावपूर्ण बना देता है। उन्होंने माता-पिता से अपने बच्चों की क्षमताओं और रुचियों को समझने और पहचाननेउनकी प्रगति की निगरानी करने और सहायता प्रदान करने का आग्रह किया। उदाहरण के लिएयदि कोई बच्चा खेलों में रुचि दिखाता हैतो माता-पिता को उन्हें खेल कार्यक्रम देखने के लिए ले जाकर प्रोत्साहित और प्रेरित करना चाहिए। प्रधानमंत्री ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए ऐसा माहौल बनाने से बचने का आग्रह कियाजहां केवल शीर्ष प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर ध्यान दिया जाता है जबकि अन्य को नजरअंदाज कर दिया जाता है। उन्होंने छात्रों की तुलना न करने और प्रत्येक बच्चे की अनूठी क्षमताओं को प्रोत्साहित करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने छात्रों को सुधार के लिए प्रयास करने और अच्छा प्रदर्शन करने की याद दिलाईलेकिन यह भी स्वीकार किया कि जीवन में पढ़ाई ही सब कुछ नहीं है।

आत्म-प्रेरणा

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आत्म-प्रेरणा के विषय पर सलाह दी कि कभी भी खुद को अलग-थलग न रखें और विचारों को साझा करने तथा परिवार या वरिष्ठों से प्रेरणा लेने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने आत्मविश्वास बढ़ाने और उपलब्धि की भावना का आनंद लेने के लिए 10 किलोमीटर साइकिल चलाने जैसे छोटे-छोटे लक्ष्यों के साथ खुद को चुनौती देने का सुझाव दिया। श्री मोदी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि खुद के साथ ये छोटे-छोटे प्रयोग व्यक्तिगत सीमाओं को दूर करने और अतीत को भुलाकर वर्तमान में जीने में मदद करते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें लोगों से प्रेरणा मिलती है, खासकर 140 करोड़ भारतीयों से। उन्होंने साझा किया कि जब उन्होंने "परीक्षा पे चर्चा" लिखीतो अजय जैसे लोग अपने गांवों में इसे अपनी कविता में बदल रहे हैं। इससे उन्हें लगता है कि उन्हें इस तरह के काम जारी रखने चाहिएक्योंकि हमारे आस-पास प्रेरणा के कई स्रोत हैं। चीजों को आत्मसात करने के बारे में पूछे जाने पर श्री मोदी ने सलाह दी कि केवल सुबह जल्दी उठने जैसी सलाह पर विचार करनाक्रियान्वयन के बिना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने सीखे गए सिद्धांतों को व्यावहारिक रूप से लागू करने और व्यक्तिगत प्रयोग के माध्यम से खुद को निखारने के महत्व पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने बताया कि खुद को प्रयोगशाला बनाकर और इन सिद्धांतों का परीक्षण करकेकोई व्यक्ति वास्तव में उन्हें आत्मसात कर सकता है और उनसे लाभ उठा सकता है। श्री मोदी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि अधिकांश लोग खुद से नहीं बल्कि दूसरों से प्रतिस्पर्धा करते हैंअक्सर खुद की तुलना उन लोगों से करते हैं जो शायद कम सक्षम होंजिससे निराशा होती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि खुद से प्रतिस्पर्धा करने से अटूट आत्मविश्वास पैदा होता हैजबकि खुद की तुलना दूसरों से करने से निराशा होती है।

असफलता ईंधन के रूप में

श्री मोदी ने, असफलता से कैसे उबरेंविषय पर कहा कि भले ही 30-40 प्रतिशत छात्र अपनी 10वीं या 12वीं कक्षा में असफल हो जाएंलेकिन जीवन समाप्त नहीं होता। उन्होंने यह तय करने के महत्व पर जोर दिया कि जीवन में सफल होना है या केवल पढ़ाई में। उन्होंने असफलताओं को अपना शिक्षक बनाने की सलाह देते हुएक्रिकेट का उदाहरण दिया, जहां खिलाड़ी अपनी गलतियों की समीक्षा करते हैं और सुधार के लिए प्रयास करते हैं। प्रधानमंत्री ने जीवन को केवल परीक्षाओं के नजरिए से नहींबल्कि समग्र रूप से देखने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि दिव्यांग व्यक्तियों में अक्सर असाधारण ताकत होती है और हर किसी की अपनी अलग क्षमताएं होती हैं। उन्होंने केवल शैक्षणिक उपलब्धियों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय इन शक्तियों पर काम करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि लंबे समय में सफलता की कहानी किसी व्यक्ति के जीवन और योग्यता से ही तय होती हैन कि केवल अकादमिक अंकों से।

टेक्नोलॉजी में महारत

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि हम सभी भाग्यशाली हैंऔर खासकर ऐसे युग में जब तकनीक व्यापक और प्रभावशाली हैतो ऐसे समय में तकनीक से दूर भागने की कोई जरूरत नहीं है। इसके बजायव्यक्तियों को यह निर्धारित करना चाहिए कि क्या वे अपना समय गैर-उत्पादक गतिविधियों पर खर्च करते हैं या अपनी रुचियों में गहराई से उतरते हैं। ऐसा करने सेतकनीक विनाशकारी शक्ति के बजाय एक ताकत बन जाएगी। श्री मोदी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि समाज की बेहतरी के लिए शोधकर्ता और नवाचारी तकनीक विकसित करते हैं। उन्होंने लोगों से तकनीक को समझने और उसका बेहतर उपयोग करने का आग्रह किया।

किसी भी कार्य में अपना सर्वश्रेष्ठ देने के बारे में पूछे जाने परश्री मोदी ने निरंतर सुधार के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अपना सर्वश्रेष्ठ करने की पहली शर्त कल से बेहतर होने का प्रयास करना है।