हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय में नेशनल मिशन फोर मेंटरिंग पर केंद्रित ओपन हाउस चर्चा का हुआ आयोजन

:- एनसीटीई के सहयोग से हुआ आयोजन :- ह.के.वि, महेंद्रगढ़ ने राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के सहयोग से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 नेशनल मिशन फोर मेंटरिंग (एनएमएम) के महत्त्व पर एक ओपन हाउस चर्चा का आयोजन किया

 

हरियाणा: हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (ह.के.वि), महेंद्रगढ़ ने राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के सहयोग से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 नेशनल मिशन फोर मेंटरिंग (एनएमएम) के महत्त्व पर एक ओपन हाउस चर्चा का आयोजन किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार मुख्य अतिथि तथा जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी, महेंद्रगढ़ विजेंद्र श्योराण विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थिति रहे। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने अपने संबोधन में उच्च शिक्षा के साथ-साथ उत्तम शिक्षा उपलब्ध करवाने पर जोर दिया। ब्लेंडेड माध्यम से आयोजित इस चर्चा का उद्घाटन दीप प्रज्जवलन के साथ हुई।

विश्वविद्यालय कुलपति ने कहा कि, “नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन से शिक्षा के प्रत्येक क्षेत्र में परिवर्तन आएगा। साथ ही डिमांड और चुनौतियां भी बढ़ेगी। ऐसी स्थिति से निपटने में नेशनल मिशन फॉर मेनंटरिंग महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।“ उन्होंने शिक्षकों का आह्वान किया वे विद्यार्थी के गुण व स्थिति की पहचान कर उसे उसी दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि मेंटरिंग का मतलब है कि हम अपने विचारों, अनुभवों को सांझा करें। उन्होंने शिक्षा, प्रशासन और प्रबंधन  में परामर्शदाता के महत्त्व से प्रतिभागियों को अवगत कराया। कुलपति ने उच्च शिक्षा के साथ-साथ उत्तम शिक्षा उपलब्ध करवाने पर भी जोर दिया। उन्होंने मूल्य आधारित शिक्षा पर जोर देते हुए विद्यार्थियों की डिग्री और क्षमता के बीच की खाई को पाटने की आवश्यकता बताई।

राष्ट्रीय शैक्षणिक योजना एवं प्रशासन संस्थान (एनआईईपीए) के प्रो. पी.के. मिश्रा ने परामर्शग्राही को अच्छे परामर्शदाता चुनने के विभिन्न मानदंडो पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यदि हम सही परामर्श चाहते है तो यह आवश्यक है कि परामर्शग्राही को अपनी समस्या व दुविधा को मेंटर से समक्ष स्पष्ट रूप से रखें तथा उनकी सलाह को ध्यान से व विश्वासपूर्वक सुने। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण व अर्जुन का उदाहरण देते हुए परामर्शदाता और परामर्शग्राही की भूमिका से प्रतिभागियों को अवगत कराया। प्रो. मिश्रा ने कहा कि परामर्शदाता कोई जादू या चमत्कार नहीं करेगा, वह केवल सही सलाह व सुझाव दे सकता है, कर्म परामर्शग्राही को ही करना होगा।

इसी क्रम में कार्यक्रम के अन्य विशिष्ट पैनलिस्ट एनसीटीई के पूर्व उपाध्यक्ष व डीईपी-एसएसए, स्कूल ऑफ एजुकेशन, इग्नू, नई दिल्ली के प्रो. एस.वी.एस. चौधरी, गुरू जम्भेश्वर विज्ञान एवं तकनीकी विश्वविद्यालय, हिसार की प्रो. वंदना पुनिया, हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व शैक्षणिक अधिष्ठाता, प्रो. संजीव कुमार, एमिटी विश्वविद्यालय, नोएडा, की डॉ. प्रियंका सिंह निरंजन, एनसीईआरटी, नई दिल्ली के सेवानिवृत्त प्रो. एस.के. यादव ने भी ने शिक्षा में परामर्श के महत्व और प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।

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