इस संदर्भ में, स्टूडेंट्स फॉर अकादमिक जस्टिस ने एक संगठित और साक्ष्य-आधारित पहल करते हुए एनटीए के निदेशक एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को एक विस्तृत ज्ञापन प्रस्तुत किया। इस ज्ञापन में प्रश्नपत्र के विश्लेषण, मानक इतिहास ग्रंथों के संदर्भ, तथा विशेषज्ञों की राय के आधार पर यह स्पष्ट किया गया कि उत्तर-कुंजी में गंभीर त्रुटियाँ मौजूद हैं। तथापि, प्रारंभिक स्तर पर इन संस्थाओं द्वारा इस शिकायत को अपेक्षित गंभीरता के साथ नहीं लिया गया। इसके उपरांत, स्टूडेंट्स फार एकेडमिक जस्टिस के नेतृत्व में विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्रों ने एक देशव्यापी आंदोलन का आयोजन किया गया। इन आंदोलनों एवं निरंतर छात्रों के विरोध के कारण तथा हाईकोर्ट के हस्तक्षेप से एनटीए ने अपनी गलती स्वीकार करके नवीन संशोधित उत्तर कुंजी जारी कर दी है। स्टूडेंट्स फॉर अकादमिक जस्टिस ने इस पूरे प्रकरण को एक मील का पत्थर बताते हुए कहा कि यह संघर्ष भविष्य में परीक्षा प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और त्रुटिरहित बनाने की दिशा में प्रेरक सिद्ध होगा। दिल्ली विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डा सुरेन्द्र कुमार ने कहा कि यूजीसी नेट की परीक्षा शोध के लिए इच्छुक छात्रों के लिए अत्यंत उपयोगी होती है। गाँव- देहात के मेहनती छात्रों की पढ़ाई छात्रवृत्ति से ही संभव हो पाती हैं। नेटीए की जिम्मेदारी है कि इन परीक्षाओं को गंभीरतापूर्वक एवं सुचितापूर्ण माध्यम से आयोजित कराएं। जिससे मेहनती छात्रों को स्थान मिले, यह राष्ट्र के अधिकतम विकास के लिए आवश्यक है।
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