नई दिल्ली। नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (NDTF) ने दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज के ऑडिटोरियम में बड़े उत्साह और सांस्कृतिक उमंग के साथ भारतीय नव वर्ष प्रतिपदा 2026 का आयोजन किया गया ।
दिल्ली विश्वविद्यालय के सैकड़ों शिक्षकों ने आने वाले वर्ष के लिए एक-दूसरे को बधाई दी। एनडीटीएफ के अध्यक्ष प्रो. ए.के. भागी ने शिक्षकों से एकजुट होने और शिक्षा तथा शिक्षकों की सेवा शर्तों में सुधार के लिए काम करने का आह्वान किया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस वर्ष केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 8 वें वेतन आयोग और यूजीसी की वेतन समीक्षा समिति के रूप में कुछ चुनौतियाँ आने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि वे जल्द ही यूजीसी चेयरमैन से मिलकर आंठवे वेतन आयोग हेतु कमेटी गठित करने का दबाव बनाने के लिए कहेंगे । प्रोफेसर भागी ने बताया कि जिस तरह से स्थायी 5000 शिक्षकों की नियुक्ति की गई उसी तरह से दिल्ली सरकार के कॉलेजों में नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू होगी । आज इन कॉलेजों में हर महीने सैलरी आ रही है , यह सब एनडीटीएफ का प्रयास है ।
विशिष्ट अतिथि डॉ.मोनिका अरोड़ा ने अपने संबोधन में कहा कि सृष्टि की रचना ब्रह्मा जी के द्वारा आज ही के दिन हुई थी , यह सारी सृष्टि ज्ञान विज्ञान और विभिन्न तत्वों के समन्वय से बनी है , आज से ही आरंभ होने वाले नवरात्र भी जीवन के विभिन्न पक्षों से जुड़कर निरंतर उन्नयन का संदेश देते हैं ।
प्रतिपदा कार्यक्रम में मुख्य वक्ता श्री रवि कुमार जी, सदस्य, अखिल भारतीय संपर्क टोली, आरएसएस ने " विश्व में भारत और हिंदुत्व का बढ़ता प्रभाव " विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के दौरान हुई चर्चाओं का मुख्य केंद्र भारत का बढ़ता वैश्विक प्रभाव और उसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की निरंतर प्रासंगिकता थी। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि हिंदुत्व, एक सभ्यतागत विचार के रूप में, हिंदू सांस्कृतिक परंपराओं के साथ-साथ, पूरे विश्व में अधिकाधिक पहचान और प्रासंगिकता प्राप्त कर रहा है। श्री रवि कुमार जी ने भारत के सांस्कृतिक मूल्यों और सभ्यतागत लोकाचार को संरक्षित करने तथा बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।
नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट के महासचिव, वी. एस. नेगी ने भी सभा को संबोधित किया और हिंदू नव वर्ष प्रतिपदा के शुभ अवसर पर दिल्ली विश्वविद्यालय परिवार को शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि यह वर्तमान क्षण एक आधुनिक हिंदू युग की शुरुआत को दर्शाता है, क्योंकि भारत का सभ्यतागत प्रभाव पूरे विश्व में लगातार बढ़ रहा है। दुनिया भर में लोग तेजी से वैदिक भारतीय जीवन शैली के तत्वों और इसके समग्र मूल्यों को स्वीकार कर रहे हैं और अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह बढ़ती हुई पहचान भारत की सांस्कृतिक और दार्शनिक विरासत के पुनरुत्थान में एक नए अध्याय की शुरुआत है, जिसमें हिंदू नव वर्ष नवीनीकरण, निरंतरता और वैश्विक प्रेरणा का प्रतीक है।
इस कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री गुणवंत कोठारी जी ने की, जो हिंदू स्पिरिचुअल एंड सर्विस फाउंडेशन के राष्ट्रीय संयोजक और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य हैं। उन्होंने अपने संबोधन में भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण और वैश्विक मंच पर उसकी बढ़ती भूमिका के बारे में बात की।
विकसित भारत का संकल्प पुस्तक का हुआ लोकार्पण -- वर्ष प्रतिपदा के इस शुभ अवसर पर किरोड़ीमल कॉलेज ( दिल्ली विश्वविद्यालय ) के हिंदी विभाग में कार्यरत प्रोफेसर वेदप्रकाश की पुस्तक " विकसित भारत का संकल्प " का लोकार्पण श्री रवि कुमार , डॉ.मोनिका अरोड़ा, गुणवंत कोठरी , प्रोफेसर अजय कुमार भागी , प्रोफेसर वीएस नेगी के करकमलों द्वारा हुआ। पुस्तक में नवजागरण की ओर भारत , ग्रामोदय से भारतोदय की राह , जन आंदोलन बने स्वदेशी , भारत भाव का बने संकल्प एवं पर्यावरण संरक्षण आदि विषयों से संबंधित विभिन्न लेखों का संकलन है । प्रो.भागी ने लेखक प्रो.वेदप्रकाश को इस पुस्तक के लिए बधाई और शुभकामनाएं दी।
इस कार्यक्रम में शिक्षकों, शिक्षाविदों और छात्रों ने बड़े उत्साह के साथ भाग लिया, जो सांस्कृतिक जागरूकता और राष्ट्रीय मूल्यों के प्रति उनकी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। प्रतिभागियों के लिए व्रत (उपवास) के भोजन की विशेष व्यवस्था भी की गई थी । यह उत्सव विक्रम संवत 2083 के शुभ आरंभ का प्रतीक है, जो नई ऊर्जा, आशा और भारत की जीवंत सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति पुनः पुष्टि का संकेत देता है।
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