राकेश नाथ
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के महाराजा अग्रसेन कॉलेज के राष्ट्रीय सेवा योजना यूनिट द्वारा दधीचि देह दान समिति के सहयोग से अंगदान–देहदान जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
सरदार वल्लभभाई पटेल ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों और समाज में अंगदान और देहदान के प्रति भ्रांतियों को दूर करना तथा युवाओं को इसके लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम का आरंभ दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एडवोकेट व विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने अंगदान और देहदान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह मानवता की सबसे बड़ी सेवा है। उन्होंने ऋषि दधीचि के सांस्कृतिक महत्व का उल्लेख करते हुए बताया कि भारतीय संस्कृति में 'दान' का विशेष महत्व है और मृत्यु के बाद भी किसी के काम आना ही मानवता की सच्ची सेवा है और इसी परंपरा को आगे बढ़ाने का माध्यम अंगदान और देहदान है। उन्होंने इस दिशा में दधीचि देह दान समिति द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
महाराजा अग्रसेन कॉलेज के प्राचार्य प्रो. संजीव कुमार तिवारी ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों का कर्तव्य केवल शिक्षा प्रदान करना ही नहीं, बल्कि समाज के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक तैयार करना भी है। अंगदान–देहदान जैसे प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने आगे बताया कि ऐसे मानवीय अभियानों में युवाओं की भागीदारी समाज में बदलाव लाने के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को इसमें सकारात्मक सहयोग के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि शहीद राजगुरु कॉलेज की प्राचार्य प्रो. पायल मागो ने विद्यार्थियों को करुणा, जिम्मेदारी और सामाजिक दायित्व को अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि आज हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम समाज की सेवा मानवतावादी मूल्यों के साथ करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि युवा पीढ़ी इस दिशा में दृढ़ संकल्प ले, तो अंगदान-देहदान के अभाव को दूर करने का यह उद्देश्य निश्चित रूप से पूरा किया जा सकता है। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों के अंगदान–देहदान से संबंधित जिज्ञासाओं का भी समाधान किया गया। कार्यक्रम में मंच संचालन डॉ इंद्राणी दास गुप्ता ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रो. ऋतु कोहली ने किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षकों, शिक्षकेत्तर कर्मचारियों और विद्यार्थियों की उपस्थिति रही।
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