- -धारा 370 के हटने से भारत से सीधे तौर पर जुड़ा है क्षेत्र
- -हकेवि में हुआ दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का समापन
महेंद्रगढ़ : हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेवि), महेंद्रगढ़ में जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख में धारा 370 के पहले व उसके खत्म होने के बाद आए विभिन्न सामाजिक, राजनैतिक व आर्थिक बदलावों पर केंद्रित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का बुधवार को समापन हो गया। विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित इस राष्ट्रीय सेमिनार के समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में ऑर्गनाईजर पत्रिका के संपादक श्री प्रफुल्ल केतकर उपस्थित रहे। समापन सत्र की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने की। अपने संबोधन में मुख्य अतिथि श्री प्रफुल्ल केतकर ने कहा कि जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख के क्षेत्र को दशकों तक एक समस्या के रूप में राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया गया जबकि जमीनी हकीकत देखें तो यह क्षेत्र इस झूठे व भ्रामक दृष्टिकोण के परिणामस्वरूप पीड़ित बना रहा।
समापन सत्र की शुरूआत में विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. रमेश कुमार ने अतिथियों का स्वागत किया और प्रतिभागियों से उनका परिचय कराया। श्री प्रफुल्ल केेतकर ने अपने संबोधन में विस्तार से जम्मू -कश्मीर और लद्दाख क्षेत्र को लेकर आजादी के पहले व बाद विभिन्न राजनैतिक पक्षों को स्पष्ट करते हुए बताया कि किस तरह से इस क्षेत्र को एक समस्या के रूप में स्थापित किया गया और धारा 370 के खत्म होने के बाद से वहां किस तरह के बदलाव देखने को मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र शायद ही भारत का ऐसा क्षेत्र था जहां संविधान से इतर नियम कायदे लागू किए गए। दशकों तक इस क्षेत्र में आमजन को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित रखा गया और कुछ खास लोगों ने अपनी सहूलित के हिसाब से शासन प्रशासन को चलाया। विधानसभाओं का परिसीमन हो या फिर यहां महिलाओं को मिलने वाले अधिकारों की बात हो सभी को कुछ विशेष उद्देश्यों के चलते प्रभावित किया गया और उसी का परिणाम रहा कि यह क्षेत्र शेष भारत के अन्य राज्यों के अनुरूप विकास का भागीदार नहीं बन पाया। श्री प्रफुल्ल केतकर ने धारा 370 के खत्म होने के बाद से इस क्षेत्र में हो रहे विकास और राजनैतिक, सामाजिक व आर्थिक बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि सही मायने में अब यह क्षेत्र शेष भारत के साथ जुड़कर आगे बढ़ रहा है।
विश्वविद्यालय कुलपति प्रोफेसर टंकेश्वर कुमार ने अपने संबोधन में दो दिवसीय इस आयोजन के समूचे राजनीति विज्ञान विभाग की सराहना की और कहा अवश्य ही इन दो दिनों में हुए मंथन के परिणामस्वरूप् इस क्षेत्र में आ रहे बदलावों को जानने समझने में शिक्षकों, विद्यार्थियों व शोद्यार्थियों को मदद मिलेगी। कुलपति ने इस मौके पर कहा कि यकीनन धारा 370 के पहले और बाद की स्थिति में भारी बदलाव जम्मू-कश्मीर और लद्दाख क्षेत्र में देखने को मिल रहा है जिसे बीते दो दिनों में विशेषज्ञों ने प्रमाणिक रूप से हमारे समक्ष प्रस्तुत भी किया। कुलपति ने कहा कि भारत सदैव से ही वासुदेव कुटुम्बकम की भावना को लेकर आगे बढ़ता और तमाम परेशानियों के बावजूद भी जिस तरह से भारत सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर व लद्दाख क्षेत्र में बनी समस्याओं निदान सुनिश्चित किया जा रहा है वो यकीनन उल्लेखनीय है। कुलपति ने इस आयोजन को इस दिशा में जारी विमर्श के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया। इसी क्रम में विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो.सुनील कुमार ने कहा कि राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित यह सेमिनार विद्यार्थियों, शोद्यार्थियों को जम्मू, कश्मीर व लद्दाख क्षेत्र के इतिहास, वर्तमान और भविष्य की राह को जानने समझने का नया नजरियां प्रदान करेगा। उन्होंने विश्वविद्यालय कुलपति प्रो.टंकेश्वर कुमार का उनके मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि उनकी प्रेरणा से ही इस विषय पर विर्मश संभव हो सका। कुलसचिव ने आयोजन में सम्मिलित सभी विशेशज्ञ वक्ताओं व शोध पत्र प्रस्तुत करने वाले शिक्षकों व शोद्यार्थियों का भी आभार व्यक्त किया। समापन सत्र से पूर्व में जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में सहायक आचार्य डॉ. आयुषी केतकर, दिल्ली विश्वविद्यालय में सहायक आचार्य डॉ. अमित सिंह ने विस्तार से इस क्षेत्र में आए बदलावों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के अंत में सेमिनार के संयोजक डॉ.राजीव कुमार सिंह ने विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की और धन्यवाद ज्ञापन विभाग के सह आचार्य डॉ. शांतेश कुमार सिंह ने प्रस्तुत किया।
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