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इंटेक ने डीयू के 5% ऑनलाइन क्रेडिट प्रस्ताव का किया कड़ा विरोध

संगठन के अनुसार, विश्वविद्यालयी शिक्षा का मूल आधार संवाद, बहस और शिक्षकों का मार्गदर्शन होता है, जिसे ऑनलाइन माध्यम पूरी तरह प्रतिस्थापित नहीं कर सकते।

नई दिल्ली। इंडियन नेशनल टीचर्स कांग्रेस (इंटेक) ने दिल्ली विश्वविद्यालय  के उस प्रस्ताव का कड़ा विरोध जताया है, जिसमें यूजी, पीजी और पीएचडी पाठ्यक्रमों में 5% क्रेडिट स्वयंम/मूक के माध्यम से देने की बात कही गई है। इस प्रस्ताव पर 15 अप्रैल 2026 को विचार किया जाना है।
 
इंटेक का कहना है कि यह कदम देखने में भले ही प्रगतिशील प्रतीत होता हो, लेकिन इससे शैक्षणिक गुणवत्ता और कक्षा आधारित शिक्षा प्रणाली कमजोर हो सकती है। संगठन के अनुसार, विश्वविद्यालयी शिक्षा का मूल आधार संवाद, बहस और शिक्षकों का मार्गदर्शन होता है, जिसे ऑनलाइन माध्यम पूरी तरह प्रतिस्थापित नहीं कर सकते। इंटेक ने यह भी आशंका जताई है कि यह प्रस्ताव डिजिटल विभाजन को और बढ़ाएगा। ग्रामीण, आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के छात्रों के पास इंटरनेट और आवश्यक संसाधनों की कमी होती है, जिससे वे इस व्यवस्था में पिछड़ सकते हैं। साथ ही, संगठन ने ऑनलाइन मूल्यांकन की पारदर्शिता और गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए हैं। इंटेक के अनुसार, ऑनलाइन परीक्षाओं में अनियमितताओं की संभावना अधिक रहती है, जिससे निष्पक्ष मूल्यांकन प्रभावित हो सकता है। इंटेक का मानना है कि इस तरह के कदम धीरे-धीरे पारंपरिक शिक्षण प्रणाली को कमजोर कर सकते हैं और विश्वविद्यालयों को केवल प्रमाण-पत्र देने वाली संस्थाओं में बदलने का खतरा पैदा कर सकते हैं। इंटेक के चेयरमैन प्रोफेसर. पंकज गर्ग ने मांग की है कि इस प्रस्ताव को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए तथा शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए बुनियादी ढांचे और शिक्षकों को सशक्त किया जाए।

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