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हंसराज महाविद्यालय में द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ

हंसराज महाविद्यालय में ‘वैदिक उपासना विधि एवं विमर्श’ विषय पर द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। प्राचार्या प्रो. (डॉ.) रमा सहित विद्वानों ने वैदिक ज्ञान-परंपरा, आत्मपरिष्कार, तर्कशीलता और लोककल्याण की समकालीन प्रासंगिकता पर विचार रखे।

हंसराज महाविद्यालय में द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ

नई दिल्ली : हंसराज महाविद्यालय के संस्कृत साहित्य परिषद् एवं वेद निधि ट्रस्ट के संयुक्त तत्त्वावधान में ‘वैदिक उपासना : विधि एवं विमर्श’ विषयक द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ पद्मभूषण ज्ञानप्रकाश चोपड़ा संगोष्ठी कक्ष में हुआ। उद्घाटन सत्र में महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. (डॉ.) रमा ने वैदिक ज्ञान-परंपरा के मूल्यों को समकालीन जीवन में आत्मसात् करने की आवश्यकता पर बल दिया।

वेद निधि ट्रस्ट के संस्थापक डॉ. आनंद कुमार ने संगोष्ठी की प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए कहा कि वैदिक उपासना सामाजिक कुरीतियों से मुक्ति का मार्ग है तथा तर्कशीलता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करती है। मुख्य अतिथि स्वामी आर्यवेश ने कहा कि वेद संपूर्ण मानव समाज के लिए ज्ञान के स्रोत हैं। उपासना केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि आंतरिक परिवर्तन और जीवन में ईश्वरीय गुणों को अपनाने की साधना है। उन्होंने कहा कि ग्रंथ केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि जीवन जीने की प्रेरणा हैं। मुख्य वक्ता डॉ. ज्वलंत कुमार शास्त्री ने वेद, प्रमुख उपनिषदों तथा सांख्य, योग और वेदांत दर्शनों के संदर्भ में वैदिक उपासना की दार्शनिक एवं व्यावहारिक प्रासंगिकता स्पष्ट की। ठाकुर विक्रम सिंह ने परोपकार और लोककल्याण को जीवन का महत्त्वपूर्ण उद्देश्य बताया, जबकि विशिष्ट अतिथि डॉ. एस. के. शर्मा ने वैदिक परंपरा के मूल तत्त्वों के अध्ययन पर बल दिया।

प्रथम तकनीकी सत्र में आचार्या सूर्या देवी चतुर्वेदा ने वेदांत दर्शन और वैदिक उपासना के संबंधों पर प्रकाश डालते हुए परमात्मा के निराकार स्वरूप को रेखांकित किया। आचार्या प्रियंवदा ने ‘ईश्वरोपासना का वैदिक स्वरूप’ विषय पर ज्ञान, कर्म और उपासना के पारस्परिक संबंधों की व्याख्या की। सत्र की अध्यक्षता दिल्ली विश्वविद्यालय के संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. भारतेंदु पांडेय ने की तथा शास्त्रीय दृष्टिकोण से वैदिक चिंतन के अध्ययन का महत्त्व बताया।

उद्घाटन सत्र का संचालन एवं संयोजन डॉ. खुशबू शुक्ला ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन यज्ञवीर जी ने प्रस्तुत किया। प्रथम तकनीकी सत्र का संचालन मोहित कुमार पांडेय ने किया और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. संध्या राठौर ने दिया। संगोष्ठी का पहले दिन का समापन दोनों सत्रों में वैदिक ज्ञान, उपासना और समकालीन जीवन के अंतर्संबंधों पर सार्थक अकादमिक विमर्श के साथ हुआ।

 

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