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हंसराज कॉलेज में राष्ट्रीय सम्मेलन: विज्ञान, संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा पर मंथन

Key Highlights & Summary

दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज में ‘विज्ञान, संस्कृत एवं दर्शनशास्त्र: भारतीय ज्ञान परंपरा की समकालीन प्रासंगिकता’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में देशभर के विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों से आए विद्वानों एवं शिक्षाविदों ने भारतीय ज्ञान परंपरा की वैज्ञानिक दृष्टि, संस्कृत की बौद्धिक समृद्धि और आधुनिक तकनीकी युग में भारतीय दर्शन की उपयोगिता पर विचार साझा किए। कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह भी उपस्थित रहे।

हंसराज कॉलेज में राष्ट्रीय सम्मेलन: विज्ञान, संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा पर मंथन

नई दिल्ली: हंसराज महाविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन ‘विज्ञान, संस्कृत एवं दर्शनशास्त्र : भारतीय ज्ञान परंपरा की समकालीन प्रासंगिकता’ का आज का कार्यक्रम अत्यंत सफल एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय की परंपरा के अनुरूप वैदिक मंत्रोच्चार एवं मासिक यज्ञ के साथ हुआ। हवन की पवित्र अग्नि और वैदिक मंत्रों के बीच आरंभ हुए इस आयोजन ने भारतीय ज्ञान, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना की हमारी समृद्ध परंपरा को एक सार्थक अभिव्यक्ति प्रदान की।

सम्मेलन के दौरान देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों से पधारे विद्वानों, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने विज्ञान, संस्कृत एवं दर्शन के विविध आयामों पर अपने विचार रखे। भारतीय ज्ञान परंपरा की वैज्ञानिक दृष्टि, संस्कृत की बौद्धिक समृद्धि, भारतीय दर्शन की व्यापकता तथा वर्तमान तकनीकी युग में इनकी प्रासंगिकता पर गंभीर एवं विचारोत्तेजक चर्चा हुई। इस अवसर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह जी की गरिमामयी उपस्थिति रही। उनके साथ अन्य प्रतिष्ठित अतिथियों एवं विद्वानों की सहभागिता ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की। विभिन्न सत्रों में हुए विचार-विमर्श ने यह स्पष्ट किया कि विज्ञान की प्रगति, दार्शनिक चिंतन और भारतीय ज्ञान परंपरा का समन्वय आज के समय की एक महत्त्वपूर्ण आवश्यकता है।

मेरा विश्वास है कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल हमारे अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान की चुनौतियों को समझने और भविष्य की दिशा निर्धारित करने वाली जीवंत बौद्धिक विरासत है। इस सफल आयोजन के लिए सम्मेलन की संयोजक डॉ. ज्ञानेश्वरी, सेंटर फॉर वैदिक एंड योगिक साइंस, संस्कृत विभाग, आयोजन समिति तथा महाविद्यालय के समस्त शिक्षक एवं गैर-शिक्षक साथियों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई। सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों के प्रति हृदय से आभार।

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