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उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी जीएसटीए चुनावों में देरी

शिक्षा विभाग पर उठे सवाल : अजय वीर यादव , चुनाव अंतिम चरण में थे, अचानक किए गए रद्द

 राकेश नाथ 

नई दिल्ली। दिल्ली के सरकारी विद्यालय शिक्षकों के एकमात्र मान्यता-प्राप्त संगठन राजकीय विद्यालय शिक्षक संघ के चुनाव अंतिम चरण में पहुँच चुके थे। इन्हें 01 दिसंबर को शिक्षा विभाग द्वारा नियुक्त निर्वाचन अधिकारी ने एकतरफा निर्णय लेते हुए रद्द कर दिया, जिससे शिक्षक समुदाय में रोष फैल गया।
 
न्यायालय की शरण में पहुँचा जीएसटीए
 
चुनाव रद्द किए जाने के आदेश के विरुद्ध जीएसटीए ने माननीय उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया। न्यायालय ने स्पष्ट और बाध्यकारी आदेश जारी करते हुए कहा कि जिन शिक्षकों ने स्वेच्छा से सदस्यता नहीं ली है, उन्हें 10 दिनों के भीतर सदस्यता वापस लेने का अवसर दिया जाए।
 
स्पष्ट निर्देश, तय समय-सीमा
 
माननीय उच्च न्यायालय ने निर्वाचन अधिकारी को तत्काल सर्कुलर जारी करने तथा प्राप्त आवेदनों के आधार पर अगले तीन दिनों में सदस्यता शुल्क की वापसी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। इन सभी प्रक्रियाओं को 22 दिसंबर तक पूर्ण किया जाना था।
 
निर्वाचन अधिकारी की ई-मेल से बढ़ा भ्रम
 
22 दिसंबर को निर्वाचन अधिकारी द्वारा केवल एक ई-मेल जारी की गई, जिसमें जीएसटीए द्वारा चुनाव हेतु खरीदी गई सामग्री को यथास्थिति में रखने का निर्देश दिया गया। ई-मेल में न तो न्यायालय के आदेशों के अनुपालन का उल्लेख था और न ही चुनाव प्रक्रिया या आगे की समय-सीमा को लेकर कोई स्पष्टता।
 
शिक्षक समाज में असंतोष और चिंता
 
इस अस्पष्टता के कारण शिक्षक समाज में गंभीर भ्रम और असंतोष उत्पन्न हो गया है। चुनाव प्रक्रिया के ठप होने से लोकतांत्रिक अधिकारों पर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।
 
महासचिव का निर्वाचन अधिकारी को पत्र
 
इसी मुद्दे को लेकर जीएसटीए के महासचिव अजय वीर यादव ने निर्वाचन अधिकारी को औपचारिक पत्र भेजा है। पत्र में उन्होंने माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों का तत्काल अनुपालन, शीघ्र सर्कुलर जारी करने और चुनाव की तिथि घोषित करने की माँग की है।
 
प्री-कंटेम्प्ट चेतावनी का उल्लेख
 
पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना जारी रहती है, तो इस पत्र को *Pre-Contempt Warning* के रूप में माना जाए।
 
50 हजार शिक्षकों की मानसिक पीड़ा
 
अजय वीर यादव ने कहा कि चुनाव स्थगित रहने के कारण दिल्ली के लगभग 50,000 सरकारी शिक्षक मानसिक रूप से प्रताड़ित हो रहे हैं। शिक्षक इसे अपनी लोकतांत्रिक स्वतंत्रता और संगठनात्मक अधिकारों पर सीधा हमला मान रहे हैं।
 
शिक्षा जगत में तीखी आलोचना
 
लोकतांत्रिक प्रक्रिया से होने वाले शिक्षक संघ के चुनावों को इस प्रकार रोके जाना शिक्षा जगत में तीव्र आलोचना का विषय बना हुआ है। वरिष्ठ शिक्षाविदों का मानना है कि शिक्षक संघों को कमजोर करना शिक्षकों की स्वतंत्र अभिव्यक्ति, सम्मान और राष्ट्र-निर्माण में उनकी भूमिका को प्रभावित करता है।
 
प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल
 
जीएसटीए का कहना है कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी चुनाव प्रक्रिया में हीला-हवाली दिल्ली की प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।
 
31 जनवरी से पहले चुनाव संभव
 
महासचिव अजय वीर यादव ने आशा व्यक्त की कि यदि माननीय शिक्षा मंत्री समय रहते हस्तक्षेप करें, तो 31 जनवरी से पूर्व जीएसटीए के चुनाव संपन्न कराए जा सकते हैं। ऐसा होने पर शिक्षक समाज उनके प्रति आभार व्यक्त करेगा।

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