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यूजीसी मुख्यालय पर डूटा का विशाल धरना

उच्च शिक्षा आयोग बिल का शिक्षकों ने किया विरोध --- डूटा ने शिक्षकों की पूरी पिछली सेवा की गिनती, पीएच.डी./एम.फिल. वेतन वृद्धियों की निरंतरता, ईडब्ल्यूएस विस्तार के पदों की मांग व रिसर्च अनुदान की मांग की

नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (डूटा ) ने  अपनी कई वर्षों से लंबित मांगों के समाधान के लिए जंतर -मंतर के बाद मंगलवार को दूसरे दिन यूजीसी कार्यालय पर धरना दिया गया। प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने संसद में लाये जा रहे उच्च शिक्षा आयोग​ बिल का विरोध किया तथा पूरी पिछली सेवा की गिनती, पीएच.डी./एम.फिल. वेतन वृद्धियों की निरंतरता, ईडब्ल्यूएस विस्तार के पदों की मांग व रिसर्च अनुदान की मांग की ।

        डूटा के आहवान पर अपनी लंबित मांगों को लेकर सैंकडा शिक्षक आज प्रातः से यूजीसी मुख्यालय पर जमा होने शुरु ोगये।  डूटा ने तीन घंटे के धरने पर शिक्षकों की लंबित मांगों पर  विभिन्न कॉलेजों से आएं शिक्षकों ने अपने विचारों को साझा किया । धरने का नेतृत्व डूटा अध्यक्ष प्रो.वी.एस. नेगी ने किया । धरने को अनेक शिक्षकों ने संबोधित किया जिसमें प्रो. विमलेंदु तीर्थंकर , ईसी सदस्य डॉ. सुनील शर्मा , प्रो. हंसराज सुमन , डॉ.के.एम. वत्स ,  डॉ.जगबीर सिंह , डॉ. अनिल कुमार , डॉ.प्रेमचंद , डॉ.चमन सिंह , डॉ. बिवेक रजक आदि । सभी शिक्षकों ने संसद में लाए जा रहे यूजीसी के स्थान पर उच्च शिक्षा आयोग बिल का विरोध किया और कहा कि उच्च शिक्षा आयोग बनाने से पहले देशभर के शिक्षकों से मुलाकात कर उसके विषय में सम्पूर्ण जानकारी दे ।  धरने के बाद डूटा के प्रतिनिधि मंडल ने यूजीसी अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपा और शिक्षकों के साथ लगभग एक घंटे सकारात्मक बातचीत की और कहा कि इन तमाम मुद्दों को यूजीसी रेगुलेशन -2026 में समाधान करने का आश्वासन दिया । 

               शिक्षकों को संबोधित करते हुए के डूटा अध्यक्ष प्रो. वी.एस. नेगी ने वर्षो से लंबित कई अनसुलझे मुद्दों पर गहरी चिंता व्यक्त की, जिनमें पदोन्नति के लिए पूरी पिछली एडहॉक सेवा को जोड़ना , पीएच.डी./एम.फिल. वेतन वृद्धि की निरंतरता, पुरानी पेंशन योजना की बहाली, और स्वीकृत शिक्षण पदों, अनुसंधान अनुदानों और अवसंरचना फंडिंग की लगातार कमी शामिल हैं—यह  सब राष्ट्रीय शिक्षा नीति -- 2020 के तहत अंडर ग्रेजुएट कॅरिकुलम फ्रेमवर्क के चौथे वर्ष के कार्यान्वयन के लिए आवश्यक हैं। उन्होंने यह भी दोहराया कि सशक्तिकरण के बिना प्रभावी शैक्षणिक सुधार असंभव है । वर्तमान में कॉलेजों में शिक्षक संख्या, संसाधन और संस्थागत क्षमता में कमी बनी हुई है ।प्रो. नेगी ने बताया कि यूजीसी पर दिए गए धरने में  वरिष्ठ शिक्षकों के अलावा विद्वत परिषद के सदस्यों  और कार्यकारी परिषद सदस्यों ने धरना में भाग लिया और ड्राफ्ट  हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया बिल को सार्वजनिक रूप से जारी करने की अत्यंत आवश्यकता पर जोर दिया, इसके बाद प्रामाणिक हितधारक परामर्श की आवश्यकता पर भी बल दिया गया ताकि शासकीय ढांचे, भर्ती मानदंड, सेवा शर्तें और सार्वजनिक वित्तीय सहायता सुरक्षित रह सके। उन्होंने प्रतिज्ञाबद्ध 25 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस विस्तार पदों की तुरंत स्वीकृति की भी मांग की। 

           मीडिया सह संयोजक प्रो. हंसराज सुमन ने बताया कि डूटा ने इसके अतिरिक्त प्रिंसिपल पदों में आरक्षण लागू करने, पिछड़े वर्गों के सेकेंड ट्रांच के पदों को विशेषकर खाली पड़े  पदों को भरने के लिए विशेष भर्ती अभियान चलाने ,  पुस्तकालयाध्यक्षों के वेतन और सेवानिवृत्ति आयु में समानता, शारीरिक शिक्षा शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु में असंगति में सुधार, और ओएमएसपी प्रशिक्षकों और कंप्यूटर प्रोग्रामरों के लिए प्रमोशन योजनाओं को तेजी से लागू करने की मांग की। उन्होंने यह भी बताया है कि नॉट फाउंड सूटेबल -उपयुक्त कोई नहीं  निर्णयों का भी विरोध किया । यूजीसी द्वारा निर्धारित स्क्रीनिंग मानदंडों का कड़ाई से पालन करने का आग्रह किया और हिफा ऋण से जुड़ी फीस वृद्धि को उलटने की भी मांग की। इसके अलावा डूटा ने शिक्षा मंत्रालय से भी अपील की है और यूजीसी से अनुरोध है कि वह बिना देरी किए कार्य करे और दिल्ली विश्वविद्यालय की शैक्षणिक ईमानदारी, सेवा की शर्तों और उनकी सुरक्षा के लिए इन लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का समाधान करे

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