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डीयू में कर्मचारियों का विशाल धरना, मांगे पूरी न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी

विश्वविद्यालय हेल्थ सेंटर की सदस्यता पूर्व की तरह कॉलेज कर्मचारियों के लिए बहाल करने, कांट्रैक्ट कर्मचारियों को स्थायी करने एवं ईडब्ल्यूएस तथा ओबीसी एक्सटेंशन के तहत स्वीकृत पदों को शीघ्र भरने की मांग

नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय कॉलेज कर्मचारी यूनियन (डूक्कू) के बैनर तले मंगलवार को हजारों कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय के गेट नंबर-1 पर सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और जल्द समाधान की मांग की। धरने को यूनियन के प्रधान देवेंद्र शर्मा, महासचिव रविंद्र पांडे, अशोक अत्री, उप प्रधान धर्मेंद्र, अमित माथुर, सहसचिव वीरेंद्र पाल, प्रचार सचिव अवधेश कुमार सहित विभिन्न कॉलेजों के प्रधानों ने संबोधित किया। इनमें रामजस कॉलेज के प्रधान बालकिशन, केशव महाविद्यालय के प्रधान लवकेश जैरथ, श्री वेंकटेश्वर कॉलेज के प्रधान मल्लादि राव और हंसराज महाविद्यालय के प्रधान अजय शर्मा प्रमुख रूप से शामिल रहे। वक्ताओं ने कहा कि कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित मांगों की अनदेखी की जा रही है, जिससे रोष व्याप्त है।

 
ये हैं यूनियन की प्रमुख मांगें
 
यूनियन ने अपनी मांगों में निम्न मुद्दों को प्रमुखता से उठाया—
* विश्वविद्यालय हेल्थ सेंटर की सदस्यता पूर्व की तरह कॉलेज कर्मचारियों के लिए बहाल की जाए।
* कांट्रैक्ट कर्मचारियों को स्थायी किया जाए।
* ईडब्ल्यूएस तथा ओबीसी एक्सटेंशन के तहत स्वीकृत पदों को शीघ्र भरा जाए।
* एग्जीक्यूटिव काउंसिल में कर्मचारियों को स्थायी प्रतिनिधित्व दिया जाए।
* एनटीए द्वारा लिए गए पदों के बदले विश्वविद्यालय से लिए गए करोड़ों रुपये वापस कराए जाएं।
* प्रोफेसर राजीव गुप्ता कमेटी की सिफारिश के तहत विश्वविद्यालय हॉस्टलों के केंद्रीय पूल में मर्जर के प्रस्ताव को वापस लिया जाए।
* माली और इंजीनियरिंग स्टाफ को सीपीडब्ल्यूडी पैटर्न के अनुसार वेतनमान दिया जाए।
* अनुभाग अधिकारियों को ग्रेड पे 4800 रुपये प्रदान किया जाए।
 
डीयू प्रशासन को दी चेतावनी
 
यूनियन के प्रधान देवेंद्र शर्मा ने चेतावनी दी कि यदि कल तक विश्वविद्यालय प्रशासन वार्ता के माध्यम से समस्याओं का समाधान नहीं करता है, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा तथा धरने को आगे बढ़ाया जाएगा। यूनियन ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा और आवश्यकता पड़ने पर व्यापक आंदोलन की रणनीति अपनाई जाएगी।
 

 

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