नई दिल्ली | दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस स्थित दौलत राम कॉलेज के इतिहास विभाग में 06 फ़रवरी 2026 को डॉ. राजेश प्रसाद की पुस्तक "कल्चरल ट्रांसफॉर्मेशनः द मेकिंग ऑफ अर्ली मॉडर्न यूरोप" का औपचारिक लोकार्पण कॉलेज के कॉन्फ्रेंस हॉल में सम्पन्न हुआ।
पुस्तक का विमोचन भारत के प्रतिष्ठित इतिहासविद् प्रो. मृदुला मुखर्जी, प्रो. अरविंद सिन्हा, प्रो. प्रभु मोहापात्रा तथा प्रो. मोनिका सक्सेना ने इतिहास विभाग के वरिष्ठ सहकर्मियों की उपस्थिति में किया। इस अवसर पर लेखक के पिता श्री शिव मुनि चौधरी भी उपस्थित रहे। उन्होंने अपने पुत्र की इस शैक्षणिक उपलब्धि पर गर्व व्यक्त किया और इसे परिवार तथा गाँव के लिए सम्मान की बात बताया। डॉ. राजेश प्रसाद ने अपने वक्तव्य में अपने शैक्षिक-जीवन की यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि बिहार के आरा (भोजपुर) क्षेत्र के छोटे से गाँव गोढ़ना से शुरू हुई उनकी शैक्षणिक यात्रा क्षेत्रीय स्कूल से होते हुए रामजस कॉलेज, फिर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, आगे प्रधानमंत्री संग्रहालय के अकादमिक अनुभव और अब दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्यापन तक पहुँची है। पुस्तक पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने इसे अर्ली मॉडर्न यूरोप की सांस्कृतिक संरचनाओं और परिवर्तन-प्रक्रियाओं को समझने के लिए महत्त्वपूर्ण कार्य बताया। प्रो. अरविंद सिन्हा ने कहा कि यह पुस्तक लेखक के अकादमिक करियर में “एक मील का पत्थर" सिद्ध होगी और अर्ली मॉडर्न काल के सांस्कृतिक, सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक आयामों को समझने में एक सुदृढ़ स्रोत बनेगी। नवीन दृष्टिकोण: पुस्तक में समय की नवीन और अद्यतन बहसों को समाहित किया गया है।
समग्र संश्लेषण: वक्ताओं के अनुसार, सांस्कृतिक इतिहास के दृष्टिकोण से इस अवधि का इतना समग्र संश्लेषण दुर्लभ है। विद्यार्थियों के लिए उपयोगी: यह पुस्तक विशेष रूप से दिल्ली विश्वविद्यालय सहित अन्य विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए, खासकर "राइज़ ऑफ मॉडर्न वेस्ट" और "कल्चरल ट्रांसफॉर्मेशन" जैसे पाठ्यपत्रों के अध्ययन में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।
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