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डॉ.अम्बेडकर का व्यक्तित्व बहुआयामी था : प्रो.सुषमा यादव

अरबिंदो कॉलेज में डॉ.भीमराव अम्बेडकर अध्ययन केंद्र की स्थापना हुई

 

नई दिल्ली।  दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध अरबिंदो कॉलेज ने  अपने यहाँ " डॉ. भीमराव अम्बेडकर अध्ययन केंद्र " स्थापित किया है । दिल्ली विश्वविद्यालय में डॉ.अम्बेडकर पर खुलने वाला पहला अध्ययन केंद्र होगा जहाँ बाबा साहेब के विचारों पर अध्ययन व शोध कार्य कराया जाएगा । बृहस्पतिवार को इस केंद्र का उद्धघाटन यूजीसी की सदस्य , पूर्व कुलपति व डीयू में विजिटर नॉमनी , मुख्य अतिथि प्रो. सुषमा यादव , प्राचार्य प्रो.अरुण चौधरी  व अध्ययन केंद्र के संयोजक डॉ.हंसराज सुमन ने फीता काटकर व दीप प्रज्वलित कर किया । साथ ही अतिथियों ने डॉ.अम्बेडकर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की । इस अवसर पर विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया जिसका विषय डॉ. अम्बेडकर का बहुआयामी व्यक्तित्व था । 

     अध्ययन केंद्र के उद्धघाटन अवसर पर अपने संबोधन में प्रो.सुषमा यादव ने कहा कि बाबा साहेब एक सच्चे देशभक्त और राष्ट्रवादी थे । वे न केवल विधि विशेषज्ञ थे बल्कि अर्थशास्त्री , साहित्यकार , पत्रकार , राजनीतिज्ञ विशेषज्ञ , संविधान के शिल्पकार , सामाजिक न्याय के पुरोधा ,  समाजशास्त्री एवं युग दृष्टा थे । कोई भी ऐसा क्षेत्र नहीं जिसमें उनका योगदान न रहा हो । वे मात्र संविधान निर्माता नहीं थे बल्कि राष्ट्र निर्माता भी थे। उन्होंने कहा कि यह भारतीय संविधान की विशेषता है कि इतने वर्षों बाद भी भारत एक लोकतांत्रिक एवं सशक्त राष्ट्र के रुप में अटूट रहा है । उन्होंने इस बात की आवश्यकता व्यक्त की कि बाबा साहेब के विचारों को व्यापक रुप से विश्वविद्यालयों/ कॉलेजों में पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाए । उन्होंने बताया कि दिल्ली विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में उन्हें पढ़ाया जाना शुरु हो गया है । 

         प्रो.सुषमा यादव ने अध्ययन केंद्र की स्थापना पर कॉलेज को बधाई देते हुए कहा कि यहाँ छात्रों को उनके व्यक्तित्व के सभी आयामों पर शोध करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए । उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत बाबा साहेब के दूरदर्शी विचारों के माध्यम से 2047 तक  भारत को एक विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित किया जा सकता है । महिलाओं के अधिकारों पर चर्चा करते हुए प्रो.सुषमा यादव ने यह याद दिलाया कि कैसे उन्हें पुरुषों के साथ ही मतदान का अधिकार दिलाया , उन्होंने ही महिलाओं के लिए मातृत्व अवकाश का प्रावधान कराया । उन्होंने बताया कि रिजर्व बैंक का पूरा विधान और संरचना बाबा साहेब के सपनों की ही एक निर्मिति है। उन्होंने यह भी कहा कि वे किसी एक वर्ग के नेता नहीं थे बल्कि सम्पूर्ण विश्व के नेता थे ,इसीलिए उन्हें ज्ञान का प्रतीक कहा जाता है । 

               अध्यक्षीय वक्तव्य में बोलते हुए कॉलेज के प्राचार्य प्रो. अरुण चौधरी ने कहा कि सामाजिक समरसता के लिए जीवन समर्पित कर देने वाले बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर  के जीवन संघर्षों से हमें प्रेरणा लेनी चाहिए । उन्होंने आशा व्यक्त कि इस अध्ययन केंद्र के द्वारा कॉलेज के शिक्षकों व विद्यार्थियों को बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के विषय में जानने व शोध करने का अवसर मिलेगा । उन्होंने  आश्वासन दिया कि अध्ययन केंद्र के लिए संबंधित पुस्तकों एवं आवश्यक संसाधनों की कमी नहीं होने दी जाएगी ।  पाठ्यक्रम के चौथे वर्ष में छात्रों को डॉ.अम्बेडकर व श्री अरबिंदो के राष्ट्रवादी विचारों पर विद्यार्थियों से तुलनात्मक शोध कराए जाने की बात कही । 
   
         अध्ययन केंद्र के संयोजक डॉ. हंसराज सुमन ने बताया कि बाबा साहेब का व्यक्तित्व बहुआयामी था , जहाँ वे एक ओर संविधान के शिल्पकार थे वहीं दूसरी ओर बहुजन समाज में पहले पत्रकार भी थे । उन्होंने मूकनायक व बहिष्कृत भारत नाम से पत्र निकाले जो उस समय दलितों में जागरूकता लाने का काम किया । उन्होंने बताया कि बाबा साहेब को किसी एक क्षेत्र में सीमित करके नहीं देखा जा सकता बल्कि वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे । उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब हम सभी देशवासी उनके बताए हुए रास्ते पर चले । उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने बाबा साहेब का सम्मान के लिए अनेक कार्य किए हैं जिसमें पूरे देश के गरीबों , पिछड़ों के लिए कार्य योजनाएं बनाई गई हैं और ऐसे में जहाँ बाबा साहेब का महत्व बढ़ रहा है वहीं देश के कल्याण की दिशा भी स्पष्ट हो रही है । 

                    कार्यक्रम के अंत में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ की संयोजिका प्रोफ़ेसर संगीता कौल  ने अतिथियों व आए हुए शिक्षकों , कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों का धन्यवाद ज्ञापित किया । इस अवसर पर प्रो.वंदना भल्ला , प्रो.विनय कुमार सिंह , प्रो. मीता माथुर , डॉ.राजकुमार वर्मा , डॉ. पंकजेन्द्र किशोर , डॉ.कीर्ति यादव , डॉ. दिनेश कुमार , श्री दीपक कुमार , श्री पंकज कुमार , श्री तरुण कुमार , श्री अमित पाल , पावस चौधरी आदि छात्रों की महत्वपूर्ण भूमिका रहीं । 

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