नई दिल्ली। इंडियन नेशनल टीचर्स’ कांग्रेस (इंटेक) ने सार्वजनिक बैठकों, प्रदर्शनों और शांतिपूर्ण सभाओं पर लगाए गए किसी भी व्यापक प्रतिबंध की कड़ी निंदा की है। संगठन ने कहा है कि शांतिपूर्वक एकत्र होने और असहमति व्यक्त करने का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 के अंतर्गत प्रदत्त एक मूल लोकतांत्रिक अधिकार है, जिसे सीमित करना लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है।
लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा पर जोर
इंटेक ने अपने वक्तव्य में स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण सभा के अधिकार को सीमित करना न केवल नागरिक स्वतंत्रताओं को कमजोर करता है, बल्कि सहभागी लोकतंत्र की उस भावना को भी आघात पहुँचाता है जो शैक्षणिक और सार्वजनिक संस्थाओं को सशक्त बनाती है। संगठन का मानना है कि विश्वविद्यालय परिसर और अन्य सार्वजनिक स्थल संवाद, बहस और रचनात्मक सहभागिता के खुले मंच बने रहने चाहिए।
डीयू प्रतिबंधों के बजाय संवाद को प्राथमिकता
इंटेक ने कहा कि संवाद के स्थान पर प्रतिबंधात्मक उपाय अपनाना आपसी विश्वास को कमजोर करता है और अनावश्यक टकराव की स्थिति पैदा करता है। वास्तविक समस्याओं का समाधान प्रशासनिक प्रतिबंधों के बजाय सार्थक परामर्श और रचनात्मक संवाद के माध्यम से किया जाना चाहिए।
डीयू प्रशासन से तत्काल समीक्षा की मांग
संगठन ने विश्वविद्यालय प्रशासन से आग्रह किया है कि लगाए गए प्रतिबंधों की तत्काल समीक्षा कर उन्हें वापस लिया जाए और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए। इंटेक ने शिक्षकों, छात्रों और व्यापक शैक्षणिक समुदाय के हित में शांतिपूर्ण, वैधानिक और रचनात्मक लोकतांत्रिक कार्रवाई के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। इस संबंध में इंटेक के चेयरमैन प्रो. पंकज गर्ग ने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा प्रत्येक शैक्षणिक संस्थान की जिम्मेदारी है और संवाद ही किसी भी समस्या का स्थायी समाधान है।
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