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देश में भाषाई पत्रकारिता के साथ साथ भारतीय भाषाओं के संवर्धन की आवश्यकताः रवि प्रकाश टेकचंदानी

हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय में भारत के स्वाधीनता समर में भारतीय भाषाई पत्रकारिता का योगदान (सिंधी भाषा पत्रकारिता के विशेष संदर्भ में) विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन

महेन्द्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेवि), महेंद्रगढ़ के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग व नेशनल काउंसिल फॉर प्रमोशन ऑफ सिंधी लैंग्वेज, शिक्षा मंत्रालय के संयुक्त तत्वाधान में भारत के स्वाधीनता समर में भारतीय भाषाई पत्रकारिता का योगदान (सिंधी भाषा पत्रकारिता के विशेष संदर्भ में) विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया।

         संगोष्ठी के उदघाटन सत्र को संबोधित करते हुए हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेशवर कुमार ने अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भाषा केवल संचार का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर है। उन्होंने मातृभाषा के महत्त्व को समझाते हुए भक्ति आंदोलन तथा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भाषाई पत्रकारिता की भूमिका पर प्रकाश डाला। कुलपति ने कहा कि देश के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी अपनी भाषा का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सिंधी पत्रकारिता का इतिहास बहुत ही गौरवशाली रहा है और पत्रकारिता की युवा पीढ़ी को इस पर अध्ययन करते हुए इसके महत्व को समझना चाहिए। 
            संगोष्ठी में विशेषज्ञ वक्ता सिंधी भाषा विकास परिषद के निदेशक एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. रवि प्रकाश टेकचंदानी ने कहा कि भारतीय भाषाएं ही देश की सबसे बड़ी ताकत हैं। देश में भाषाई पत्रकारिता के साथ साथ सभी भाषाओं के संवर्धन की आवश्यकता है। जब भाषाई पत्रकारिता का संवर्धन एवं विकास होगा तो देश में पत्रकारिता की गुणवत्ता भी बढ़ेगी व आने वाली पीढ़ी भाषा पत्रकारिता के महत्व को भी समझ सकेगी। उन्होंने बताया कि इस समय देशभर में सिंधी भाषा के 20 से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। यदि किसी के अंतर्मन तक पहुंचना है तो उसकी स्थानीय भाषा में संवाद करना आवश्यक है।  
           प्रो. टेकचंदानी ने सिंध की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर चर्चा करते हुए कहा कि सिंध के बिना हिंद की कल्पना नहीं की जा सकती। उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता संग्राम में सिंधी भाषा और सिंध का योगदान अतुलनीय रहा। उन्होंने कहा कि पत्रकार को सर्वविषय ज्ञानी होना चाहिए, क्योंकि पत्रकारिता केवल समाचार संकलन तक सीमित नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण की महत्वपूर्ण आधारशिला है। उन्होंने वीरूमल बेगराज जैसे पत्रकारों का उदाहरण दिया, जिन्होंने सिंधी अखबार प्रकाशित कर अंग्रेजी हुकूमत की नीतियों का विरोध किया और इसके लिए जेल तक गए।  
              आयोजन में चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलसचिव डॉ. जितेंद्र भारद्वाज ने कहा कि खींचो न कमानों को तलवार निकालो, जब तोप मुकाबिल हो तो अखबार निकालो के माध्यम से पत्रकारिता के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत का स्वतंत्रता संग्राम विभिन्न विचारधाराओं का संगम रहा और पत्रकारिता ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से बताया कि पत्रकारिता का इतिहास सदैव गौरवशाली रहा है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता के विद्यार्थियों को सिंधी एवं अन्य भाषाई पत्रकारिता के गौरवशाली इतिहास को जानना जरूरी है।
        पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार ने सभी का स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. नीरज करण सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम के समापन सत्र में डॉ. आलेख एस नायक ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसार पर  डॉ. कामराज सिंधु मौजूद, डॉ. पंकज कुमार, डॉ. सुरेंद्र, डॉ. समुन, डॉ. देवेंद्र, डॉ. भारती बत्रा सहित हिंदी, संस्कृत एवं पत्रकारिता विभाग के विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने प्रतिभागिता की। 

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