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उच्च शिक्षा की उपेक्षा, कर राहत से शिक्षक वंचित: इंटेक

सार्वजनिक वित्त पोषण में वृद्धि, अकादमिक निवेश और न्यायसंगत कर राहत के माध्यम से तत्काल नीतिगत सुधार का आह्वान

नई दिल्ली | इंडियन नेशनल टीचर्स’ कांग्रेस (इंटेक) ने केंद्रीय बजट 2026–27 पर गहरी चिंता व्यक्त की है। इंटेक ने कहा है कि ये बजट एक बार फिर भारत की सार्वजनिक उच्च शिक्षा प्रणाली से जुड़ी मूलभूत चुनौतियों को संबोधित करने में विफल रहा है। बजट में आयकर के नाम पर जो सीमित राहत दिखाई गई है, वह वेतनभोगी वर्ग, विशेषकर शिक्षकों, तक प्रभावी रूप से नहीं पहुँचती।

            इंटेक के अध्यक्ष प्रोफेसर पंकज गर्ग ने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए आवंटन में केवल मामूली वृद्धि की गई है। केंद्रीय विश्वविद्यालयों में बुनियादी ढाँचे के विकास, नियमित संकाय भर्ती, शोध सहायता और छात्रवृत्तियों के लिए किसी सार्थक वृद्धि की घोषणा नहीं की गई है, जबकि चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम (एफ वाई यू पी), बढ़ी हुई शोध पर्यवेक्षण जिम्मेदारियों और सतत मूल्यांकन प्रणाली के कारण विश्वविद्यालयों पर कार्यभार लगातार बढ़ रहा है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यू जी सी) को धीरे-धीरे केवल एक नियामक संस्था तक सीमित किया जा रहा है और उसकी विकासात्मक भूमिका को लगातार कमजोर किया जा रहा है।
प्रोफेसर पंकज गर्ग ने कहा कि इंडियन नेशनल टीचर्स’ कांग्रेस (इंटेक) वेतनभोगी कर्मचारियों, विशेषकर कॉलेज और विश्वविद्यालय शिक्षकों, को कोई अतिरिक्त आयकर राहत न दिए जाने पर भी निराशा व्यक्त करता है। मौजूदा कर ढांचे को यथावत बनाए रखना शिक्षकों को वास्तविक राहत प्रदान नहीं करता। बढ़ती महँगाई, कार्यभार में वृद्धि और सेवा लाभों के ठहराव के बीच यह बजट शिक्षण समुदाय पर पड़ रहे आर्थिक दबावों की पूरी तरह अनदेखी करता है। बजट में न तो शिक्षकों के शैक्षणिक एवं शोध संबंधी खर्चों को मान्यता दी गई है और न ही मानक कटौती में कोई वृद्धि की गई है।
               इंटेक सरकार से मांग करता है कि वह शिक्षक संगठनों के साथ संवाद प्रारंभ करे और शिक्षा क्षेत्र के लिए लक्षित कर राहत उपायों को लागू करे। इंटेक सार्वजनिक वित्त पोषण में वृद्धि, अकादमिक निवेश और न्यायसंगत कर राहत के माध्यम से तत्काल नीतिगत सुधार का आह्वान करता है।

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