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Delhi CM Shri Schools में ‘Eat Well • Live Well’ पहल शुरू, 30,000 बच्चों को मिलेगा लाभ

दिल्ली के 75 CM Shri Schools में ‘Eat Well • Live Well’ पहल शुरू की गई है, जिसके तहत करीब 30,000 बच्चों को Foundational Wellbeing Literacy से जोड़ा जाएगा।

Delhi CM Shri Schools में ‘Eat Well • Live Well’ पहल शुरू, 30,000 बच्चों को मिलेगा लाभ

सिर्फ पढ़ना और गिनना ही नहीं, स्वस्थ जीवन की भी नींव मजबूत करेंगे दिल्ली के स्कूल

  • 75 CM Shri Schools में ‘Eat Well • Live Well’ पहल की शुरुआत, करीब 30,000 बच्चों तक पहुंचेगी Foundational Wellbeing Literacy

नई दिल्ली, 3 सितंबर 2026: दिल्ली सरकार ने 75 CM Shri Schools में ‘Eat Well • Live Well’ पहल की शुरुआत की है। इस पहल के तहत करीब 30,000 बच्चों को Foundational Wellbeing Literacy (FWL) से जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य बच्चों में ऐसी आदतों, व्यवहार और कौशल को विकसित करना है, जो उन्हें स्वस्थ, जिम्मेदार और संतुलित जीवन जीने में मदद करें।

पहल का शुभारंभ दिल्ली के शिक्षा मंत्री श्री आशीष सूद ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आज बच्चों के पास जानकारी की कमी नहीं है, लेकिन जानकारी को रोजमर्रा के व्यवहार में बदलना एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि 75 CM Shri Schools इस नए दृष्टिकोण के अग्रदूत बन सकते हैं।

FLN के साथ FWL पर जोर

कार्यक्रम का आधार यह विचार है कि जिस तरह Foundational Literacy and Numeracy (FLN) बच्चों की शिक्षा की बुनियादी नींव तैयार करता है, उसी तरह Foundational Wellbeing Literacy (FWL) बच्चों को स्वस्थ और बेहतर जीवन जीने के लिए जरूरी बुनियादी समझ और कौशल प्रदान करती है।

यह पहल Whole-School Approach पर आधारित है। इसमें बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ उनके दैनिक व्यवहार और स्कूल के वातावरण को भी महत्व दिया जाएगा।

कार्यक्रम के तहत बच्चों में यह समझ विकसित करने पर ध्यान दिया जाएगा कि वे:

  • पौष्टिक और संतुलित भोजन का चुनाव कैसे करें
  • भोजन की सुरक्षा और स्वच्छता का ध्यान कैसे रखें
  • पर्याप्त पानी पीने की आदत विकसित करें
  • नियमित शारीरिक गतिविधियों में हिस्सा लें
  • भोजन के समय स्वस्थ आदतें अपनाएं
  • अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें
  • स्वस्थ सामाजिक संबंध विकसित करें
  • पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार करें

इस पहल में अभिभावकों को भी शामिल किया जाएगा, ताकि स्कूल में विकसित स्वस्थ आदतों को बच्चों के घर और परिवार तक पहुंचाया जा सके।

स्कूलों पर अतिरिक्त बोझ नहीं

शिक्षा निदेशक सुश्री अंकिता आनंद ने कहा कि FWL का उद्देश्य स्कूलों पर एक और नया कार्यक्रम थोपना नहीं है। इसके बजाय पहले से चल रही विभिन्न गतिविधियों को एक साथ जोड़कर वेलबीइंग को स्कूल जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने पर जोर दिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि School Wellbeing Committees और School Wellbeing Scores के माध्यम से स्कूल अपनी वर्तमान स्थिति का आकलन कर सकेंगे, सुधार की जरूरत वाले क्षेत्रों की पहचान कर सकेंगे और समय-समय पर अपनी प्रगति की समीक्षा कर सकेंगे।

21 व्यक्तिगत आदतें और 14 कौशल होंगे शामिल

‘Eat Well • Live Well’ कार्यक्रम में 21 व्यक्तिगत आदतों, 7 सामाजिक कौशल और 7 पर्यावरणीय कौशल को शामिल किया गया है। इसका व्यापक उद्देश्य बच्चों को अपनी देखभाल, दूसरों की देखभाल और पर्यावरण की देखभाल के लिए तैयार करना है।

कार्यक्रम में किसी अतिरिक्त पाठ्यपुस्तक या परीक्षा का प्रावधान नहीं है। इसके बजाय बच्चों को छोटी बातचीत, व्यावहारिक गतिविधियों, दृश्य संकेतों और नियमित अभ्यास के माध्यम से स्वस्थ व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

विशेषज्ञों ने बताया शुरुआती उम्र में स्वस्थ आदतों का महत्व

फूड फ्यूचर फाउंडेशन के सीईओ श्री पवन अग्रवाल ने कहा कि बच्चों के लिए पढ़ना और संख्याओं के साथ काम करना सीखना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी भोजन, शरीर और मन की देखभाल, स्वस्थ संबंधों और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी को समझना भी है।

ICMR–National Institute of Nutrition की निदेशक डॉ. भारती कुलकर्णी ने कहा कि स्वस्थ खान-पान और जीवनशैली की आदतें जीवन के शुरुआती वर्षों में सबसे प्रभावी ढंग से विकसित होती हैं। उनके अनुसार, स्कूल बच्चों को इन आदतों को सीखने और रोजाना अभ्यास करने के लिए महत्वपूर्ण मंच प्रदान करते हैं।

वहीं IFPRI की Director for Strategies and Partnerships डॉ. पूर्णिमा मेनन ने कार्यक्रम के प्रमाण-आधारित दृष्टिकोण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह समझना जरूरी है कि बच्चों की आदतों और स्कूल के वातावरण में कितना सुधार हो रहा है और कार्यक्रम में समय के साथ किन बदलावों की आवश्यकता है।

Food Future Foundation कार्यक्रम के कार्यान्वयन से जुड़े शोध और प्रभाव आकलन के लिए IFPRI के साथ साझेदारी कर रहा है। पहल को ICMR–National Institute of Nutrition, Lady Irwin College और Institute of Home Economics, University of Delhi के विशेषज्ञों की जानकारी और अनुभव का भी लाभ मिला है। पूर्व में किए गए स्कूल पायलट कार्यक्रमों के अनुभवों को भी पहल में शामिल किया गया है।

शिक्षकों की भूमिका पर भी जोर

पोषण माह (Poshan Maah) के दौरान और शिक्षक दिवस से पहले शुरू की गई यह पहल बच्चों की आदतों और जीवनशैली को आकार देने में शिक्षकों की भूमिका को भी रेखांकित करती है।

शिक्षकों की भूमिका केवल ज्ञान प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे बच्चों को उस ज्ञान को रोजमर्रा की स्वस्थ और जिम्मेदार आदतों में बदलने के लिए भी प्रेरित कर सकते हैं।

इस पहल का मूल संदेश है कि FLN बच्चों में सीखने की नींव तैयार करता है, जबकि FWL बेहतर जीवन जीने की नींव मजबूत करता है। बच्चों के समग्र विकास के लिए दोनों ही महत्वपूर्ण हैं।

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