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वंदे मातरम् ने भारत के जनमानस को जगाया: प्रो. योगेश सिंह

रामलाल आनंद महाविद्यालय में वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर हुआ कार्यक्रम का आयोजन

  • वर्तमान के साथ अपने को भी सुधारना होता है: डॉ जिगर इनामदार
  • सूर्य और आशा की किरण अंधकार मिटा देती है: प्राचार्य प्रो. राकेश कुमार गुप्ता
राकेश नाथ 
नई दिल्ली। राष्ट्र गीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में दिल्ली विश्वविद्यालय के रामलाल आनंद महाविद्यालय में मंगलवार को भव्य समारोह का आयोजन किया गया। दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह इस समारोह के मुख्य अतिथि थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में महाविद्यालय अधिष्ठाता प्रो. बलराम पाणि, दक्षिणी परिसर की निदेशक प्रो. रजनी अब्बी, रजिस्ट्रार डॉ विकास गुप्ता और महाविद्यालय की गोवेर्निंग बॉडी के चेयरमैन डॉ जिगर इनामदार मौजूद रहे। इस अवसर पर कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने ‘राष्ट्र की चेतना का गान वंदे मातरम्‘ गीत की पंक्तियां उद्धृत करते हुए कहा कि वंदे मातरम् ने भारत के जनमानस को जगाने का काम किया है। 
 
                      कुलपति ने बीते 150 वर्षों का जिक्र करते हुए कहा कि यह संघर्ष के दिन रहे हैं। अंग्रेजों से छुटकारे के दिन रहे हैं। देश के बनने के दिन रहे हैं। इस भाव को आज की पीढ़ी को समझने की आवश्यकता है। आज की पीढ़ी इस बात का अच्छे से स्मरण करे, इसीलिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक वर्ष तक वंदे मातरम् का स्मरणोत्सव मनाने की मुहिम शुरू की है। संसद के दोनों सदनों में चर्चा हुई है, जिसे देश और दुनिया ने देखा है। कुलपति ने विद्यार्थियों को वंदे मातरम् का महत्व बताते हुए कहा कि जब भी राष्ट्र भक्ति की बात होगी वंदे मातरम का उल्लेख किया जाएगा। उन्होंने इसी सन्दर्भ में ‘जागृति’ और ‘आनंदमठ’ फिल्में देखने और महाविद्यालय में उनकी स्क्रीनिंग कराने का सुझाव दिया। उनका कहना था कि आज देश की चिंता कम लोग अपनी चिंता ज्यादा करते हैं। वंदे मातरम् इसके विपरीत देश और समाज को मजबूत बनाने का संदेश देता है। इस संदेश को मजबूती देने के लिए हम शिक्षकों पर बड़ी जिम्मेदारी है। हम जिस पीढ़ी को पढ़ा रहे हैं वह आजादी के 100 वर्ष पूरे होने के दौरान जिम्मेदार और बड़े पदों पर होगी। वह पीढ़ी देश को आगे ले जाएगी। प्रो. योगेश सिंह ने कहा कि विवि में रामलाल आनंद महाविद्यालय की विशिष्ट पहचान है। यह मूल्यों के संस्कार निभाने का महत्वपूर्ण केन्द्र है। यह विद्यार्थियों को अच्छा नागरिक बनाने का काम जिम्मेदारी से कर रहा है। अपना वक्तव्य पूरा करने के साथ कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने शिक्षकों और विद्यार्थियों को स्वदेशी सोच अपनाने की शपथ भी दिलाई।
                     रामलाल आनंद महाविद्यालय की गोवेर्निंग बॉडी के चेयरमैन डॉ जिगर इनामदार ने कहा कि इतिहास को याद करने के साथ हमें वर्तमान को सुधारना होता है। उसे सुधारने के साथ अपने को सुधारना होता है। हम अपने को ठीक करने के लिए कितना सोचते हैं। हमें जो जिम्मेदारी दी गई है उसे हम कितना प्रामाणिक ढंग से करते हैं। हमें जो काम दिया गया है उसे प्रामाणिकता से करें वही बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इससे पहले रामलाल आनंद महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. राकेश कुमार गुप्ता ने वंदे मातरम् के स्मरणोत्सव रूपी आयोजन में अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने दिल्ली विश्वविद्यालय को दिशा और गति देने का काम किया है। वह लगातार ऊंचाइयों की तरफ बढ़ रहा है। 
 
                      प्रो. राकेश गुप्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि कुलपति प्रो. योगेश सिंह के नेतृत्व में राम लाल आनंद महाविद्यालय में 80 स्थायी नियुक्तियां हुईं। पूरा महाविद्यालय एंयर कंडीशन है। सभी कक्ष स्मार्ट क्लास से लैस हैं। कौशल विकास के तहत दस स्किल सेन्टर काम कर रहे हैं। इसमें महाविद्यालय अधिष्ठाता प्रो. बलराम पाणि, दक्षिणी परिसर की निदेशक प्रो. रजनी अब्बी सहित सभी की भूमिका महत्वपूर्ण है। अंत में एनएसएस और एनसीसी के संयुक्त तत्वावधान में चलाए जा रहे ग्रीन कैम्पस-क्लीन कैम्पस अभियान की रिपोर्ट का विमोचन अतिथियों ने किया। विमोचन की औपचारिकता विश्वविद्यालय के एनएसएस अधिकारी डॉ नरेन्द्र विश्नोई और एनसीसी अधिकारी मेजर प्रो. संजय कुमार ने पूरी कराई। इस कार्यक्रम का संचालन विवि के एनसीसी अधिकारी मेजर प्रो. संजय कुमार ने किया। 
 
                             एम्फी थिएटर के ग्राउंड फ्लोर पर हुए इस समारोह में प्राचार्य प्रो. राकेश कुमार गुप्ता, उपप्राचार्य प्रो. प्रेरणा दीवान, कल्चर कमेटी की संयोजक प्रो. मुक्ता दत्ता मजूमदार, मेजर प्रो. संजय कुमार, स्टाफ एसोसिएशन की सचिव प्रो. वंदना गुप्ता, हिंदी पत्रकारिता के संयोजक प्रो. राकेश कुमार, शिक्षक प्रो. प्रदीप शर्मा, प्रो. अर्चना गौड़, प्रो. राजेश सचदेवा, प्रो. सीमा गुप्ता, डॉ रीटा जैन सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, कर्मचारी और विद्यार्थी मौजूद रहे।

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