हरियाणा: हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेवि), महेंद्रगढ़ में सात दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग द्वारा डूइंग सोशियोलॉजिकल रिसर्चः एन इंटरडिसिप्लिनरी पर्सपेक्टिव विषय पर 15 मार्च तक चलने वाली इस कार्यशाला के संबंध में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने कहा कि कार्यशाला के माध्यम से प्रतिभागियों को अनुसंधान प्रक्रिया से अपडेट होने व शैक्षणिक क्षेत्र में गुणवत्ता लाने के साथ शोध कार्य की एक स्पष्ट समझ रखने के लिए प्रेरित करेगा।
आजादी के अमृत महोत्सव अभियान के तहत आयोजित इस कार्यशाला में कुलपति ने कहा कि ऐसी कार्यशालाओं के माध्यम से विद्यार्थियों व शोधार्थियों को बाहरी विशेषज्ञों के रूबरू होने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि कार्यशाला प्रतिभागियों में नए विचारों एवं सूचनाओं के माध्यम से उनके ज्ञान में भी इजाफा करने में सहायक होगी। कुलपति ने शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को सुदृढ़ करने के लिए इस तरह के आयोजनों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि समाजशास्त्र अनुशासन स्वयं अंतःविषय है क्योंकि इसमें इतिहास, नवाचार, प्रौद्योगिकी, अर्थव्यवस्था और राजनीति के विषय शामिल हैं। इसलिए, इसका उपयोग सामाजिक नेटवर्क, सामाजिक परिवर्तन और समाज की सामाजिक संरचना को अधिक व्यापक रूप से देखने के लिए किया जा सकता है।
समाजशास्त्र विभाग के प्रभारी डॉ. टी. लोंगकोई ने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य अनुसंधान में सुधार और उन्नयन करना है। उन्होंने बताया कि इस कार्यशाला में विविध विषयों पर गहन चर्चा और गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। कार्यशाला का उद्देश्य पत्रिकाओं में लेखों के रूप में सामग्री प्रकाशित करने के लिए शोधकर्ताओं की क्षमताओं को तैयार करना भी है। समाजशास्त्र की सहायक आचार्य सुश्री तन्वी भाटी ने कहा कि विभाग अंतःविषय दृष्टिकोण के साथ मौलिक सामाजिक घटना के महत्वपूर्ण, अभिनव और अत्याधुनिक अनुसंधान की संस्कृति को बढ़ावा देना चाहता है। उन्होंने यह भी बताया कि विभाग विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों में शैक्षणिक, अनुसंधान, डिजिटल और महत्वपूर्ण आत्म-जागरूकता दक्षताओं को विकसित करने के लिए कार्यरत है। इससे विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सहयोग मिलेगा।