बठिंडा, 28 नवंबर: पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय में 48वाँ अखिल भारतीय नागरी लिपि सम्मेलन गुरुवार को अत्यंत गरिमामयी वातावरण में आरंभ हुआ। विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग एवं नागरी लिपि परिषद, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह द्वि-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी माननीय कुलपति प्रो. राघवेंद्र प्रसाद तिवारी के संरक्षण और मार्गदर्शन में हो रही है। उद्घाटन सत्र में कुलपति, आदेश विश्वविद्यालय बठिंडा कर्नल जगदेव करतार सिंह (से.नि.) मुख्य अतिथि, नागरी लिपि परिषद के महामंत्री डॉ. हरिसिंह पाल विशिष्ट अतिथि एवं नागरी लिपि परिषद के अध्यक्ष डॉ. प्रेम पातंजलि सारस्वत अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
सम्मेलन का शुभारंभ पौधों को जल अर्पण के साथ हुआ। इसके उपरांत सम कुलपति आचार्य किरण हजारिका ने स्वागत भाषण देते हुए सम्मेलन की अकादमिक और सांस्कृतिक महत्ता रेखांकित की। उन्होंने कहा कि नागरी लिपि के संरक्षण और संवर्धन के लिए देश–विदेश से एकत्रित विद्वानों का यह संगम भारतीय ज्ञान–परंपरा, भाषाई विरासत और राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि हिंदी विभागाध्यक्ष आचार्य राजेंद्र सेन और विभाग के शिक्षकों के नेतृत्व में संचालित यह सम्मेलन लिपिहीन एवं विलुप्तप्राय भाषाओं के लिए भी नए मार्ग प्रशस्त करेगा तथा नागरी लिपि के वैज्ञानिक और सर्वसुलभ स्वरूप को व्यापक पहचान दिलाएगा।
मुख्य अतिथि कर्नल जगदेव करतार सिंह (से.नि.) ने अपने संबोधन में कहा कि नागरी लिपि भारतीय संस्कृति, ज्ञान और एकात्मता की आधारशिला है तथा विभिन्न भारतीय भाषाओं को जोड़ने की अद्वितीय क्षमता रखती है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह सम्मेलन नागरी लिपि के संरक्षण, तकनीकी संभावनाओं और वैश्विक प्रसार पर नए दृष्टिकोण और विचारों को आकार देगा।
इस अवसर पर नागरी लिपि परिषद द्वारा पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय को विनोबा भावे पुरस्कार प्रदान किया गया, तथा लिपि संवर्धन में योगदान देने वाले कार्यकर्ताओं को परिषद के महामंत्री डॉ. हरिसिंह पाल एवं परिषद के अध्यक्ष डॉ. प्रेम पातंजलि द्वारा सम्मानित किया गया। साथ ही कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का लोकार्पण भी किया गया।
उद्घाटन सत्र के दौरान आकाशवाणी दिल्ली के पूर्व सह-निदेशक श्री अरुण कुमार पारसान ने “नागरी लिपि परिषद के लक्ष्य और उद्देश्य” विषय पर व्याख्यान दिया, जबकि डॉ. हरीसिंह पाल ने मुख्य विषय प्रवर्तन किया। सत्र में मंच संचालन डॉ. कुलभूषण शर्मा द्वारा किया गया।
दोपहर को आरंभ हुए द्वितीय सत्र में “सूचना प्रौद्योगिकी एवं नागरी लिपि” विषय पर ललित भूषण, चन्द्रकुमार रामसिंह और डॉ. नीरज कुमार पाण्डेय सहित वक्ताओं ने डिजिटल युग में नागरी लिपि की उपयोगिता और भविष्य की संभावनाओं पर विचार साझा किए। तृतीय सत्र, “राष्ट्रीय एकता में नागरी लिपि की भूमिका” पर केंद्रित रहा, जिसमें विभिन्न राज्यों के विशेषज्ञों ने भाषा और लिपि के माध्यम से सांस्कृतिक एकात्मता पर शोधपरक विमर्श प्रस्तुत किया। शाम को आयोजित परिषद महासभा की बैठक तथा सांस्कृतिक संध्या ने सम्मेलन के प्रथम दिवस को विशेष रूप से यादगार बना दिया। पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत नृत्य, संगीत एवं नाट्य प्रस्तुतियों ने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।
कार्यक्रम में देश भर से विद्वानों, शोधार्थियों, शिक्षकों और साहित्यकारों की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही। सम्मेलन का संचालन संयोजक डॉ. समीर महाजन और सह-संयोजक डॉ. दीपक कुमार पाण्डेय द्वारा किया जा रहा है। सम्मेलन का दूसरा दिन 29 नवंबर को पंचम सत्र से आरंभ होगा, जिसमें नागरी विमर्श सत्र, मूल्यांकन पंचायत, प्रमाणपत्र वितरण और सर्वभाषा कवि सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे।
Click Here for More Institutional Activities