नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले श्री गुरु नानक देव खालसा कॉलेज द्वारा “वैश्विक परिवर्तनों के मध्य राजनीति, अर्थव्यवस्था और मीडिया संस्कृति” विषय पर एक दिवसीय अंतर्विषयी अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी का संयुक्त रूप से आयोजन कॉलेज की सिविल, किरत तथा कलम सोसायटियों द्वारा किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ गुरबाणी शबद एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। राजनीति विज्ञान विभाग की सेमिनार संयोजिका डॉ. कमला ने प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए विषय की समकालीन प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। प्रबंध समिति के अध्यक्ष सरदार सुखबीर सिंह कालरा एवं कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. बलजीत सिंह ने विशिष्ट अतिथियों का स्वागत करते हुए इस शैक्षणिक पहल की सराहना की।
अपने उद्घाटन भाषण में डॉ. बलजीत सिंह ने कहा कि राजनीति, अर्थव्यवस्था और मीडिया वैश्विक विमर्श को दिशा देते हैं तथा शासन, शिक्षा और लोकनीति को गहराई से प्रभावित करते हैं। अर्थशास्त्र विभाग की सेमिनार संयोजिका डॉ. ममता आहूजा ने सभी विद्वानों का परिचय देते हुए ऐसे मंचों को बौद्धिक समृद्धि और छात्र सहभागिता के लिए अत्यंत आवश्यक बताया। मुख्य अतिथि प्रो. सुषमा यादव, यूजीसी की पूर्णकालिक सदस्य एवं बीपीएस महिला विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति तथा केंद्रीय विश्वविद्यालय हरियाणा और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय की पूर्व प्रो-वाईस चांसलर ने अपने उद्बोधन में कहा कि कक्षा और संगोष्ठियों का अंतिम उद्देश्य ज्ञान का विस्तार है, चाहे वह किसी भी भाषा में हो। उन्होंने बदलते वैश्विक परिदृश्य में उच्च शिक्षा और सामाजिक न्याय के संदर्भ में राजनीति, अर्थव्यवस्था और मीडिया की अंतर्संबद्ध भूमिका पर विचार व्यक्त किए। विशिष्ट अतिथि प्रो. अशोक मित्तल, पूर्व कुलपति डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय ने वैश्वीकरण के दौर में लोकतांत्रिक संस्थाओं में आए परिवर्तन तथा शासन व्यवस्था पर मीडिया संस्कृति के बढ़ते प्रभाव का विश्लेषण किया। हिलिंगडन (लंदन) की काउंसलर सुश्री कमलप्रीत कौर ने लोकनीति और सामाजिक उत्तरदायित्व पर अपने अंतरराष्ट्रीय अनुभव साझा किए। विशेष अतिथि प्रो. नीलम चौधरी, पूर्व विभागाध्यक्ष, एमडीयू रोहतक ने आधुनिक युग में वैश्विक परिवर्तनों का विश्लेषण प्रस्तुत किया। ऑस्ट्रेलिया से पधारे विशेष अतिथि श्री मिंटू बराड़ ने प्रवासी समाज और वैश्विक सामाजिक-राजनीतिक परिवर्तनों पर अपने अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण साझा कर संगोष्ठी को समृद्ध किया। सेमिनार एडवाइज़र प्रो. गोपीनाथ पिल्लई ने उद्घाटन सत्र में अपने समापन वक्तव्य में राजनीति, अर्थव्यवस्था और सोशल मीडिया के अंतर्संबंधों को रेखांकित करते हुए अंतर्विषयी संवाद की आवश्यकता पर बल दिया। संगोष्ठी में पंजाब विश्वविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय तथा आईआईएफटी सहित अनेक प्रतिष्ठित संस्थानों के विद्वानों ने सहभागिता की। चार समानांतर सत्रों में लगभग 40 शोधपत्र पंजाबी, हिंदी और अंग्रेज़ी भाषाओं में प्रस्तुत किए गए। शोध विषयों में वैश्वीकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मीडिया नैतिकता, प्रवासी साहित्य, ऊर्जा राजनीति, आर्थिक असमानता, बहुसांस्कृतिकता तथा सिनेमा में महिला प्रतिनिधित्व जैसे समकालीन मुद्दे शामिल थे। समापन सत्र में प्रो. अमनप्रीत गिल ने राजनीति, अर्थव्यवस्था और मीडिया को आधुनिक समाज की त्रिकोणीय संरचना बताया। पंजाबी विभाग की सेमिनार संयोजिका डॉ. सिमरन कौर सेठी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए कहा कि राजनीति का अंतिम उद्देश्य मानवता और नैतिक मूल्यों की सेवा होना चाहिए। यह संगोष्ठी वैश्विक परिवर्तनों पर सार्थक एवं गंभीर विमर्श का एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक मंच सिद्ध हुई।
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