नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले दौलत राम कॉलेज में कार्यरत कर्मचारियों के साथ हो रहे अन्याय एवं दमनात्मक कार्रवाई के विरोध में दिल्ली विश्वविद्यालय एंड कॉलेज कर्मचारी यूनियन (डूक्कू) ने कड़ा रोष व्यक्त करते हुए यहां प्रदर्शन किया।
यूनियन के प्रधान देवेंद्र शर्मा अनुसार कॉलेज में वर्ष 2001 से लाइब्रेरी में कार्यरत एक स्थायी कर्मचारी को अक्टूबर 2025 से बिना किसी वैध कारण के वेतन नहीं दिया जा रहा है, जबकि संबंधित कर्मचारी अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी मेहनत, लगन और ईमानदारी से कर रहा है। कॉलेज प्रशासन का तर्क है कि नियुक्ति के समय उसकी स्वीकृति यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन से नहीं ली गई थी। यूनियन का कहना है कि यह प्रशासनिक प्रक्रिया की जिम्मेदारी है, न कि कर्मचारी की। ऐसे आधार पर वेतन रोकना पूर्णतः अन्यायपूर्ण एवं अवैधानिक है। जब इस अन्याय के विरुद्ध कॉलेज कर्मचारी यूनियन ने आवाज उठाई, तो कॉलेज प्राचार्य ने प्रतिशोध की भावना से यूनियन के प्रधान दौलत सिंह रावत एवं सचिव अमित जमवाल को 23 फरवरी 2026 को निलंबित कर दिया। साथ ही संबंधित कर्मचारी का कॉलेज परिसर में प्रवेश भी प्रतिबंधित कर दिया गया। इस दमनात्मक कार्रवाई के विरोध में 27 फरवरी 2026 को विश्वविद्यालय एवं विभिन्न कॉलेजों के हजारों कर्मचारियों ने कॉलेज गेट पर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया। प्रशासन द्वारा कोई सकारात्मक संज्ञान न लेने के कारण यूनियन ने अपना धरना एक दिन और बढ़ाने का निर्णय लिया है।
यूनियन ने विश्वविद्यालय के कुलपति महोदय को पत्र लिखकर विभिन्न मांगें रखी है। यूनियन की मांग है कि कॉलेज प्राचार्य के विरुद्ध उच्च अधिकार प्राप्त जांच समिति का गठन किया जाए। वेतन रोके गए कर्मचारी को तत्काल बकाया वेतन सहित कार्य पर बहाल किया जाए। निलंबित यूनियन पदाधिकारियों का निलंबन तुरंत प्रभाव से वापस लिया जाए। प्राचार्य की कार्यप्रणाली एवं कथित अवैध प्रशासनिक निर्णयों की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाए। यूनियन ने स्पष्ट किया है कि जब तक कर्मचारियों को न्याय नहीं मिलेगा, आंदोलन जारी रहेगा।
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