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हकेवि में भारतीय भाषा उत्सव 2025 का समापन कविता पाठ और प्रदर्शनी के साथ

हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय, महेंद्रगढ़ में भारतीय भाषा उत्सव 2025 का समापन कविता पाठ, विशेषज्ञ व्याख्यान और साहित्यकारों की प्रदर्शनी के साथ हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय भाषाओं की समृद्धि, विविधता और सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देना रहा।

महेंद्रगढ़ :  हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेवि), महेंद्रगढ़ में राजभाषा अनुभाग व हिंदी विभाग द्वारा 04 दिसंबर से 11 दिसंबर तक भारतीय भाषा उत्सव 2025 एवं महाकवि सुब्रमण्यम भारती की जयंती के उपलक्ष्य में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया । आयोजन की इस श्रंृखला के अंतर्गत गुरुवार  को प्रशासनिक खण्ड के सम्मेलन कक्ष में विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन किया गया, जिसमें विशेष व्यक्ता डॉ. अनीश के. एन. सह आचार्य, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली उपस्थित रहे। विशेषज्ञ व्याख्यान के उपरान्त विश्वविद्यालय स्थित वाई-फाई चैक पर भारतीय साहित्कारों के चित्रों की प्रदर्शनी, पुस्तक प्रदर्शनी और भारतीय भाषाओं में विद्यार्थी, शोधार्थी, शिक्षक तथा शिक्षणेत्तर के लिए कविता पाठ का भी आयोजन किया गया । 

कार्यक्रम के संरक्षक और विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेशवर कुमार ने इस अवसर पर कहा कि भारतीय भाषा उत्सव का आयोजन न केवल भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषा और अन्य भारतीय भाषाओं के प्रति गर्व और सम्मान का भाव भी सिखाता है । इस उत्सव ने यह संदेश दिया कि हमें अपनी भाषाओं को जीवित रखना है, क्योंकि यही हमारी संस्कृति और पहचान की नींव हैं ।

हिंदी अधिकारी और हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. कमलेश कुमारी ने आयोजन में उपस्थित गणमान्यों का स्वागत करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता उसकी भाषाई विविधता है । भारत में सैकड़ों भाषाएँ और बोलियाँ बोली जाती हैं, जो न केवल संचार का माध्यम हैं बल्कि हमारी परंपराओं, साहित्य और सांस्कृतिक धरोहर की पहचान भी हैं । इसी बहुरंगी भाषाई परंपरा को सम्मान देने और नई पीढ़ी को इससे जोड़ने के उद्देश्य से भारतीय भाषा उत्सव का आयोजन किया गया। यह उत्सव भाषाओं के महत्व को रेखांकित करने के साथ-साथ सांस्कृतिक एकता का संदेश भी देता है।

भारतीय साहित्कारों के चित्रों की प्रदर्शनी और पुस्तक प्रदर्शनी प्रदर्शनी में हिंदी, बंगाली, तमिल, मराठी, गुजराती, पंजाबी, उर्दू और अन्य भारतीय भाषाओं के प्रमुख साहित्यकारों के चित्र लगाए गए । प्रत्येक चित्र के साथ संक्षिप्त जीवन परिचय और उनकी प्रमुख कृतियों का उल्लेख किया गया । महाकवि तुलसीदास, कबीर, सूरदास, मीराबाई से लेकर आधुनिक युग के प्रेमचंद, महादेवी वर्मा, जयशंकर प्रसाद, रामधारी सिंह ‘दिनकर’, रवीन्द्रनाथ ठाकुर और अन्य साहित्यकारों के चित्र विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। प्रदर्शनी में कुछ दुर्लभ चित्र भी शामिल थे, जिनमें साहित्यकारों के निजी जीवन की झलक दिखाई दी । विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विद्यार्थी, शोधार्थी, शिक्षक तथा शिक्षणेत्तर कर्मचारियों ने कविता पाठ किया ।

इस कार्यक्रम की संयोजक डॉ. रीना स्वामी ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया । इस अवसर पर जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के डॉ. अनीश के. एन. तथा हकेवि के विभिन्न विभागों के अध्यापक भी उपस्थित रहे । विश्वविद्यालय में इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारतीय भाषाओं की समृद्धि और विविधता को प्रदर्शित करना था। साथ ही, यह मंच विभिन्न भाषाओं के साहित्यकारों, कलाकारों और विद्यार्थियों को एक साथ लाकर संवाद और आदान-प्रदान का अवसर प्रदान करता है। उत्सव का संदेश स्पष्ट थाकृभाषा केवल अभिव्यक्ति का साधन नहीं, बल्कि हमारी पहचान और संस्कृति की आत्मा है ।

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