नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट महाविद्यालय ने अपनी स्थापना के 50 वर्ष पूर्ण कर लिए हैं। इस गौरवपूर्ण अवसर पर महाविद्यालय परिसर में ‘एलुमनाई मीट – होमकमिंग 26’ का सफल एवं उत्साहपूर्ण आयोजन किया गया।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 1973 में इस महाविद्यालय की स्थापना राम लाल आनंद महाविद्यालय (सांध्य) के रूप में हुई थी। महाविद्यालय के प्रथम बैच ने वर्ष 1976 में स्नातक की उपाधि प्राप्त की थी। वर्ष 2014 में महाविद्यालय पूर्णतः ‘डे कॉलेज’ में परिवर्तित हो गया, जिसके बाद इसका नाम बदलकर आर्यभट्ट महाविद्यालय कर दिया गया। वर्तमान में यह महाविद्यालय शिक्षा, शोध तथा विविध छात्र गतिविधियों के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है।
इस स्वर्णिम अवसर पर महाविद्यालय ने अपने पूर्व छात्रों (एलुमनाई) को आमंत्रित कर उनके पुराने संस्थान से जुड़ाव को पुनः जीवंत किया। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. मनोज सिन्हा ने कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए सभी आगंतुक पूर्व छात्रों और अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने महाविद्यालय की शैक्षणिक एवं अकादमिक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए संस्थान के बुनियादी ढांचे में हुए विस्तार की जानकारी भी साझा की।
कार्यक्रम के दौरान पूर्व छात्रों ने अपने अनुभव साझा किए और महाविद्यालय की प्रगति पर प्रसन्नता व्यक्त की। साथ ही उन्होंने भविष्य में संस्थान के विकास में अपनी सक्रिय सहभागिता की इच्छा भी व्यक्त की।
इस अवसर पर महाविद्यालय की म्यूजिक सोसायटी के विद्यार्थियों ने अपने मधुर गायन से उपस्थित अतिथियों का मन मोह लिया। संगीत, खेलकूद और स्वादिष्ट भोजन के साथ ‘एलुमनाई मीट – होमकमिंग 26’ का आयोजन हर्षोल्लास के वातावरण में संपन्न हुआ।
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