तनाव मुक्ति में मददगार है मनोविज्ञान का ज्ञान: प्रो. टंकेश्वर कुमार

 

विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित

डॉ. कृति भारती व प्रीति ने विशेषज्ञ वक्ता के रूप में किया संबोधित

नई दिल्ली : हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेवि), महेंद्रगढ़ के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने शुक्रवार को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर मनोविज्ञान विभाग की ओर से आयोजित एक दिवसीय कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अपने विचार व्यक्त किए बात करने से ही बात बनती है। तनाव आज के समय में ऐसी समस्या है जिससे मानव जीवन में हर व्यक्ति कभी न कभी दो-चार होता है और इससे बचाव के लिए जरूरी है कि आपसी संवाद की प्रक्रिया निरंतर जारी रहे। तनाव से मुक्ति की दिशा में मनोविज्ञान की भूमिका महत्वपूर्ण है और इस विषय के ज्ञान के सहारे हम तनाव से पीड़ित व्यक्ति को मरीज बनने से बचा सकते हैं। इसलिए बेहद आवश्यक है कि इस क्षेत्र में सक्रिय युवा व शिक्षक आगे आए और अपने ज्ञान के सहारे समाज में अपने आसपास बढ़ रहे तनाव को खत्म करने के लिए प्रयास करें। इस अवसर पर विशेषज्ञ वक्ता के रूप में इंडियन रिहेबलीटेशन साइक्लोजिस्ट व बाल अधिकार कार्यकर्त्ता डॉ. कृति भारती व पॉलिसी एडवोकेसी एंड गर्वेमेंट फैसीलिटेशन, पैलियम इंडिया की सुश्री प्रीति ने संबोधित किया।

विश्वविद्यालय के मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान पीठ के अंतर्गत आने वाले मनोविज्ञान विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम प्रथम सत्र में विद्यार्थियों व शोद्यार्थियों की ओर से विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों माध्यम से तनाव से मुक्ति के लिए ऑनलाइन व ऑफलाइन माध्यम से उपस्थिति प्रतिभागियों को प्रेरित किया गया। कार्यक्रम के दूसरे सत्र की शुरूआत विश्वविद्यालय के कुलगीत से हुई और इसके पश्चात पीठ के अधिष्ठाता डॉ. संजीव कुमार ने तनाव के कारण लोगों में बढ़ रही आत्महत्या की प्रवृति से बचाव की दिशा में प्रयास करने को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने इस के लिए आपसी सहयोग व संवाद की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। इसके पश्चात् विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने अपने संबोधन में कोरोना संकट और उससे पूर्व तनाव के चलते आम और खास के जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज के समय में हर कोई इससे ग्रस्त है इसलिए इससे बचाव के लिए मिलकर प्रयास करने होंगे। उन्होंने इस कार्य में मनोविज्ञान के विशेषज्ञों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि हमें इस समस्या से निदान के लिए विशेष प्रयास करने होंगे। कुलपति ने इस अवसर पर कहा कि यह एक ऐसा विषय है जो हर क्षे़त्र के विद्यार्थी के लिए उपयोगी है और इसके अध्ययन का अवसर सभी को मिलना चाहिए। इस क्रम में कुलपति ने विभाग को भी आगे आने और विद्यार्थियों, शिक्षकों व कर्मचारियों ही नहीं बल्कि समूची मानव जाति के लिए अपनी योग्यता व क्षमताओं के अनुरूप प्रयास करने के लिए प्रेरित किया।

इससे पहले विभाग के अध्यक्ष डॉ. वी.एन. यादव ने इस विषय पर अपनी बात रखी और बताया कि क्यों आज के समय में मनोवैज्ञानिक मोर्चे पर व्यक्ति को सबल बनाने की जरूरत है। कार्यक्रम की अन्य विशेषज्ञ वक्ताओं में शामिल डॉ. कृति भारती व सुश्री प्रीति ने अपने अनुभवों के आधार पर आत्महत्या की बढ़ती प्रवृति के कारणों और उनसे बचाव के लिए जरूरी प्रयासों पर विस्तार से प्रकाश डाला। इस एक दिवसीय कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया। जिनमें पोस्टर मेकिंग में स्टेफी मारिया व हरिद्र विवेक संयुक्त रूप से प्रथम, हरिता लक्ष्मी व अनुपम द्वितीय तथा आरती चौहान व मेरिन लिट्टी जॉन तृतीय स्थान पर रहे जबकि कविता पाठ में दीपक मलिक ने प्रथम स्थान हासिल किया। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने आत्महत्या रोकथाम से संबंधित अद्भुत प्रस्तुतियां भी दी। कार्यक्रम के अंत में विभाग के सहायक आचार्य डॉ. रितु शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर विभाग में सह आचार्य डॉ. पायल चंदेल, सहायक आचार्य डॉ. विष्णु नारायण कुचेरिया, डॉ. रवि प्रताप पांडे और डॉ. प्रदीप शर्मा सहित विभिन्न विभागों के शिक्षक, विद्यार्थी, शोद्यार्थी ऑनलाइन व ऑफलाइन माध्यम से शामिल हुए।