ओबीसी कमीशन ने दिल्ली यूनिवर्सिटी व विवेकानंद कॉलेज की प्रिंसिपल से 12 एडहॉक टीचर्स की नौकरी  खत्म करने पर जवाब मांगा 

 

   

  • * दिल्ली विश्वविद्यालय के विवेकानंद कॉलेज की प्रिंसिपल द्वारा कोरोना काल में 12 तदर्थ शिक्षकों की नौकरी खत्म करने के संदर्भ में टीचर्स फोरम ने एक विशेष याचिका दायर की थी

नई दिल्ली।  दिल्ली यूनिवर्सिटी एससी, एसटी ओबीसी टीचर्स फोरम ने दिल्ली विश्वविद्यालय के विवेकानंद कॉलेज की प्रिंसिपल द्वारा  कोरोना काल में 12 एडहॉक टीचर्स की नौकरी खत्म करने पर टीचर्स फोरम ने एक विशेष याचिका राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग में  दायर की थीं। दायर याचिका में बताया गया था कि इसमें 04 अन्य पिछड़ा वर्ग के शिक्षक व 03 अनुसूचित जाति के शिक्षक थे।आयोग के अवर सचिव जे. रविशंकर ने  सोमवार को दिल्ली यूनिवर्सिटी के कुलपति और विवेकानंद कॉलेज की प्रिंसिपल से 12 एडहॉक टीचर्स की नौकरी खत्म करने के संदर्भ में एक सप्ताह के अंदर जवाब देने को कहा है।

               टीचर्स फोरम के चेयरमैन डॉ. कैलास प्रकाश सिंह व महासचिव डॉ. हंसराज 'सुमन' ने बताया है कि फोरम की ओर से विवेकानंद कॉलेज के एडहॉक टीचर्स ने उन्हें पत्र लिखा था जिस पर फोरम ने यह याचिका दायर की थीं। आयोग के अवर सचिव ने दिल्ली यूनिवर्सिटी व विवेकानंद कॉलेज को लिखे पत्र में बताया है कि राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संविधान की धारा 338 बी के तहत बनाया गया है। इस धारा के तहत कहा गया है कि किसी की नौकरी  या किसी तरह से नुकसान पहुंचाया जाएगा तो यह आयोग उसको सुरक्षा प्रदान करेगा।साथ ही शिकायतकर्त्ता की सुरक्षा के लिए आयोग को सिविल कोर्ट के अनुरूप इसको पावर दी गई है।

         डॉ. सिंह व डॉ. सुमन ने बताया है कि दिल्ली विश्वविद्यालय व विवेकानंद कॉलेज को  सोमवार को भेजे गएआयोग के द्वारा पत्र में आवश्यक कार्यवाही करते हुए 7 दिन के अंदर जवाब मांगा गया है। साथ ही इस आदेश के तहत 12 एडहॉक टीचर्स  के मामले पर दिल्ली विश्वविद्यालय/कॉलेज अपनी स्पष्ट रिपोर्ट राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को जमा नहीं कर देता उस पर स्टे (रोक लगा दिया ) है ।

           टीचर्स फोरम ने आयोग के चेयरमैन के संज्ञान में  विवेकानंद कॉलेज की प्रिंसिपल द्वारा कोरोना काल में विभिन्न विभागों में कार्यरत्त 12 तदर्थ शिक्षकों की नौकरी खत्म किए जाने की ओर ध्यान आकर्षित कराया था । उन्हें बताया गया था कि  इन 12 तदर्थ शिक्षकों में 5 तदर्थ शिक्षक कोरोना महामारी से पीड़ित हैं। इनका परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहा है, गलत तरीके से नौकरी खत्म कर दिए जाने से इनकी हालत और खराब हो गई है। ये शिक्षक प्रिंसिपल व कॉलेज के चेयरमैन से गुहार लगा चुके हैं। लेकिन कहीं भी इनकी सुनवाई नहीं हुई।  इनमें 3 एससी और 4 ओबीसी समुदाय के शिक्षक हैं। ये शिक्षक लम्बे समय से काॅलेज में पढ़ा  रहे हैं, काॅलेज में वर्कलोड होने के बावजूद बिना किसी कारण के इनकी नौकरी खत्म कर दी गई है। 

               फोरम के चेयरमैन ने उन्हें बताया था कि विवेकानंद कॉलेज में लंबे समय से विभिन्न विभागों में जैसे—कॉमर्स-02, इकोनॉमिक्स-01, इंग्लिश-03, कम्प्यूटर साइंस-02, संस्कृत-01, फूड टेक्नोलॉजी-01, मैथमेटिक्स-01, इन्वायरमेंट साइंस-01 में एडहॉक टीचर्स के रूप में कार्यरत्त थे। इनमें 3 तदर्थ शिक्षक अनुसूचित जाति और 4 अन्य पिछड़ा वर्ग के अतिरिक्त 5 सामान्य वर्गों के शिक्षक है।  इन 12 तदर्थ शिक्षकों का कार्यकाल 29 अप्रैल 2021 तक था। 30 अप्रैल को इन्हें फिर से पुनर्नियुक्ति पत्र (रिज्वाईनिंग लेटर) दिया जाना था लेकिन विवेकानंद कॉलेज की प्रिंसिपल ने 29 अप्रैल को ही इन 12 तदर्थ शिक्षकों की नौकरी खत्म कर दी, साथ ही यह निर्देश भी जारी कर दिया कि इनका बकाया वेतन तभी दिया जाए जब ये कॉलेज से क्लियरेंस ले ले। 

         टीचर्स फोरम इस ज्ञापन के माध्यम से आयोग के चेयरमैन से अनुरोध किया था कि विवेकानंद कॉलेज में लंबे समय से पढ़ा रहे तदर्थ शिक्षकों का बार-बार इंटरव्यू ना कराया जाए, साथ ही 5 दिसंबर 2019 के शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी सर्कुलर को लागू करते हुए जब तक स्थायी नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती तब तक किसी भी तदर्थ शिक्षक को उनके पदों से नहीं हटाया जाए।12 एडहॉक टीचर्स को इस कोरोना काल में हटाए जाने पर आयोग ने दिल्ली यूनिवर्सिटी व कॉलेज से जवाब मांगा है।