शहरी व ग्रामीण विकास में इंजीनियर्स की भूमिका महत्वपूर्णः प्रो. आर.सी. कुहाड़

  • -हकेवि में प्रोग्रेसिव कंस्ट्रक्शन टेक्नोलॉजीज विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित
  • -इंस्टिट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) और इंडियन वाटर रिसोर्स सोसाइटी के सहयोग से हुआ ऑनलाइन आयोजन

महेंद्रगढ़. इंजीनियरिंग का महत्त्व आज विकास के नए आयामों को स्थापित करने और विश्व के समक्ष उपलब्ध चुनौतियों के समाधान के लिए बेहद निर्णायक हो चला है। हम सभी में एक इंजीनियर उपलब्ध है जोकि हमें बचपन से किसी न किसी प्रकार की निर्माण की प्रक्रिया से जोड़े रखता है। जहाँ तक बात तकनीकी स्तर पर इंजीनियरिंग की समझ की है तो आज ग्रामीण व शहरी विकास में इंजीनियर्स की भूमिका सबसे अहम हो गई है। इंजीनियर्स विकास के साथ-साथ मानव जाति के समक्ष उपलब्ध विभिन्न चुनौतियों का समाधान देने के लिए निरंतर प्रयासरत है। यह कहना है हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेवि), महेंद्रगढ़ के कुलपति प्रो. आर.सी. कुहाड़ का। उन्होंने यह विचार शनिवार को विश्वविद्यालय में प्रोग्रेसिव कंस्ट्रक्शन टेक्नोलॉजीज विषय पर आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए व्यक्त किये।

कुलपति ने इस अवसर पर कहा कि हम बचपन से ही रेत व मिट्टी से घर व अन्य निर्माण करने लगते है जो हम सभी में मौजूद एक इंजीनियर के गुण का परिचायक है। कुलपति ने कहा कि आज के समय में इस क्षेत्र का काफी विस्तार हो चुका है इसलिए अब इंजीनियरिंग की भी अलग-अलग विशेषज्ञता आधारित शाखाएँ अध्ययन के लिए उपलब्ध है। इनमें सिविल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, कंप्यूटर इंजीनियरिंग और प्रिंटिंग एंड पैकेजिंग टेक्नोलॉजी के नाम शामिल है। प्रो. कुहाड़ ने इस अवसर पर रियल एस्टेट, अर्बन डेवलपमेन्ट व रूरल डेवलपमेन्ट के संबंध में भी बताया। कुलपति ने कहा कि स्मार्ट सिटी मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना आदि ऐसे प्रयास है जोकि इंजीनियरिंग के माध्यम से देश को विकास के पथ पर ले जा रहे हैं। उन्होंने विकास के साथ-साथ इंजीनियरिंग की मदद से जल संकट के निदान, अपशिष्ट प्रबंधन और ग्लोबल वार्मिंग जैसी चुनौतियों के निदान के लिए किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया। प्रो. कुहाड़ ने कहा कि अवश्य ही इस आयोजन में शामिल विशेषज्ञ विद्यार्थियों को इस क्षेत्र की बारीकियों को समझने में सहयोग देंगे।

इंस्टिट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) और इंडियन वाटर रिसोर्स सोसाइटी के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला को एमईडी डिपार्टमेंट के उपाध्यक्ष व विभागाध्यक्ष इंजीनियर अशोक बंसल ने अतिथि वक्ता के रूप में सम्बोधित किया और मानव शरीर से इंजीनियरिंग की कार्यप्रणाली का तुलनात्मक विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बहुमंजिला इमारतों में सर्विस के विकास पर भी अपने विचार व्यक्त किए। इसी कड़ी में डॉ. एम.दिनेश कुमार, एग्जीक्यूटिव डारेक्टर, इंस्टिट्यूट फॉर रिसर्च एनालिसिस एन्ड पॉलिसी, हैदराबाद ने जल सुरक्षा के विषय पर प्रकाश डाला और उसके लिए आवश्यक प्रयासों की जानकारी दी। इस ऑनलाइन कार्यशाला की शुरुआत विश्वविद्यालय के कुलगीत से हुई। इसके बाद विश्वविद्यालय की अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी पीठ के अधिष्ठाता डॉ. अजय बंसल ने कार्यशाला के महत्व पर प्रकाश डाला। इसी कड़ी कार्यशाला के आयोजक सिविल इंजीनियरिंग विभाग के अध्यक्ष डॉ. विकास गर्ग ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत की। कार्यशाला के अंत में विभाग के शिक्षक डॉ. नीरज कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। इस कार्यशाला के आयोजन में डॉ. विकास व इंजीनियर दीपक ने विशेष सहयोग दिया। आयोजन में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षक, विद्यार्थी व शोधार्थी शामिल हुए।