स्कूलों को भ्रमित करने वाला आदेश तुरन्त वापिस हो : जैन

नई दिल्ली। दिल्ली स्टेट पब्लिक स्कूल्स मैनेजमेंट्स एसोसियशन के अध्यक्ष  आर. सी. जैन ने कहा है कि उत्तरी दिल्ली नगर निगम द्वारा बच्चों के बैंक खाता नंबर मांगे जाने से स्कूलों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने कहा कि निगम का शिक्षा विभाग  लापरवाही से काम  कर रहा है।   4 फरवरी 2021 को शिक्षा विभाग के सभी क्षेत्रिय कार्यालयों से मांगी गयी जानकारी निगम की लापरवाही का उदाहरण है। 
         दिल्ली स्टेट पब्लिक स्कूल्स मैनेजमेंट्स एसोसियशन के अध्यक्ष  आर. सी. जैन ने बताया कि  मुफ्त व अनिवार्य  शिक्षा अधिकार कानून-2009 के अनुसार दिल्ली के सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों को 25 प्रतिषत बच्चों को अर्थात् 100 बच्चों में से 25 बच्चों को मुफ्त पढ़ाना होता है जिसकी एवज में सरकार स्कूलों को फीस व वर्दी का पैसा देती है। वर्तमान समय में स्कूलों को अधिकतम प्रतिछात्र प्रतिमाह शिक्षा सत्र 2011-12 और 2012-13 में 1190 रू., वर्ष 2013-14 और 2014-15 में 1290 रू. तथा 2015-16 से 2017-18 तक 1598 रू. प्रतिमाह और 2018-19 से वर्ष 2019-20 के लिये 26908 रू. (प्रतिवर्ष पांचवी तक के बच्चों के लिये) तथा 1100 रू. वर्दी के लिये, इसी तरह 26708 रू. प्रतिवर्ष   1400 रू. वर्दी के लिये  (कक्षा 6 से 8 तक के बच्चों की) या इससे स्कूल द्वारा फीस देने वाले बच्चों से ली गयी फीस (जो भी कम हो) स्कूलों को दी जाती है। पिछले काफी समय से स्कूल संघर्ष कर रहे हैं। जिसके लिए दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाना पड़ा। तीनों नगर निगमों ने अभी तक किसी भी स्कूल को ई.डब्ल्यू.एस./ डी.जी. बच्चों की फीस वापिस नहीं की है। उत्तरी दिल्ली नगर निगम द्वारा स्कूलों से बच्चों के बैंक खाता नं. एम. आई. सी. आर. नम्बर/आई. एफ. एस. सी कोड़ मांगने से लगता है कि सरकार फीस की रकम सीधे बच्चों के खातो में डालना चाहती है। जबकि ऐसा कोई कानूनी प्रावधान अभी तक नहीं है कि ई.डब्ल्यू.एस./डी.जी. की फीस सीधे बच्चों के खाते में जायेगी। 
             सरकार ऐसा वर्ष 2021-22 से करेगी तो स्कूल प्रबन्धन इसका स्वागत करेगा। परन्तु जो बच्चें स्कूलों से पढ़कर जा चुके हैं या अभी पढ़ रहे है तो उनसे स्कूल 2010-11 से अब तक कैसे फीस ले पायेगा। इस आदेष में यह नहीं बताया गया कि षिक्षा सत्र-2010-11 में जो बच्चे ई.डब्ल्यू.एस. में दाखिल हुये थे उनकी फीस स्कूलों को क्यों नहीं दी जायेगी क्योंकि मुफ्त व अनिवार्य शिक्षा अधिकार कानून-2009 एक अप्रैल 2010 से स्कूलों में लागू हुआ हो। साथ ही दिल्ली सरकार के अपने आदेष में छठ़ी से आठ़वी तक के बच्चों को 1400/- प्रतिवर्ष वर्दी की राषि देने की बात को नहीं बताया।
           दिल्ली स्टेट पब्लिक स्कूल्स मैनेजमेंट्स एसोसियसन के अध्यक्ष श्री आर. सी. जैन ने बताया कि इस आदेष के बाद उत्तरी दिल्ली नगर निगम में पांचवी तक मान्यता प्राप्त स्कूलों के सामने भ्रम की स्थिति बनी हुयी है कि यदि ई.डब्ल्यू.एस./डी.जी. छात्रों का वर्ष 2010-11 से अब तक सारा पैसा उनके खातों में चला गया तो स्कूलों को अपनी फीस को पाना मुष्किल हो जायेगा पहले ही स्कूल ऐसे बच्चों की काॅपी किताब व वर्दी पर पिछले 9 वर्षों से लाखों रूपये जेब से खर्च कर चुका है। कोरोना काल में बच्चों की फीस आ नहीं रही इस पर उत्तरी दिल्ली नगर निगम का आदेश स्कूलों को बड़ा झटका होगा। श्रीे आर. सी. जैन ने उत्तरी दिल्ली नगर निगम महापौर व निगम षिक्षा समिति के अध्यक्ष से मांग की है कि इस पर तुरन्त कार्यवाही हो।