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आई पी कॉलेज दिल्ली युनिवर्सिटी में एक दिवसीय ट्रांसजेंडर जागरूकता कार्यक्रम का हुआ आयोजन

"ट्रांसजेंडर अधिकार एवं संरक्षण अधिनियम 2019 एवं नियम 2020" पर एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम

 

नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के इंद्रप्रस्थ महिला महाविद्यालय (आई पी कॉलेज )में समाजशास्त्र विभाग और राष्ट्रीय सामाजिक रक्षा संस्थान NISD के संयुक्त तत्वावधान में "ट्रांसजेंडर अधिकार एवं संरक्षण अधिनियम 2019 एवं नियम 2020" पर एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस सत्र में विधि, समाजशास्त्र विभाग आई पी कॉलेज और सामाजिक कार्य के क्षेत्र में अग्रणी विद्वानों ने भाग लिया और ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकार, सामाजिक स्वीकृति और संवैधानिक सुरक्षा पर विस्तार से चर्चा की।
         कार्यक्रम में डॉ. राजेश (दिल्ली विश्वविद्यालय), डॉ. सीमा सिंह (विधि संकाय, दिल्ली विश्वविद्यालय), डॉ. प्रमोद कुमार (अध्यक्ष, दामिनी एनजीओ), डॉ. पवन कुमार एससीईआरटी दिल्ली, डॉ. गीता मिश्रा (दिल्ली विश्वविद्यालय) सहित कई विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। मुख्य अतिथि डॉ. आर. गिरिराज (राष्ट्रीय सामाजिक रक्षा संस्थान) ने इस विषय पर विशेष ज़ोर दिया कि "भारत की परंपरा में समावेशिता का विशेष स्थान रहा है और आज का यह प्रयास उसी भावना को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक सार्थक कदम है।"
          भारतीय संस्कृति ने सदैव 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' की भावना को आत्मसात किया है। महाभारत में शिखंडी, कक्कयण काव्य में किन्नर चरित्र, तथा भारतीय राजदरबारों में हिजड़ा समुदाय की ऐतिहासिक भूमिका यह दर्शाती है कि समाज में उनकी उपस्थिति कोई नवीन अवधारणा नहीं है। परंतु औपनिवेशिक काल में इस समुदाय को सामाजिक हाशिए पर धकेल दिया गया।
          वर्तमान सरकार द्वारा पारित ट्रांसजेंडर संरक्षण अधिनियम 2019 भारत की प्राचीन समावेशी परंपराओं और आधुनिक संवैधानिक मूल्यों के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु का निर्माण करता है। वक्ताओं ने इस कानून के तहत मिलने वाले अधिकारों, रोजगार अवसरों और सामाजिक सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला।
         इंद्रप्रस्थ महिला महाविद्यालय, जो शिक्षा और सामाजिक प्रबोधन के लिए सदैव अग्रणी रहा है, इस आयोजन के माध्यम से समानता, समावेशिता और सामाजिक न्याय की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। कॉलेज की प्राचार्या प्रो. पूनम कुमरिया के नेतृत्व में यह संस्थान छात्राओं को न केवल शिक्षा प्रदान कर रहा है, बल्कि उन्हें सामाजिक बदलाव का सशक्त माध्यम भी बना रहा है। छात्राओं ने इस सत्र में उत्साहपूर्वक भाग लिया और जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि समावेशी समाज ही आत्मनिर्भर भारत की नींव रख सकता है। यह न केवल विधिक सुधार है, बल्कि एक नए सामाजिक संवाद की शुरुआत भी है, जो भारत की परंपराओं को सुदृढ़ करते हुए आधुनिकता से जोड़ता है।
          इंद्रप्रस्थ महिला महाविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय का यह कार्यक्रम न केवल जागरूकता बढ़ाने का माध्यम बना, बल्कि इसने एक ऐसा संवाद स्थापित किया जो समाज को अधिक समावेशी और न्यायसंगत बनाने की दिशा में प्रेरित करता है।
        कार्यक्रम के संयोजक और समाजशास्त्र विभाग के प्रमुख डॉ जे पी सिंह ने यह कहा कि समाज और परिवार दोनों को इस व्यवस्था को सही करने के लिए आगे आना होगा, अंत में डॉ जे पी सिंह ने सभी का धन्यवाद किया और सभी को इस कार्यक्रम में आने के लिए उनका आभार प्रकट किया

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