नई दिल्ली, : इन्फोसिस साइंस फाउंडेशन (ISF) ने आज छह श्रेणियों - इकोनॉमिक्स, इंजीनियरिंग एंड कंप्यूटर साइंस, ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज, लाइफ साइंसेज, मैथमेटिकल साइंसेज और फिजिकल साइंसेज के क्षेत्र में इन्फोसिस प्राइज 2024 के विजेताओं के नाम का एलान किया। 2009 में शुरुआत के बाद से ही इन्फोसिस प्राइज के तहत भारत को प्रभावित करने वाले विभिन्न वैज्ञानिक शोध एवं विद्वता में उल्लेखनीय योगदान देने वालों की उपलब्धियों का सम्मान किया जा रहा है। प्रत्येक श्रेणी में पुरस्कार के अंतर्गत एक स्वर्ण पदक, प्रशस्ति पत्र और 1,00,000 डॉलर (या इसके बराबर भारतीय मुद्रा) की राशि प्रदान की जाती है। पुरस्कार समारोह का आयोजन बेंगलुरु स्थित आईएसएफ के कार्यालय में किया गया।
इन्फोसिस प्राइज 2024 के विजेताओं को ज्यूरी सदस्यों के एक अंतरराष्ट्रीय पैनल द्वारा चुना गया। इस पैनल में वैश्विक स्तर पर ख्यातिप्राप्त विद्वान एवं विशेषज्ञ शामिल थे। पिछले 15 वर्षों में आईएसएफ ने मानव जीवन के विभिन्न पहलुओं में योगदान देने वाले कुछ बेहतरीन शोध और विद्वता को सम्मानित किया है। 2024 के पुरस्कार में एक नई दिशा की ओर बढ़ते हुए 40 साल से कम उम्र के शोधकर्ताओं को सम्मानित करने का निर्णय किया गया, जिससे प्रतिभाओं को कम उम्र में पहचान दिलाने की जरूरत पर जोर दिया जा सके।
इन्फोसिस प्राइज 2024 के विजेताओं के नामों की घोषणा आईएसएफ के ट्रस्टियों श्री क्रिस गोपालकृष्णन (प्रेसिडेंट, बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज), श्री नारायण मूर्ति, श्री के. दिनेश, डॉ. प्रतिमा मूर्ति, श्री मोहनदास पई और श्री एस.डी. शिबूलाल ने की। आईएसएफ के अन्य ट्रस्टियों श्री नंदन नीलेकणि, श्री श्रीनाथ बटनी और श्री सलिल पारेख ने भी इस साल के पुरस्कार विजेताओं को अपनी शुभकामनाएं दीं।
इन्फोसिस प्राइज विज्ञान एवं अनुसंधान के क्षेत्र में उत्कृष्टता को सम्मानित करने वाला भारत का सबसे बड़ा पुरस्कार है। इसके अलावा, इन्फोसिस प्राइज के विभिन्न विजेताओं ने कई अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त किए हैं। इनमें नोबेल प्राइज (अभिजीत बनर्जी एवं एस्थर डुफ्लो), फील्ड्स मेडल (मंजुल भार्गव एवं अक्षय वेंकटेश), डैन डेविड प्राइज (संजय सुब्रमण्यम), मैकआर्थर ‘जीनियस’ ग्रांट (सुनील अमृत), ब्रेकथ्रू प्राइज इन फंडामेंटल फिजिक्स (अशोक सेन) और मारकोनी प्राइज (हरि बालकृष्णन) जैसे नाम शामिल हैं। कई पुरस्कार विजेताओं को रॉयल सोसायटी का फेलो भी चुना गया है। इनमें गगनदीप कांग भी शामिल हैं, जो रॉयल सोसायटी की फेलो चुनी जाने वाली पहली भारतीय महिला बनी हैं।
इन्फोसिस साइंस फाउंडेशन के प्रेसिडेंट क्रिस गोपालकृष्णन ने कहा, ‘इन्फोसिस प्राइज ने ऐसे प्रतिभाशाली लोगों को पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिनका योगदान शोध एवं विज्ञान के भविष्य को आकार दे रहा है। इस साल हमने इस पुरस्कार को 40 साल से कम उम्र के शोधकर्ताओं पर फोकस किया, जिससे उनकी क्षमताओं को पहचान मिले और उल्लेखनीय काम सामने आएं। इन्फोसिस साइंस फाउंडेशन की ओर से मैं इन्फोसिस प्राइज 2024 के सभी विजेताओं को दिल से बधाई देता हूं। उनकी उपलब्धियां विज्ञान एवं समाज के बीच महत्वपूर्ण संबंध की झलक दिखाती हैं, जिससे इनोवेटर्स की नई पीढ़ी प्रोत्साहित होगी।’
छह श्रेणियों में इन्फोसिस प्राइज 2024 के विजेता निम्नलिखित हैं:
इकोनॉमिक्स (अर्थशास्त्र)
अरुण चंद्रशेखर
इकोनॉमिक्स की श्रेणी में इन्फोसिस प्राइज 2024 के लिए स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर अरुण चंद्रशेखर को चुना गया है। उन्हें इनोवेटिव डाटा सेट्स का प्रयोग करते हुए सामाजिक एवं आर्थिक नेटवर्क के अध्ययन में सहयोग करने और मशीन लर्निंग एवं कंप्यूटर साइंस की मदद थ्योरिटिकल मेथड बनाने के लिए यह पुरस्कार प्रदान किया गया है। कर्नाटक के कई गांवों से नेटवर्क डाटा को लेकर अरुण चंद्रशेखर के कलेक्शन एवं मैपिंग से डेवलपमेंट इकोनॉमिक्स से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रश्नों का जवाब पाने में मदद मिली। प्रोफेसर चंद्रशेखर के काम से मॉडर्न इकोनॉमी की फंक्शनिंग में नेटवर्क की भूमिका को समझने में मदद मिली। उनका काम बेहतर नीतियों के निर्माण के लिए अहम है।
इंजीनियरिंग एंड कंप्यूटर साइंस
श्याम गोलकोटा
इंजीनियरिंग एंड कंप्यूटर साइंस की श्रेणी में इन्फोसिस प्राइज 2024 यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन के स्कूल ऑफ कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग के प्रोफेसर श्याम गोलकोटा को प्रदान किया गया है। उन्हें सामाजिक रूप से अहम कई इंजीनियरिंग के क्षेत्र में प्रभावी शोध एवं टेक्नोलॉजी के प्रयोग के लिए यह पुरस्कार मिला है। उनके कार्यों में निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों के लिए स्मार्टफोन आधारित किफायती हेल्थकेयर टूल्स तैयार करना, बैटरी-फ्री कंप्यूटिंग एवं कम्युनिकेशन और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की मदद से ह्यूमन ऑडिटरी सेंसिंग का ऑग्मेंटेशन करना शामिल हैं।
ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज (मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान)
महमूद कूरिया
यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबरा के स्कूल ऑफ हिस्ट्री, क्लासिक्स एंड आर्कियोलॉजी के लेक्चरर महमूद कूरिया को ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज के क्षेत्र में इन्फोसिस प्राइज 2024 के लिए चुना गया है। पूर्व आधुनिक एवं शुरुआती आधुनिक काल में विशेषरूप से केरल को केंद्र में रखते हुए वैश्विक नजरिये से मैरीटाइम इस्लाम के अध्ययन में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें यह पुरस्कार दिया गया है। उनके इस अध्ययन से हिंद महासागर के तटीय क्षेत्रों में अर्थव्यवस्था, राजनीति एवं सांस्कृतिक बदलावों को आकार देने में इस्लामिक कानून की भूमिका सामने आई है।
लाइफ साइंसेज
सिद्धेश कामत
लाइफ साइंसेज की श्रेणी में इन्फोसिस प्राइज 2024 इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च, पुणे के डिपार्टमेंट ऑफ बायोलॉजी के एसोसिएट प्रोफेसर सिद्धेश कामत को प्रदान किया गया है। बायोएक्टिव लिपिड्स एवं उनके रिसेप्टर्स और उनके मेटाबोलिक एवं सिग्नलिंग पाथवे की खोज के लिए उन्हें यह पुरस्कार दिया गया है। एडवांस्ड तरीकों का प्रयोग करते हुए कोशिकाओं के प्रमुख हिस्से लिपिड्स के फंक्शन को समझने की दिशा में उनके शोध ने कई तरह के सेल्युलर फंक्शन व मनुष्यों में होने वाली बीमारियों में इन मॉलीक्यूल्स की भूमिका को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
मैथमेटिकल साइंसेज (गणितीय विज्ञान)
नीना गुप्ता
इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट, कोलकाता के थ्योरिटिकल स्टैटिस्टिक्स एंड मैथमेटिक्स यूनिट की प्रोफेसर नीना गुप्ता को मैथमेटिकल साइंसेज की श्रेणी में इन्फोसिस प्राइज 2024 दिया गया है। उन्हें यह पुरस्कार जारिस्की कैंसलेशन प्रोब्लम पर उनके काम के लिए प्रदान किया गया है। इसे आलजेब्रिक ज्योमेट्री की फंडामेंटल प्रोब्लम माना जाता है, जिसे सबसे पहले 1949 में आधुनिक आलजेब्रिक ज्योमेट्री के संस्थापकों में से एक ऑस्कर जारिस्की ने सामने रखा था। 2014 में नीना गुप्ता ने सिद्ध किया कि असानुमा की 3 डायमेंशनल एफाइन वैरायटी पॉजिटिव कैरेक्टरिस्टिक में जारिस्की के ओरिजिनल कैंसलेशन प्रोब्लम के लिए एक निगेटिव नतीजा देती है।
फिजिकल साइंसेज (भौतिक विज्ञान)
वेदिका खेमानी
फिजिकल साइंसेज की श्रेणी में इन्फोसिस प्राइज 2024 स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के फिजिक्स डिपार्टमेंट की एसोसिएट प्रोफेसर वेदिका खेमानी को प्रदान किया गया है, जिन्होंने थ्योरिटिकल एवं एक्सपेरिमेंटल नॉन-इक्विलिब्रियम क्वांटम मैटर के मामले में व्यापक एवं उल्लेखनीय योगदान दिया है। इसमें टाइम क्रिस्टल्स की खोज सबसे उल्लेखनीय है। इससे भविष्य में क्वांटम कंप्यूटिंग और अन्य टेक्नोलॉजी के विकास में बड़ा योगदान मिल सकता है।
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