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तीन दिवसीय बाल रंगमंच महोत्सव में हुआ 12 नाटकों का मंचन

उड़ान व IGNCA द्वारा आयोजित बाल रंगमंच महोत्सव में 12 नाटकों के माध्यम से बच्चों ने मनोरंजन के साथ सामाजिक संदेश दिए। बच्चों की प्रतिभा ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध , महोत्सव में स्लम के बच्चों ने पुण्यशलोक अहिल्याबाई का मंचन कर किया आर्शचयचकित

नई दिल्ली। उड़ान – द सेंटर ऑफ थिएटर आर्ट एंड चाइल्ड डवलपमेंट एवं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित तीन दिवसीय बाल रंगमंच महोत्सव में नन्हें कलाकारों की प्रतिभा ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। रंगकर्मी संजय टुटेजा के दिशा निर्देश में हुए इस मेगा महोत्सव में कुल 12 नाटकों का मंचन किया जिनके माध्यम से बच्चों ने जहां दर्शकों को हंसाया व रुलाया वहीं सामाजिक कुरीतियों को दूर करने का संदेश भी दिया।

        इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र  के समवेत सभागार में आयोजित तीन दिवसीय बाल रंगमंच महोत्सव ने राजधानी के रंगमंच प्रेमियों को भावविभोर कर दिया। इस महोत्सव का उद्घाटन डॉ. सच्चिदानंद जोशी, सदस्य सचिव, आईजीएनसीए ने दीप प्रज्वलन कर किया। आईएएस अजय गर्ग एवं कला दर्शन विभाग की अध्यक्ष डॉ. प्रो. ऋचा कम्बोज विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे जबकि दूसरे दिन डीन प्रशासनिक व कलानिधि विभागाध्यक्ष डा प्रो रमेश चंद गौर ने तथा तीसरे दिन विभागाध्यक्ष संरक्षण डा अचल पाण्डया, ज्वाइंट सीपी दिल्ली पुलिस रजनीश गुप्ता व एडीजी पीआईपी श्रीमती नानू भसीन मुख्य अतिथि रहे। 

तीन दिनों में मंचित हुए 12 नाटकों ने दर्शकों को बच्चों की रचनात्मक क्षमता, अभिनय कौशल और सामाजिक समझ से परिचित कराया। ग्रीष्मकालीन रंगमंच कार्यशालाओं के माध्यम से बच्चों को प्रशिक्षण देकर तैयार की गई इन प्रस्तुतियों में मंच पर बच्चों का आत्मविश्वास, उच्चारण, शारीरिक भाषा और भाव-प्रदर्शन देखकर दर्शक आश्चर्यचकित रह गए। समारोह में मंचित नाटकों "राजा मिडास" और "जादुई पतंग" का निर्देशन  संयोगिता शर्मा एवं आशु भाटेजा ने किया जबकि बच्चों की कचहरी" और "लिटिल विमेन" का निर्देशन अभिषेक राणा ने​ किया। नाटक "संमस्यापुर" का निर्देशन शिवांग मिश्रा व आस्था बावेजा ने किया जबकि "जंगल बुक" और "एनिमल फार्म" का निर्देशन कन्या सिंह ने किया। इसके अलावा नाटक "अंधेर नगरी" और "वीरगाथा" का निर्देशन खुशबू बराइक ने तथा "द मैजिकल बस" – निर्देशन:सांवल सहगल ने किया। 
     समारोह का प्रमुख आकर्षण झुग्गियों में निवास करने वाले बच्चों द्वारा प्रस्तुत नाटक पुण्यश्लोक अहिल्याबाई" का मंचन रहा जिसका निर्देशन योगेश पंवार ने किया।  समाज के वंचित वर्ग से आने वाले इन बच्चों ने जिस आत्मविश्वास और संजीदगी से ऐतिहासिक पात्रों को जीवंत किया, वह दर्शकों के लिए बेहद प्रेरणादायक रहा। दर्शकों ने खड़े होकर तालियों से उनका अभिनंदन किया। यह समारोह इन बच्चों के लिए न केवल आत्म-विश्वास बढ़ाने का माध्यम बना, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का सशक्त ज़रिया भी साबित हुआ।  समापन अवसर पर सभी बच्चों को प्रतिभाग प्रमाणपत्र दिए व ट्राफी भेंट कर सम्मानित किया गया। अंत में समारोह के आयोजक व दिशा निर्देशक संजय टुटेजा ने आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए सभी दर्शकों व अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

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