जब बहरुपियों के साथ बच्चे भी बन गये बहरुपिये
बहरुपिया उत्सव में बच्चों की थियेटर वर्कशॉप
 
नई दिल्ली। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र में आयोजित बहुरुपिया उत्सव में उड़ान— द सेंटर आफ थियेटर आर्ट एण्ड चाइल्ड डवलपमेंट द्वारा एक बाल रंगमंच शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में बच्चों ने भी बहुरुपियों के संग जहां विभिन्न पात्रों के अभिनय को सीखा वहीं खेल खेल में बच्चे खुद भी बहुरुपिये बन गये।
 
         
 आईजीएनसीए परिसर में उड़ान— द सेंटर आफ थियेटर आर्ट एण्ड चाइल्ड डवलपमेंट द्वारा एक बाल रंगमंच प्रशिक्षण कार्यशाला में बच्चों ने ना केवल खूब मनोरंज किया वहं अभिनय की बारीकियां भी सीखी।  उड़ान के निदेशक संजय टुटेजा के निर्देशन में आयोजित कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों से आये लगभग पांच दर्जन से अधिक बहुरुपियों ने बच्चों के बीच आकर बच्चों के साथ जहां मौज मस्ती की वहीं अपने पात्रों में खो जाने की विधि से बच्चों को अवगत कराया। 
 
   
    कार्यशाला में बच्चों ने सभी बहुरुपियों के साथ उनका अभिनय किया और बहुरुपियों से कई सवाल भी पूछे। कार्यशाला में शामिल आये बच्चों हिमांशी, जलज, आरून व अदिति ने बताया कि इस कार्यशाला में आकर उन्होंने बहुरुपिया कला के बारे में जाना। ऋषि, विवेक, आयान, आर्यन गुप्ता गौरव व गुन्तास का कहना था कि इस कार्यशाला में आकर उन्हें खूब मौज मस्ती करने का मौका मिला। लक्ष्य, नियति, मनन, कनिष्क व कनिष्का का कहना था कि बहुरुपियों के साथ उनका अभिनय करके उन्हें खूब मजा आया।  पार्थ, वंश, लविश,यश,दिशा व नेत्रा ने कहा कि उन्होंने इस तरह की कार्यशाला में इससे पहले कभी हिस्सा नहीं लिया। हेमंत, शनाया, भूमिका, अतिश्य, आरम्भ, अनिरूद्ध, कार्तिक, ईशान, इरेश,सिद्धि, मानस,मनस्वि,प्रबुद्ध व प्रकृति ने कहा कि इस कार्यशाला में बहुरुपियों के साथ अभिनय करना अपने आप में नया अनुभव था।