डीयू की दाखिला प्रक्रिया के खिलाफ हुआ केवाईएस का प्रदर्शन
 
नई दिल्ली। दिल्ली विविद्यालय के एमफिल व पीएचडी कोर्सेज की भेदभावपूर्ण दाखिला प्रक्रिया के खिलाफ सोमवार को डीयू के नॉर्थ कैम्पस में क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस) के कार्यकर्ताओं सहित अन्य संगठनों एवं छात्रों ने विरोध प्रदर्शन कर अपना आक्रोश जाहिर किया।
        डीयू से सम्बद्ध विभिन्न विभागों में एमफिल व पीएचडी दाखिला प्रक्रिया जुलाई माह में शुरू की गई थी, जिस पर बाद में रोक लगा दी गयी। डीयू ने इस सत्र 2018-19 के एमफिल व पीएचडी दाखिलों में यूजीसी विनियम 2016 में निर्धारित नियमों के अनुसार दाखिला शुरू किया था, लेकिन नए नियमों के अनुसार बहुसंख्यक छात्र इंटरव्यू के लिए अयोग्य साबित हो गए थे, परिणामस्वरुप अधिकतर सीटें खाली रह गई। इन नियमों के अनुसार सभी विभागों के दाखिलों में एससी, एसटी, ओबीसी, दिव्यांग छात्रों के लिए भी एक ही कटऑफ क्राइटेरिया था। आरक्षण के संवैधानिक नियमों के उल्लंघन व बड़ी संख्या में छात्रों की छंटनी के विरोध में जब छात्रों ने आवाज उठाई और कोर्ट के समक्ष अपील की तब नई दाखिला प्रक्रिया पर रोक लगायी गयी। छात्रों के लगातार विरोध के दबाव में 2 महीने के अंतराल के बाद यूजीसी ने 2016 के नियमो में एससी, एसटी, ओबीसी, दिव्यांग छात्रों के लिए 5 की छूट घोषणा की है, लेकिन यह भी नाकाफी साबित हो रही है। संगठन के राज्य समिति सदस्य हरीश गौतम ने कहा कि प्रवेश परीक्षा देने वाले अधिकतर एससी, एसटी, ओबीसी, दिव्यांग छात्र अभी भी इंटरव्यू के लिए अयोग्य है और बहुसंख्यक जनरल केटेगरी के छात्रों को भी कोई राहत नहीं मिली है। इस मुद्दे पर केवाईएस ने नए नियमों को पूर्ण रूप से वापस कर पुराने नियमों से दाखिले शुरू करने की मांग की।
साभार राष्ट्रीय सहारा