लड़कियों को शिक्षित बनाकर भावी पीढ़ी को जिम्मेदार और शिक्षित बना सकते हैं : कोविंद        


      नयी दिल्लीं।राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आज कहा कि बालिका शिक्षा वक्त की जरूरत है क्योंकि शिक्षित लड़की कार्य क्षेत्र के साथ अर्थव्यवस्था में योगदान देती है, ऐसे में लड़कियों को शिक्षित बनाकर हम आने वाली पीढ़ी को जिम्मेदार और शिक्षित बना सकते हैं । 
     जीसस एंड मेरी कालेज के स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि चौथी औद्योगिक क्रांति, डिजिटलीकरण एवं रोबोटिक्स के क्षेत्र में प्रगति इस बात पर निर्भर करती है कि उच्च शैक्षणिक संस्थान इस दिशा में किस तत्परता से बढ़ते हैं । 
     उन्होंने कहा कि भारत बदलाव के दौर से गुजर रहा है । हम पुरानी सभ्यता हैं लेकिन हमारी आबादी का बड़ा हिस्सा युवा है। 21वीं शताब्दी के प्रथमार्द्ध में हमारे देश की आबादी दुनिया की सबसे युवा आबादी होने जा रही है। ऐसे में हमें युवाओं की ऊर्जा का सदुपयोग विकसित समाज के निर्माण में करना चाहिए । कोविंद ने कहा कि शिक्षा इस पहल की बुनियाद है और इसके लिये शिक्षा तक पहुंच और शिक्षा की गुणवत्ता महत्वपूर्ण है । 
      उन्होंने कहा कि बालिका शिक्षा पर जोर वक्त की जरूरत है क्योंकि शिक्षित लड़की कार्य क्षेत्र के साथ अर्थव्यवस्था में योगदान देती है, ऐसे में लड़कियों को शिक्षित बनाकर हम आने वाली पीढ़ी को जिम्मेदार और शिक्षित बना सकते हैं । इस प्रकार से हम बालिक शिक्षा का व्यापक सामाजिक प्रभाव है ।राष्ट्रपति ने कहा कि हमारी अर्थव्यवस्था की प्रकृति और कार्य क्षेत्र का सिद्धांत बदल रहा है । चौथी औद्योगिक क्रांति, डिजिटलीकरण एवं रोबोटिक्स मिलकर कुछ तरह के रोजगार को अप्रभावी बना सकते हैं लेकिन इसके साथ ही रोजगार के नये अवसर भी इससे पैदा होंगे।
     उन्होंने कहा कि ऐसे में हमारा समाज किस प्रकार से इन बदलावों के अनुरूप ढल पायेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि किस तरह हमारे शीर्ष उच्च शिक्षण संस्थान इस दिशा में आगे बढ़ते हैं ।  कोविंद ने कहा कि शिक्षित लोगों को वंचित लोगों के कल्याण के लिये काम करना चाहिए और राष्ट्र निर्माता बनना चाहिए । शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जित करना नहीं है बल्कि यह प्रारंभिक बिन्दु है । सबसे जरूरी यह है कि हम इस ज्ञान का उपयोग वंचित लोगों के कल्याण में करें । सही अर्थो में शिक्षित वह नहीं है जिसने डिग्रियां इकठ्ठी की हैं बल्कि जिन्होंने राष्ट्र निर्माण में योगदान दिया है, महत्व उनकी डिग्री का है। 
         राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि हमें अपनी शिक्षा व्यवस्था को उन्नत बनाने की जरूरत है और इसका इस प्रकार से उन्नयन करना है कि उसे भविष्योन्मुखी बनाया जा सके। 
         उन्होंने कहा कि हमारा शैक्षणिक आधारभूत ढांचा, पाठ्यक्र म और पठन पाठन के तरीकों को 21वीं सदी के अनुरूप बनाये जाने की जरूरत है । ऐसे में इसमें बदलती परिस्थिति के अनुरूप सतत रूप से बदलाव किया जाना चाहिए । कोविंद ने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि शिक्षा का वास्तविक लक्ष्य सर्वश्रेष्ठ प्रतिभा का विकास करना है। यह न केवल हमारे देश की महान सेवा होगी बल्कि सम्पूर्ण मानवता की सेवा होगी ।