एमफिल-पीएचडी की प्रवेश परीक्षाएं अंग्रेजी में कराने के विरोध में अनशन 

परीक्षा को दोबारा हिन्दी में कराए जाने की मांग की

नई दिल्ली । दिल्ली विविद्यालय के इतिहास विभाग के छात्र एमफिल-पीएचडी की प्रवेश परीक्षा केवल अंग्रेजी भाषा में कराए जाने के विरोध में सोमवार को आर्ट फैकल्टी के गेट नंबर 4 के सामने अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठ गए। छात्रों ने परीक्षा को पुन: अंग्रेजी के ¨हदी अनुवाद के साथ कराए जाने की मांग की। अनशन पर आशीष रंजन सिंह, अंशुमान सिंह, अनुराग निगम व बोधिधर्म राहुल बैठे। छात्रों का कहना है कि इतिहास विभाग में इससे पूर्व एमफिल-पीएचडी की प्रवेश परीक्षाएं ¨हदी एवं अंग्रेजी भाषा के साथ संपन्न कराई जाती रही है, लेकिन इस वर्ष 21 जून 2018 को आयोजित परीक्षा केवल अंग्रेजी भाषा में सम्पन्न कराई गई, जिससे ¨हदी माध्यम से स्नातक एवं स्नातकोत्तर इतिहास विषय से उत्तीर्ण परीक्षार्थियों के प्रदर्शन निराशाजनक रहा। छात्रों ने विभागाध्यक्ष पर भाषायी भेदभाव लगाकर कुलपति से विभागाध्यक्ष के इस्तीफे की मांग के साथ, प्रवेश परीक्षा को पुन: आयोजित करने की मांग की। छात्रों का कहना है कि जून 2018 में आयोजित एमफिल-पीएचडी प्रवेश परीक्षा केवल अंग्रेजी भाषा में लेने के कारण भारत के छोटे-छोटे क्षेत्रों से परीक्षा में सम्मिलित होने वाले गैर अंग्रेजी भाषी छात्रों को समान अवसर प्रदान नहीं दिया गया, यह छात्रों के मूल अधिकारों का हनन है एवं विभाग द्धारा संविधान के अनुच्छेद 14 का अतिक्रमण भी है। छात्रों का कहना है कि एमफिल-पीएचडी विषय की विभाग में कुल 25 सीटें हैं और यह प्रवेश परीक्षा केवल दिल्ली में ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण भारत के प्रमुख केंद्रों में आयोजित की जाती है।