प्रो.कृष्णन बालासुब्रमण्यम को पहला अब्दुल कलाम टेक्नॉलोजी इनोवेशन नेशनल फेलोशिप

 

  • आईआईटी मद्रास ने आईएनएई का पहला अब्दुल कलाम टेक्नोलॉजी इनोवेशन नेशनल फेलोशिप पुरस्कार दिया
  • फैलोशिप अल्ट्रासोनिक वेवगाइड सेंसर सिस्टम के क्षेत्र में उन्नत अनुसंधान करने के लिए संकाय की सहायता करता है

चेन्नई।  इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मद्रास के फैकल्टी प्रोफेसर कृष्णन बालासुब्रमण्यम को 2018 में इंडियन नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग (आईएनएई) द्वारा दी जाने वाली पहली अब्दुल कलाम टेक्नोलॉजी इनोवेशन नेशनल फेलोशिप पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

इस प्रतिष्ठित फैलोशिप को हाल ही में इंजीनियरिंग, इनोवेशन और प्रौद्योगिकी विकास में उत्कृष्टता हासिल करने वाले व्यक्तियों द्वारा अनुवादकारी अनुसंधान को पहचानने, प्रोत्साहित करने और समर्थन करने के लिए स्थापित किया गया है। वे वर्तमान में मैकेनिकल इंजीनियरिंग, आईआईटी मद्रास विभाग में मुख्य प्रोफेसर हैं और उन्होंने सेंटर ऑफ़ नॉनडिस्ट्रक्टिव ईवालुएशन के प्रमुख के रूप में भी का किया है, जिसे उन्होंने 2001 में संस्थापित किया था।

फैलोशिप के बारे में बोलते हुए, प्रो. कृष्णन बालासुब्रमण्यम ने कहा, "मुझे खुशी है कि आईएनएई और डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टैक्नोलॉजी (डीएसटी) ने भारत में प्रौद्योगिकी नवप्रवर्तनों को पहचानने के लिए इस पुरस्कार की स्थापना की है। इस सम्मान को प्राप्त करके मुझे सुखद अनुभव हो रहा है।"

फैलोशिप अल्ट्रासोनिक वेवगाइड सेंसर सिस्टम के क्षेत्र में उन्नत अनुसंधान करने में प्रो. कृष्णन बालासुब्रमण्यन की सहायता करेगा। यह प्रौद्योगिकी नवप्रवर्तन फैलोशिप तीन वर्षों के लिए है और दो वर्षों की अवधि तक आगे बढ़ाया जा सकता है।

पुरस्कार के प्रशस्ति पत्र में शामिल है "यह सम्मान वास्तव में अविध्वंसक मूल्यांकन और सेंसर के क्षेत्र में आपके उत्कृष्ट योगदान की एक बेहतरीन पहचान है और साथ ही यह देश में इंजीनियरिंग के पेशे के विकास में आपका नेतृत्व करेगा।"

इसमें आगे कहा गया है, "इसलिए आपके शोध को उत्पाद के विकास, उसकी मान्यता और नई प्रौद्योगिकी के आधार पर वाणिज्यीकरण के मामले में डिलिवरेबल्स का नेतृत्व करना है।"

उन्होंने 1984 में मद्रास विश्वविद्यालय (क्षेत्रीय इंजीनियरिंग कॉलेज, तिरुचिरापल्ली, भारत) से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में अपनी स्नातक की डिग़्री प्राप्त की। फिर उन्होंने ड्रेक्सल यूनिवर्सिटी से 1986 में एम.एस. की डिग्री हासिल की और 1989 में पीएच.डी. किया।

उनके पास 410 से अधिक तकनीकी प्रकाशन (210 संदर्भित जर्नल पत्रों सहित), 17 पेटेंट फाइलिंग हैं और पीएच.डी के 23 छात्रों ने उनके निर्देशन में लघु शोध किए हैं और 46 एम.एस. छात्रों ने थीसिस लिखे हैं।

अविध्वंसक मूल्यांकन के क्षेत्र में अनुसंधान के लिए उनके उत्कृष्ट योगदान के सम्मान में, उन्हें वर्ष 2012 के लिए ब्रिटिश इंस्टीट्यूट फ़ोर एनडीटी द्वारा रॉय शॉर्प पुरस्कार प्रदान किया गया था। उन्हें 2011 में औबर्न यूनिवर्सिटी, अमेरीका द्वारा उनकी उद्यमशील गतिविधियों के लिए आईएसटीईएम उद्यमशीलता संकाय सदस्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया और इंडियन सोसाइटी ऑफ़ एनडीटी द्वारा 2010 में नेशनल एनडीटी पुरस्कार प्रदान किया गया था। उन्हें 2015 के लिए डीआरडीओ अकादमी उत्कृष्टता पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।

धवानी रिसर्च, प्लेनस टेक्नोलॉजीज, डिटेक्ट टेक्नोलॉजीज, मैक्सिमल लैब, ट्रॉटिक्स रोबोटिक्स, हाइपरवर्ज और सोलिनस इंटिग्रिटी सहित कई स्टार्टअप के उदय में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, और इन कंपनियों के साथ मिलकर कई नए उत्पादों को विकसित किया है।

वे वर्तमान में जर्नल ऑफ़ नॉनडिस्ट्रक्टिव ईवालुएशन (आईएसएनटी) के प्रधान संपादक और जर्नल ऑफ़ नॉनडिस्ट्रक्टिव टेस्टिंग एंड ईवालुएशन (टेलर और फ्रांसिस) के लिए दक्षिण-पूर्व एशिया संपादक के रूप में कार्यरत हैं। वे अल्ट्रासोनिक्स (एल्सेवियर) के सहायक संपादक, जर्नल ऑफ़ एनडीटीएंडई इंटरनेशनल (एल्सेवियर) के विषय संपादक के रूप में भी काम कर रहे हैं और जर्नल ऑफ़ स्ट्रक्चरल लॉन्गेविटी (टेकसाइंस) के संपादकीय बोर्ड में भी शामिल हैं। वे वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ एनडीई सेंटर और क्यूएनडीई वैज्ञानिक सलाहकार समिति के एक बोर्ड सदस्य भी हैं। वे एकेडमी एनडीटी इंटरनेशनल के लाइफ फेलो, इंडियन सोसाइटी ऑफ़ नॉनडिस्ट्रक्टिव टेस्टिंग (आईएसएनटी) के लाइफ फेलो और इंडियन नेशनल एकेडमी ऑफ़ इंजीनियर्स के फेलो हैं।