इंडियन व्हील चेयर क्रिकेट में चलेगा झांसी का‘हुकुम‘

 झांसी। ‘कौन कहता है कि आसमान में  सुराख हो नही सकता,  एक पत्थर तो  तबीयत से उछालो यारों’दुष्यंत कुमार के इस प्रेरणादायी शेर को प्रत्यक्ष रूप से झांसी के एक छोटे से गांव जरयाई के रहने वाले हुकुम सिंह ने साबित कर दिखाया है। चलने फिरने में अक्षम हुकुम सिंह का क्रिकेट के प्रति जुनून इस हद तक परवान चढा कि उन्होने अपनी प्रतिभा के बल पर देश की व्हीलचेयर क्रिकेट टीम में जगह बनाने मे कामयाबी हासिल कर ली।
     यह टीम एक से चार अप्रैल तक कोल्हापुर एवं मुंबई में आयोजित टी-ट्वेंटी एवं सात से दस अप्रैल तक रुद्रपुर में आयोजित तिकोणिीय श्रृंखला खेलेगी। इसमें अन्य दों टीमें बांगलादेश व नेपाल की हैं।  विराट कोहली को अपना आदर्श मानने वाले हुकुम सिंह ने बताया कि उसे बचपन से ही क्रिकेट खेलने का शौक था लेकिन पोलियो के कारण चलने फिरने से लाचार हो गया। वह घिसटकर गांव के खेत में जाता जहां हम उम्र बच्चे क्रिकेट खेलते थे। उन्हीं के साथ बैठकर बैटिंग और बॉलिंग करने लगा। साथियों के प्रोत्साहन से वह सामान्य बच्चों की तरह बल्लेबाजी और गेंदबाजी में दक्ष हो गया।
      बाद में हुकुम सिंह ने  रामभद्राचार्य विकलांग विविद्यालय चिाकूट में प्रवेश लिया तथा बीएड, पीयूडीआई की शिक्षा ली। इस दौरान अंतर विविद्यालयीय विकलांग क्रिकेट प्रतियोगिता में उसने भाग लिया और एकमा मैच में 56 गेंद में 179 रन की पारी खेली तथा तीन विकेट चटकाए। 
     पढ़ाई में राष्ट्रपति पदक से सम्मानित हुकुम सिंह बताते हैं कि मूक बधिर आवासीय विद्यालय में बतौर विशेष शिक्षक पद पर कार्यरत थे, इसी दौरान यहां के जिला क्रिकेट संघ  के सचिव बृजेंद्र यादव के सहयोग और डिसेबल्ड स्पोर्टिंग सोसायटी आगरा के सचिव हारुन रशीद की प्रेरणा से व्हीलचेयर क्रिकेट टूर्नामेंट के ट्रायल लिया। जहां उम्दा प्रदर्शन के आधार पर उसका चयन इस प्रतियोगिता के लिए किया गया। हुकुम सिंह को विास है कि वह अपने ऑलराउंड खेल से भारतीय टीम को विजेता बनाने में सफल होंगे।