उच्च न्यायालय से वित्तविहीन स्कूलों को राहत

नैनीताल । उत्तराखंड में शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत बच्चों को प्रवेश देने वाले वित्तविहीन स्कूलों को उच्च न्यायालय से राहत मिली है। उच्च न्यायालय ने सरकार को इस अधिनियम के तहत प्रवेश देने वाले वित्तविहीन विद्यालयों के तीन सत्रों के बकाया राशि को छह माह में अदा करने के निर्देश दिये हैं जिससे गरीब बच्चों की पढ़ाई पूरी हो सके। 
     मामले की सुनवाई उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ में हुई। मामले के अनुसार पौड़ी गढ़वाल के थलीसैंण ब्लाक के वित्तविहीन 28 विद्यालयों ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा कि उन्होंने शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत गरीब छाों को अपने विद्यालयों में प्रवेश दिया। लेकिन राज्य सरकार ने इन छात्रों के प्रवेश के एवज में प्रवेश शुल्क संबंधित विद्यालयों को प्रदान नहीं किया है। सरकार ने तीन सत्रों क्रमश: 2015-16, 2016-17, 2017-18 के लिए शुल्कों का भुगतान इन विद्यालयों को नहीं किया। याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि उनके द्वारा सरकार से कई बार बकाया धनराशि के भुगतान के लिए अनुरोध किया गया लेकिन सरकार द्वारा बकाये धनराशि का भुगतान नहीं किया गया। याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि इससे गरीब छाों की शिक्षा पर प्रभाव पड़ रहा है। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने सरकार को बकाये धनराशि का छह माह में भुगतान करने के निर्देश दिये।