भारतीय परम्परा में विद्यमान हैं तनाव मुक्ति के वैज्ञानिक उपाय- डॉ. रमा
 
* युवाओं को अब अवसाद-विषाद जैसे शब्दों को छोड़ उपनिषद् जैसे शब्द को जानने की है आवश्यकता -सुनील जोशी *  
 
*हंसराज कॉलेज ने मनाया राष्ट्रीय विज्ञान दिवस*
 
 
 
नई दिल्ली : दिनांक 28 फरवरी 2018 को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर दिल्ली विश्वविद्यालय के “हंसराज कॉलेज” तथा संस्कृत, योग और आयुर्वेद के संवर्धन की सार्वभौम संस्था “स्वस्तिवाचनम्” के संयुक्त तत्वावधान में"प्राचीन भारतीय विज्ञान प्रबन्धन से अवसाद मुक्ति" इस विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया । 
ज्ञात हो कि इसी दिन प्रसिद्ध भारतीय वैज्ञानिक सी.वी. रमन को भौतिकी के क्षेत्र में उनकी खोज के लिए 1930 में नोबेल पुरस्कार से सम्मनित किया था।
विज्ञान दिवस के अवसर पर हंसराज कॉलेज के संगोष्ठी कक्ष में आयोजित उक्त संगोष्ठी में योग-प्रशिक्षक, रेडियो और टेलीविज़न पत्रकार और मोटिवेशनल स्पीकर सुनील जोशी ने युवाओं को श्रीमद्भगवद्गीता में योगेश्वर श्रीकृष्ण द्वारा अवसादग्रस्त श्रीअर्जुन का उदाहरण देते हुए प्रत्येक युवा को निष्काम-कर्म के लिए प्रेरित किया, साथ ही दैनिक जीवन में उपयोगी योगासन, प्राणायाम और ध्यान साधना का महत्त्व बताया। साथ ही उन्होंने इस मौके पर कहा कि ‘’अवसाद और विषाद में सद धातु है जो की सिर्फ़ तनाव को जन्म देती है परन्तु आज युवाओं को उपनिषद् जिसमें भी सद धातु है उसको अपनाना पड़ेगा, अर्थात् मानवीय चेतना का जागरण करना होगा, परस्पर सामंजस्य की अनुभूति करनी होगी, प्रत्येक व्यक्ति को आत्मोन्नति के साधन पर ध्यान केन्द्रित करना होगा, प्रकृति के संसर्ग का आलम्बन करते हुए वृक्षारोपण करना होगा, वृद्धोपसेवी बनना होगा, आत्मसंतोष करना होगा, आचार-विचार और विहार की शुद्धि करनी होगी जिससे  अवसाद मुक्ति निश्चित है ।  
कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि ऑस्ट्रेलिया मूल के चार्ल्स थॉमसन ( बिहारी बाबू उर्फ ऑटो वाले बाबू नाम से भारत में प्रसिद्ध) ने योग के क्रियात्मक पक्ष के आधार पर तनाव को दूर करने के उपाय बताये उन्होंने बताया की वो 11 वर्ष की आयु से बिहार स्कूल ऑफ़ योगा से जुड़े । उन्होने “योग-निद्रा” तकनीक को अवसाद से मुक्ति का सोपान अनुभव किया है और आज वो 54 वर्ष के हो गए है और योग उनकी जिंदगी के प्रतिदिन का हिस्सा है जो की भारतीय प्राचीन विज्ञान की महत्वपूर्ण देन है । 
वहीं कार्यक्रम में मुख्यवक्त्री के रूप में पधारी स्वीडन मूल की आनन्दा हिमानी ने न्यूरो साइंस के आधार पर मानसिक चिकित्सा और संगीत से आध्यात्मिक साधना के द्वारा अवसाद मुक्ति को सर्वोत्तम बताया ।
विशिष्ट अतिथि के तौर पर भारतीय विद्या विभन, दिल्ली केंद्र  के प्राच्य विद्या विभाग की अध्यक्षा डॉ शशि बाला ने प्राचीन भारतीय विज्ञान परम्परा को उजागर करते हुए आधुनिक विज्ञान को परस्पर आश्रित बताया।
 
इस अवसर पर  साहित्य, मीडिया, सिनेमा,  रंगमच की विशेषज्ञा तथा हंसराज कॉलेज की प्राचार्या डॉ. रमा द्वारा लिखित पुस्तक 'हिंदी रंगमंच' का लोकार्पण भी गणमान्य अतिथियों ने किया । हिंदी रंगमंच को उसकी व्यापकता और समग्रता में समझने की दृष्टि से यह पुस्तक बेहद पठनीय है, पुस्तक में रंगमंच के विविध पहलुओं की विस्तृत व्याख्या है और विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं रंगकर्म से जुड़े लोगों के लिए यह एक महत्वपूर्ण पुस्तक है।