अदालत ने सात स्कूलों को बंद करने के आदेश पर सरकार से मांगा जवाब 


 
 नयी दिल्ली।  दिल्ली उच्च न्यायालय ने राज्य शिक्षा विभाग के एक आदेश को रद्द करने की मांग करने वाली याचिका पर केंद्र और आप सरकार से जवाब मांगा है।
 याचिका में आरोप लगाया गया है कि शिक्षा विभाग का आदेश विलय और पुनर्गठन की आड में मध्य जिले के समीप के सात उन स्कूलों को बंद करने का प्रयास है जो सफलतापूर्वक चल रहे हैं। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी हरिशंकर ने शिक्षा विभाग, दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया और मामले पर सुनवाई के लिए 27 जुलाई की तारीख तय की। सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि उन्होंने संबद्ध आदेश के कुछ हिस्सों को वापस ले लिया है।
     यह याचिका वकील और कार्यकर्ता यूसुफ नकी ने दायर की है। इसमें कहा गया है कि सूचना के अधिकार के तहत जो जवाब प्राप्त हुआ है उसके मुताबिक स्कूलों के विलय या उन्हें बंद करने के पीछे जो कारण बताया गया है वह यह है कि उन स्कूलों में कम संख्या में छात्रों ने पंजीयन करवाया है।
 नकी की ओर से पेश अधिवक्ता जीएम अख्तर ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा आठ के मुताबिक शिक्षा का प्रसार करना और छात्रों तथा अभिभावकों को बच्चों का पंजीयन करने के लिए प्रेरित करना सरकार का दायित्व है। जबकि सरकार का रुझान सात स्कूलों को बंद करने की दिशा में है। ऐसी स्थिति बना दी गई है कि छात्रों के पास कोई और विकल्प नहीं बचा है बजाए इसके कि वह उक्त स्कूलों से अपना नाम कटवा लें जिससे इन स्कूलों को बंद करने के लिए आदर्श स्थिति बन जाए।  याचिका में शिक्षा विभाग के आदेश को रद्द करने की मांग की गयी है।