आईआईटी हैदराबाद ने  किया चिप्स डिजाइन क्षेत्र में अभूतपूर्व इनक्यूबेटर का शुभारंभ

 

फैबसी ने कैडेंस, इलेक्ट्रॉनिक डिज़ाइन ऑटोमेशन सॉफ्टवेयर के अग्रणी प्रदाता, के साथ तकनीक पार्टनर्स के रूप में हाथ मिलाया

 

 

● इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी हैदराबाद ने भारत में फैबलेस आईसी स्टार्टअप के लिए अभूतपूर्व इनक्यूबेटर कार्यक्रम लॉन्च किया

 

● फैबलेस चिप डिज़ाइन इनक्यूबेटर प्रोग्राम, या फैबसी, को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) का समर्थन प्राप्त है

 

● फैबसी विश्व स्तरीय सेमीकंडकटर स्टार्टअपस का पोषण करेंगे जिससे सेमीकंडकटर डिजाइन में भारतीय परिदृश्य में बदलाव को तेज करने में मदद मिल सकती हैं

 

● कार्यक्रम गैर-हैदराबाद आधारित इनक्यूबेट्स को सुविधाओं और सॉफ्टवेयर की रिमोट पहुंच प्रदान करता है

 

बेंगलुरु : इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी हैदराबाद ने चिप्स डिजाइन के क्षेत्र में स्टार्टअपस को तैयार करने के लिए एक इकोसिस्टम बनाने वाला अभूतपूर्व इनक्यूबेटर कार्यक्रम लॉन्च किया है।

फैबलेस चिप डिज़ाइन इनक्यूबेटर कार्यक्रम, या फैबसी के नाम से जाना जाने वाला, यह भारत में फैबलेस आईसी स्टार्टअप के लिए आईआईटी हैदराबाद परिसर में स्थित होगा।

फैबलेस चिप डिज़ाइन इनक्यूबेटर एक प्रमुख कार्यक्रम है जिसे इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के सहयोग से और इलेक्ट्रॉनिक डिज़ाइन ऑटोमेशन (ईडीए) सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर और आईपी के अग्रणी प्रदाता कैडेंस→ डिज़ाइन सिस्टम्स, इंक के साथ साझेदारी में किया जा रहा है।

इस अनूठे इनक्यूबेटर कार्यक्रम के लिए पहला उद्देश्य चिप डिजाइन के क्षेत्र में ध्यान केंद्रित करने वाले स्टार्टअपस के लिए एक ही स्थान पर सभी समाधान प्रदान करना है। इस इनक्यूबेटर की सोच एक ऐसा इकोसिस्टम बनाने की है, जिसमें इनक्युबेटिस को न केवल आवश्यक संसाधन, हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर उपलब्ध हो, बल्कि इन क्षेत्रों में पहले से स्थापित लोगों से सफलता के लिए सलाह भी मिले।

फैबसी के शुभारम्भ के बारे में बोलते हुए आईआईटी हैदराबाद के निदेशक, प्रोफेसर यू.बी. देसाई ने कहा, "यह नया इनक्यूबेटर कार्यक्रम चिप डिजाइन में आईपीआर पैदा करने की हमारी प्रतिबद्धता दिखाता है। यह संस्थान की उद्यमशील संस्कृति का एक और प्रमाण होगा"।

"मुझे विश्वास है कि फैबसी देश में चिप डिजाइन के विकास में बड़ा योगदान देगा। यह इनक्यूबेटर कार्यक्रम 'मेक इन इंडिया' अभियान के लिए वरदान होगा और भारत को चिप डिजाइन के लिए एक वैश्विक केंद्र बनने में मदद करेगा," प्रो. देसाई ने कहा।

बड़ी सोच आईआईटी हैदराबाद संकाय के साथ-साथ बाहरी सलाहकारों की गहरी अनुसंधान और डिजाइन विशेषज्ञता का लाभ उठाने के लिए भारतीय आईपी बनाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिप डिजाइन में एक पहचान बनाने की है।

आईआईटी हैदराबाद ने फैबसी के लिए प्रौद्योगिकी साझेदार के रूप में कैडेंस को नामित किया है। हालांकि इनक्यूबेटर के लिए आईआईटी-एच परिसर में एक विशेष सुविधा स्थापित की जा रही है, लेकिन बिना किसी स्थान विशेष की सीमा के कैडेंस के उपकरण तक रिमोट पहुंच सेमीकंडकटर नवाचार और उद्यमशीलता फैबसी को सक्षम करने के लिए उपलब्ध है।

इनक्यूबेटर पहले से ही पूरी तरह कार्यशील है और यह फैबलेस आईसी स्टार्टअपस से आवेदन आमंत्रित कर रहा है।

फैबसी कार्यक्रम के लिए आईआईटी हैदराबाद के साथ साझेदारी के बारे में बोलते हुए, कॉरपोरेट उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक जस्विंदर आहूजा, कैडेंस डिजाइन सिस्टम (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड ने कहा, "भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन और विनिर्माण (ईएसडीएम) इकोसिस्टम विकास के लिए नई सोच और उद्यमशीलता आवश्यक है। इन्क्यूबेटर्स प्रवेश संबंधी बाधाओं को कम करने और उद्यमशीलता को बढ़ावा देने में प्रेरक भूमिका निभाते हैं। कैडेंस कई वर्षों से भारत सरकार, उद्योग और शिक्षाविदों के साथ मिलकर इकोसिस्टम विकसित करने के लिए काम कर रहा है। हम 'फैबसी ', एक अनूठे इनक्यूबेटर के लिए आईआईटी-एच जैसे सम्मानित संस्थान के साथ साझेदारी करने पर उत्साहित हैं, जिससे हमें उम्मीद है कि घरेलू सेमीकंडकटर नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। '

फैबसी के मुख्य सलाहकार और मार्गदर्शक श्री हेमंत कनकिया ने कहा, "भारत के पास फैबलेस सेमीकंडकटर उत्पाद और सेवा कंपनियों के लिए उत्कृष्टता का केंद्र बनने की बहुत बड़ी क्षमता है। फैबसी सेमीकंडकटर क्षेत्र में स्टार्टअप्स के लिए एक इकोसिस्टम बनाकर संभावित क्षमता को पहचानने का एक बहुत अच्छा पहला कदम है। मेरी राय में, फैबसी की सफलता भारत में ईडीए उपकरण, निर्माण इकाइयां, भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडकटर एसोसिएशन और सिलिकॉन उत्पादों के डिजाइन और निर्माण में शामिल बहुराष्ट्रीय कंपनियों की सहयोगी कंपनियों, के साथ साझेदारी पर निर्भर करती है। मैं इस केंद्र को बनाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना मंत्रालय, विशेष रूप से डा. अजय कुमार, (आईएएस) अतिरिक्त सचिव के समर्थन की सराहना करता हूं।"

अपनी विश्व स्तरीय ईडीए प्रौद्योगिकियों के अलावा, कैडेंस, इम्यूबेटर और इनक्यूबेटीज़ की सफलता सुनिश्चित करने के लिए अपने प्लेटफॉर्म द्वारा इम्यूलेशन, रैपिड प्रोटोटाइप और अपनी इंजीनियरिंग विशेषज्ञता तक पहुंच प्रदान करेगा।