शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध

जयपुर। राजस्थान के शिक्षा राज्य मंत्री वासुदेव देवनानी ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है और  सरकारी स्कूलों को पीपी मोड पर देने के लिये एक समिति का गठन किया है।
         श्री देवनानी ने आज विधानसभा में प्रश्नकाल में विधायक भवर सिंह द्वारा उठाये गये मुद्दे का जवाब देते हुये का कि राज्य सरकार को पी.पी.मोड पर विद्यालयों के संचालन के लिए विभिन्न  संगठनों से प्राप्त ज्ञापन, आपत्तियां प्राप्त हुयी है जिस पर राज्य सरकार ने एक समिति का गठन किया है। समिति की अनुशंसा पर ही इस पर  निर्णय लिया जायेगा।       

    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश के तीन सौ विद्यालयों को पीपी मोड पर देने का निर्णय लिया था लेकिन इस पर आयी आपत्तियों और ज्ञापनों को देखते हुये फिलहाल इसे स्थगित कर दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार द्वारा अभी तक किसी भी स्कूल को पीपी मोड पर नहीं दिया गया है।
       इस दौरान सदस्यों द्वारा राज्य सरकार पर चिकित्सा,रोड़वेज और शिक्षा को पीपी मोड पर देने का जिक्र करते हुये कहा कि यह प्रदेश के विकास के खिलाफ है।   श्री देवनानी ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने रमसा और माध्यमिक शिक्षा पर अपने पांच वर्ष के कार्यकाल में सिर्फ 288 करोड़ रुपए ही खर्च किए,जबकि वर्तमान सरकार ने चार साल में इस पर 1 हजार 600 करोड़ से अधिक खर्च किए। यदि इसमें इन्फ्रास्ट्रश्रर भी शामिल कर लिया जाए, तो यह राशि 2 हजार 898 करोड़ रुपए है।
        उन्होंने कहा कि प्रदेश में आर्थिक दृष्टि से कमजोर विद्यार्थियों को निजी विद्यालयों में अध्ययन के अवसर मिले और उन्हें शिक्षा का अधिकार मिले इसलिये तीन सो विद्यालयों को पीपी मोड में चयन किया गया था। इन स्कूलों की भूमि सरकार के अधीन ही रहेने का प्रावधान था और इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चलाने की योजना थी। उन्होंने कहा कि चयनित विद्यालयों में 235 विद्यालय ऐसे हैं, जिनमें विद्यार्थियों की संख्या 400 से कम है। 
         उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में नामांकन में 12 लाख की बढ़ोत्तरी हुई है और परीक्षा परिणाम भी बेहत्तर हुए हैं। उन्होंने बताया कि पहले जहां गार्गी पुरस्कार प्राप्त करने वाली बालिकाओं की संख्या 20 से 25 हजार होती थी, वह अब बढ़कर 1 लाख 26 हजार तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत सरकारी विद्यालयों की एक इंच जमीन भी किसी को नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इसके लिए नोडल एजेंसी माध्यमिक शिक्षा विभाग है और इसके लिए राजस्थान काउंसिल ऑफ सैकंडरी एजुकेशन की 11 सदस्यीय समिति का गठन किया गया है।