बिहार में खुलेंगे पांच मेडिकल कॉलेज :चौबे

      पटना।  केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे ने आज कहा कि इस बार के आम बजट में पूरे देश में 25 सरकारी मेडिकल कॉलेज खोले जाने का प्रावधान किया गया है जिसमें से पांच बिहार में खोले जायेगे।
     यहां स्थित राजकीय अतिथि शाला में आज पत्रकारों को संबोधित करते हुए चौबे ने बताया कि इस बार के आम बजट में पूरे देश में 25 सरकारी मेडिकल कॉलेज खोले जाने का प्रावधान किया गया है जिसमें से पांच बिहार में खोले जायेगे। प्रत्येक मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए 250 करोड रूपये दिए जाएंगे।चौबे ने कहा कि बिहार में जो पांच मेडिकल कालेज खोले जाने हैं उसके लिए स्थान के चयन के लिए तीन संसदीय क्षेत्रों के पांच खंड बनाये गये है।
    उन्होंने कहा कि इन खंडों में बक्सर आरा पाटलिपुत्र, शिवहर सीतामढी मधुबनी, वैशाली गोपालगंज सिवान, समस्तीपुर सुपौल अररिया और जमुई मुंगेर बांका शामिल हैं। इन स्थानों में जहां वर्तमान में मेडिकल कॉलेज नहीं हैं उन स्थानों का चयन कर राज्य सरकार शीध भूमि उपलब्ध कराए।
    चौबे ने कहा कि टाटा मेमोरियल के कैंसर संस्थान की तर्ज पर भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र के सहयोग से मुजफ्फरपुर जिले में 200 करोड रूपये की लागत से एक कैंसर शोध संस्थान और अस्पताल की स्थापना जाएगी।उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा इसके लिए भूमि उपलब्ध करा दिए जाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका शिलान्यास करेंगे।
    चौबे ने बताया कि टाटा ट्रस्टी के सहयोग से बिहार सरकार प्रदेश में नौ जिला अस्पतालों में कैंसर रोग के प्रारंभिक इलाज के लिए एल3 केंद्र की स्थापना करेगा। उन्होंने बताया कि बिहार के छह मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कैंसर रोड के आधुनिक इलाज के लिए एल 2 सेंटर की स्थापना की जाएगी। चौबे ने बताया कि पटना स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में असाध्य कैंसर रोग के इलाज के लिए एल वन स्तर का राज्य स्तरीय कैंसर संस्थान का शुभारंभ किया जाएगा जिसके लिए केंद्र सरकार ने 120 करोड रूपये प्रदान किए हैं।
    चौबे ने बताया कि पटना स्थित एम्स अस्पताल में पूर्व में जहां 18 विभाग संचालित थे और अब वहां 30 विभाग कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि पटना स्थित एम्स अस्पताल में निर्मांणाधीन आठ आधुनिक ऑपरेशन थिएटर इस महीने के अंत तक बनकर तैयार हो जायेंगे तथा यहां मई में आपात सेवा शुरू हो जाएगी।
    उन्होंने कहा कि देश में चिकित्सकों की भारी कमी के मद्देनजर 2022 तक 1542 की आबादी पर एक चिकित्सक की उपलब्धता सुनिश्चित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है और सरकार ने इसके लिए इस साल के बजट में प्रावधान किया है।