यूपी बोर्ड परीक्षा हेतु 83 हजार 753 फर्जी आवेदन हुए निरस्त

  • नकल विहीन परीक्षा के लिए बोर्ड कटिबद्ध : नीना श्रीवास्तव

इलाहाबाद।  उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड)  आज से शुरू हुई  हाईस्कूल और इंटरमीड़एिट की परीक्षा नकल विहीन कराने के लिए कटिबद्ध है। बोर्ड परीक्षा में 83 हजार 753 फर्जी तरीके से किये गये आवेदन निरस्त किये गये है। 
      बोर्ड की सचिव नीना श्रीवास्तव ने आज यहां बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ और उप मुख्यमंत्री एवं माध्यमिक शिक्षा मंत्री दिनेश शर्मा छात्रों के भविष्य को लेकर बहुत गंभीर है। वह नकल कर परीक्षा पास करने के खिलाफ हैं और इसीलिए उनके निर्देश के बाद बोर्ड नकल विहीन परीक्षा कराने के लिए कटिबद्ध है। बोर्ड परीक्षा को पूरी शुचिता एवं पारदर्शिता के साथ सम्पन्न कराये जाने के लिए पहली बार सभी केन्द्रों पर सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में परीक्षा करायी जा रही है और समुचित निगरानी रखने के लिए गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष परीक्षा केन्द्रों में भी कटौती की गयी है।
      उन्होंने बताया कि श्री योगी पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की तरह परीक्षा प्राणाली को लेकर सख्त हैं, इसलिए परीक्षाओं के बेहतर स्तर को लेकर यह प्रयास किया जा रहा है। वर्ष 2018 की यूपी बोर्ड की परीक्षा में लागू होने वाला नकल विरोधी अध्यादेश पूर्व की तरह नहीं होगा। नए सिरे से लागू होने वाले इस अध्यादेश में विद्यार्थियों की गिरफ्तारी का प्रावधान नहीं है, बल्कि नकल कराने वाले केंद्र व्यवस्थापकों, शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई के प्रावधान है।
      सचिव ने बताया कि यूपी बोर्ड की 2018 के हाईसकूल और इंटरमीडिएट परीक्षा में 66 लाख 37 हजार 18 परीक्षार्थी शिरकत करेगे।  ऑनलाइन आवेदन में व्यक्तिगत तौर पर आवेदकों ने गलत अभिलेख लगाये थे। जिसके बाद जांच में 83 हजार 753 फर्जी तरीके से आवेदन पाए गए, जिन्हें निरस्त कर दिया गया। ये परीक्षार्थी परीक्षा में सम्मिलित नहीं हो सकेगें।
      नोडल अधिकारी बनाये गये पुलिस अधीक्षक (अपराध) बृजेश मिश्र ने बताया कि नकल पर नियांण कराने के लिए 22 क्यूआरटी टीम का गठन किया है। यह टीमें परीक्षा केन्द्रों पर निगरानी करेंगी। उन्होंने बताया कि जिस केन्द्र पर सामूहिक नकल होता पाया गया वहां के प्रधानाचार्य और स्कूल प्रबंधकों के खिलाफ मुदकमा दर्ज कर जेल भेजा जायेगा।
      गौरतलब है कि वर्ष 1992 में प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंी कल्याण सिंह और शिक्षा मंी राजनाथ सिंह नकल विरोधी अध्यादेश लाए थे। इसके तहत परीक्षा में नकल को गैर जमानती आपराध की श्रेणी में डाला गया था। परीक्षा में नकल करते बड़ी संख्या में पकड़े गए विद्यार्थियों को जेल भी जाना पड़ा था। उस दौरान सफल होने वाले परीक्षार्थियों के परिणाम घटकर करीब 14 फीसदी थी।