पुरातन तकनीक की खोज फिर से करेगा आईआईटी-खड़गपुर 


      कोलकाता। आईआईटी खड़गपुर ने दिलवाड़ा के जैन मंदिर या एलोरा गुफाओं के कैलाशा मंदिर जैसे प्राचीन भारतीय ऐतिहासिक स्थलों के निर्माण में इस्तेमाल तकनीक को फिर से खोजने के लिये एक नया पाठ्यक्रम शुरू करेगा। 
       आईआईटी खड़गपुर के निदेशक प्रोफेसर पार्थ प्रतिम चक्रबर्ती ने पीटीआई को बताया कि ये प्राचीन ढांचे वास्तुशिल्प का चमत्कार हैं जिन्हें शीर्ष से लेकर आधार तक एक विशाल पत्थर को तराश कर बनाया गया है। 
       चक्र बर्ती ने कहा कि मैं दिलवाड़ा मंदिर या कैलाशा मंदिर के निर्माण के लिये इस्तेमाल होने वाले औजारों के बारे में सोचकर अचंभित हूं। उन्होंने कहा कि इन ढांचों का निर्माण शिखर से शुरू हुआ जबकि आधुनिक वास्तुशिल्प जमीन से ऊपर की तरफ शुरू होता है। 
      उन्होंने कहा कि हमें इन ढांचों की डिजाइन और उन्हें लागू करने की तकनीक का पता लगाना होगा। हमें उस दौर के प्रतीकों का अध्ययन करना होगा।