तालीम से बढ़कर दूसरी कोई ताकत नहीं: सत्यपाल

पटना। बिहार में राज्यपाल सह कुलाधिपति सत्यपाल मलिक ने आज कहा कि तालीम से बढ़कर दूसरी कोई ताकत नहीं है और जो समाज तथा देश शिक्षा को सर्वाधिक महत्व देते हैं, वही तेजी से प्रगति करते हैं।
      श्री मलिक ने यहां के बापू सभागार में नालंदा खुला विविद्यालय के 12वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि तालीम से बढ़कर दूसरी कोई ताकत नहीं है और शिक्षा मनुष्य को नैतिक मूल्यों और आदशरें के प्रति आस्थावान बनाती है। उन्होंने कहा कि बिहार में महिला सशक्तीकरण के प्रयासों का काफी सार्थक परिणाम दिखायी पड़ रहा है ।  
     राज्यपाल ने कहा कि इस समारोह में 29 स्वर्ण पदक प्राप्तकर्ताओं में छाओं की संख्या 20 होना यह साबित करता है कि छाएं अपनी प्रतिभा का समुचित सदुपयोग कर रही हैं। उन्होंने आवान किया कि छाों को भी पढ़ायी में  मन लगाकर कम से कम बराबरी पर जरूर आना चाहिए। पिछले दिनों राजभवन में सम्पन्न कुलपतियों की बैठक का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि विविद्यालयों एवं महाविद्यालयों को अपने सभी भवनों में छाओं के लिए वाशरूम की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि इसके बिना नये महाविद्यालयों को प्रस्वीकृति नहीं दी जाएगी। 
  श्री मलिक ने कहा कि छात्राओं के लिए  कॉमन रूम, बायोमैट्रिक पद्धति से हाजिरी आदि की व्यवस्था भी सभी विविद्यालयों में सुनिश्चित करायी जायेगी। उन्होंने कहा कि सभी विविद्यालयों को आगामी वर्ष  का एकेडमिक और परीक्षा कैलेण्डर शीघ तैयार कर उनका कार्यान्वयन सुनिश्चित करने को भी कहा गया है।    राज्यपाल ने कहा कि कोई भी देश तब संकटग्रस्त होता है जब वहां की शिक्षा व्यवस्था छिन्न-भिन्न हो जाती है। उन्होंने कहा कि‘द्वितीय वियुद्ध’के समय ब्रिटेन ने विभिन्न प्रक्षेाों के सालाना बजट में कमी कर दी थी, लेकिन  उसने शिक्षा के बजट में कोई कमी नहीं की थी। ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री ने उस समय  कहा था कि पुल, मकान, सड़कें, फैक्ट्रियांआदि तो दुबारा बन सकती हैं लेकिन शिक्षा-बजट में कमी करने से एक पूरी पीढ़ी बर्बाद हो जायेगी और मुल्क तबाह हो जायेगा।
     श्री मलिक ने आास्त किया कि राजभवन विविद्यालयों की स्वायत्तता को लेकर कोई भी हस्तक्षेप की मंशा नही रखता और उनकी समस्याओं को लेकर भरपूर सहयोग का नजरिया रखता है। उन्होंने कहा कि हार्वड, कैम्ब्रिज, कोलंबिया, कैलिफोर्निया, शिकागो और एम.आइ .टी. अमेरिका जैसे विविद्यालयों के पूर्ववर्ती छाों को काफी संख्या में नोबेल पुरस्कार मिले हैं, जबकि भारत में यह पुरस्कार कम लोगों को ही मिल सका है। 
         राज्यपाल ने कहा कि हमारे विविद्यालयों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के विकास पर जोर देना चाहिए। इस मौके पर उन्होंने नालंदा खुला विविद्यालय का एकेडमिक सत्र समय पर संचालित करने के लिए कुलपति एवं सभी अधिकारियों को धन्यवाद दिया। 
         समारोह को संबोधित करते हुए मेघालय के राज्यपाल गंगा प्रसाद ने कहा कि नालंदा खुला विविद्यालय के विद्यार्थियों को दहेज-उन्मूलन के लिए जागरूकता अभियान को तेज करने में सहयोग करना चाहिए। इस मौके पर नालंदा खुला विविद्यालय के कुलपति प्रो. आर.के. सिन्हा भी मौजूद थें । राज्यपाल ने छात्र-छात्राओं के बीच स्वर्ण -पदक एवं डिग्रियों का वितरण किया। कार्यक्रम में 98 वर्षीय श्री राजकुमार वैश्य को भी स्नातकोत्तर की डिग्री प्रदान की गयी।