कृषि अर्थशास्त्र की स्मार्ट विधा को विकसित करें विविद्यालय : कल्याण सिंह 

       जयपुर, राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह ने कहा है कि कृषि वैज्ञानिकों एवं कृषि विविद्यालयों के प्रयासों से खेती में क्रान्ति आई है, इसमे कोई सन्देह नहीं है।
       सिंह ने आज उदयपुर में महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विविद्यालय के ग्याहरवें दीक्षांत समारोह को सम्बोन्धित करते हुए कहा कि उन्नत बीजों एवं अद्यतन तकनीक से किसानों को खेती की भरपूर उपज मिल रही है। यद्यपि मेरा मानना है कि कृषि विविद्यालयों एवं वैज्ञानिकों को पैदावार बढ़ाने तक ही अपने को सीमित नहीं रखना चाहिए बल्कि बढ़ी हुई पैदावार का तब तक कोई लाभ नहीं है जब तक उस पैदावार का लाभकारी मूल्य किसानों को ना मिले। 
       सिंह ने कहा कि मेरा मानना है कि उद्योगों की ही भाँति कृषि को भी बाजार के अर्थशास्त्र से जोड़ने का काम करना होगा। इसके लिए कृषि अर्थशास्त्र की स्मार्ट विधा को विविद्यालयों को विकसित करना होगा।  राज्यपाल  ने कहा कि आज देश के विभिन्न भागों से आए दिन यह समाचार मिलते रहते हैं कि अमुक फसल के औने-पौने दाम मिल रहे हैं। आलू कोल्ड स्टोरेज में सड़ रहे हैं, गन्ने को खेतों में जलाया जा रहा है, टमाटर घर पर रखने की बजाय सड़कों पर फेंक देना ज्यादा लाभ का सौदा बन रहा है आदि-आदि। यह स्थितियाँ क्यों आ रही है? इसका क्या समाधान है? इस पर भी कृषि विविद्यालयों को अपनी भूमिका का विस्तार करना होगा।